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Hardoi News: गर्भवती महिला को एड्स पीड़ित बताकर प्रसव के लिए 60 हजार रुपये वसूले
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पाली। पाली कस्बे के हिंद हॉस्पिटल में गर्भवती महिला से जांच में एचआईवी पॉजिटिव दिखाकर 60 हजार रुपये वसूलकर प्रसव कराना अस्पताल के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। शुक्रवार को नोडल अधिकारी ने हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। मौके पर डॉक्टर और स्टाफ मौजूद नहीं मिले। अप्रशिक्षित लोग मरीजों का उपचार करते मिले। नोडल अधिकारी ने हॉस्पिटल को सीज कर दिया है।
भरखनी निवासी एक गर्भवती महिला 30 जून को अपने क्षेत्र की आशा के साथ प्रसव के लिए पाली पीएचसी गई थी। वहां से आशा उसे लेकर हिंद हॉस्पिटल चली गईं। प्रसव से पहले रक्त की जांच कराने को कहा गया। इसकी रिपोर्ट में महिला को बताया गया कि उसे एड्स है। एड्स पीड़िता का प्रसव नहीं कराया जा सकता और इसके नाम पर उससे 60 हजार रुपये वसूल लिए। महिला का सामान्य प्रसव हुआ और उसने बेटे को जन्म दिया।
परिजनों ने सात जुलाई को शाहजहांपुर में जांच कराई तो महिला एड्स पीड़ित नहीं पाई गई। पूरे मामले की शिकायत महिला के पति ने स्वास्थ्य विभाग में की थी। हॉस्पिटल संचालक को नोटिस जारी कर अभिलेख दिखाने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था। शुक्रवार को नोडल अधिकारी डॉ. मनोज सिंह ने हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।
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हॉस्पिटल के पंजीकरण में जिन चिकित्सकों के नाम का जिक्र था वह कोई मौजूद नहीं मिले। दो मरीजों का इलाज होते मिला। अप्रशिक्षित लोग इलाज कर रहे थे। मरीजाें को पीएचसी भेजकर हॉस्पिटल सीज कर दिया गया है। पीएचसी प्रभारी डॉ. आनंद शुक्ला ने बताया कि मामले में संलिप्त आशा का मानदेय रोकते हुए बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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भरखनी निवासी एक गर्भवती महिला 30 जून को अपने क्षेत्र की आशा के साथ प्रसव के लिए पाली पीएचसी गई थी। वहां से आशा उसे लेकर हिंद हॉस्पिटल चली गईं। प्रसव से पहले रक्त की जांच कराने को कहा गया। इसकी रिपोर्ट में महिला को बताया गया कि उसे एड्स है। एड्स पीड़िता का प्रसव नहीं कराया जा सकता और इसके नाम पर उससे 60 हजार रुपये वसूल लिए। महिला का सामान्य प्रसव हुआ और उसने बेटे को जन्म दिया।
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परिजनों ने सात जुलाई को शाहजहांपुर में जांच कराई तो महिला एड्स पीड़ित नहीं पाई गई। पूरे मामले की शिकायत महिला के पति ने स्वास्थ्य विभाग में की थी। हॉस्पिटल संचालक को नोटिस जारी कर अभिलेख दिखाने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था। शुक्रवार को नोडल अधिकारी डॉ. मनोज सिंह ने हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।
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हॉस्पिटल के पंजीकरण में जिन चिकित्सकों के नाम का जिक्र था वह कोई मौजूद नहीं मिले। दो मरीजों का इलाज होते मिला। अप्रशिक्षित लोग इलाज कर रहे थे। मरीजाें को पीएचसी भेजकर हॉस्पिटल सीज कर दिया गया है। पीएचसी प्रभारी डॉ. आनंद शुक्ला ने बताया कि मामले में संलिप्त आशा का मानदेय रोकते हुए बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।