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चार करोड़ के पेंशन घोटाले में दो तत्कालीन कोषाधिकारी निलंबित
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हरदोई। जिले में साल 2010 से 2017 के बीच कोषागार में हुए चार करोड़ रुपये से अधिक के पेंशन घोटाले में शासन ने दो तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
जिले में कोषागार विभाग के जरिये 40938734 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई थी। विभागीय अधिकारियों द्वारा ऐसे लोगों के नाम पेंशन बनाकर जारी कर दी गई थी, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। कई ऐसे लोगों को भी पेंशन जारी कर दी गई थी, जो कभी सरकारी कर्मचारी रहे ही नहीं थे। वर्ष 2010 से 2017 के बीच हुए इस पेंशन घोटाले में पूर्व में हुई जांच में लेखाकार राकेश कुमार, सहायक कोषाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह को निलंबित कर दोनों के विरुद्ध एफआईआर शहर कोतवाली में दर्ज कराई जा चुकी है। अब इस मामले में कड़ा रुख दिखाते हुए शासन ने 13 अगस्त 2010 से 24 जून 2015 तक जिले में वरिष्ठ कोषाधिकारी के पद पर तैनात रहे और इन दिनों प्रयागराज विकास प्राधिकरण में वित्त नियंत्रक के पद पर तैनात दीपांकर शुक्ला को निलंबित कर दिया है। उन पर 1,2351155 रुपये की अनियमित पेंशन का भुगतान लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी की संस्तुति पर किए जाने का आरोप है। निलंबन के दौरान वह लखनऊ कोषागार निदेशालय में संबद्ध रहेंगे। प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय के वित्त नियंत्रक आलोक कुमार अग्रवाल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। वहीं 11 अगस्त 2015 से चार जुलाई 2017 तक हरदोई में वरिष्ठ कोषाधिकारी रहे और इन दिनों कोषागार निदेशालय में संयुक्त निदेशक देवीप्रसाद को 2,8587579 रुपये की अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया है। उन पर भी लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी की संस्तुति पर चेक पर हस्ताक्षर करने का आरोप है। देवीप्रसाद भी निदेशालय से संबद्ध रहेंगे और उनकी जांच भी प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय के वित्त नियंत्रक आलोक कुमार अग्रवाल करेंगे।
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जिले में कोषागार विभाग के जरिये 40938734 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई थी। विभागीय अधिकारियों द्वारा ऐसे लोगों के नाम पेंशन बनाकर जारी कर दी गई थी, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। कई ऐसे लोगों को भी पेंशन जारी कर दी गई थी, जो कभी सरकारी कर्मचारी रहे ही नहीं थे। वर्ष 2010 से 2017 के बीच हुए इस पेंशन घोटाले में पूर्व में हुई जांच में लेखाकार राकेश कुमार, सहायक कोषाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह को निलंबित कर दोनों के विरुद्ध एफआईआर शहर कोतवाली में दर्ज कराई जा चुकी है। अब इस मामले में कड़ा रुख दिखाते हुए शासन ने 13 अगस्त 2010 से 24 जून 2015 तक जिले में वरिष्ठ कोषाधिकारी के पद पर तैनात रहे और इन दिनों प्रयागराज विकास प्राधिकरण में वित्त नियंत्रक के पद पर तैनात दीपांकर शुक्ला को निलंबित कर दिया है। उन पर 1,2351155 रुपये की अनियमित पेंशन का भुगतान लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी की संस्तुति पर किए जाने का आरोप है। निलंबन के दौरान वह लखनऊ कोषागार निदेशालय में संबद्ध रहेंगे। प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय के वित्त नियंत्रक आलोक कुमार अग्रवाल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। वहीं 11 अगस्त 2015 से चार जुलाई 2017 तक हरदोई में वरिष्ठ कोषाधिकारी रहे और इन दिनों कोषागार निदेशालय में संयुक्त निदेशक देवीप्रसाद को 2,8587579 रुपये की अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया है। उन पर भी लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी की संस्तुति पर चेक पर हस्ताक्षर करने का आरोप है। देवीप्रसाद भी निदेशालय से संबद्ध रहेंगे और उनकी जांच भी प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय के वित्त नियंत्रक आलोक कुमार अग्रवाल करेंगे।
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