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32 दुकानें किराये पर, कमेटी को पता नहीं
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हरदोई। शहर के नुमाइश मैदान में लगने वाला 115 वर्षों पुराना मेला साल-दर-साल महंगा होता जा रहा है। वजह, कमेटी ने जिन लोगों को दुकानों का एलाटमेंट किया उन्होंने दुकानें दूसरों को चार गुना किराए पर उठा दीं।
ऐसी 32 दुकानें कई वर्षों से किराये पर हैं और कमेटी को खबर तक नहीं। नुमाइश एवं रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामप्रकाश शुक्ला कहना है कि उन्हें किराये पर दुकानें उठाए जाने की जानकारी नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है तो नियमत: उसकी दुकान का एलाटमेंट निरस्त कर दिया जाएगा।
देश के कोने-कोने में अपनी पहचान रखने वाली ऐतिहासिक नुमाइश मेला इस वर्ष 25 फरवरी से शुरू हुआ है। हार साल होली के आखिर सप्ताह तक मेला चलता है। मेला स्थल पर दुकानों का एलाटमेंट और संचालन सवालों के घेरे में रहा है।
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दुकानों के आवंटन को लेकर कमेटी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। यहां मोहम्मद जाबिर, मोहम्मद शाकिर, राजेंद्र गुप्ता, गुड्डू पाठक, मुन्ना और पंकज, श्याम, रविंद्र, मंगू, राजेंद्र गुप्ता की दुकानों समेत 32 ऐसी दुकानें संचालित हैं
जिन्हें मुख्य आवंटियों ने चार गुना ज्यादा किराये पर उठा रखा है। जिन्हें दुकानें एलाट की गई हैं वह यहां नजर नहीं आते। उनके स्थान पर दूसरे लोग दुकानों का संचालन कर रहे हैं।
खास बात यह है कि ये लोग पिछले कई वर्षों से इसी तरह दुकानों का संचालन कर रहे हैं। लेकिन कमेटी ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई।
कमेटी इसलिए भी शक के घेरे में है क्योंकि एक ही व्यक्ति के नाम चार या पांच दुकानें तक एलाट की गई हैं। इनमें कई लोग खुद कमेटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपनी दुकानें दूसरों को चार गुने किराये पर उठा दिया है।
32 हजार रुपये किराये पर छह फीट की दुकान
नुमाइश में छह फीट की छोटी सी दुकान 32 हजार रुपये किराये पर सांडी के मोहल्ला सरायमुल्लागंज निवासी पंकज ने ले रखी है। पंकज ने बताया कि दुकान बिंदू नाम के व्यक्ति को आवंटित है। बिंदू कमेटी से जुड़ा हैं।
बताया कि 28 हजार रुपये दुकान का किराया व चार हजार रुपये बिजली बिल का है। जबकि इस दुकान से सटी इससे बड़ी 11 फीट की दुकान का कमेटी ने केवल सात हजार रुपये किराया और चार हजार रुपये बिजली बिल वसूला है।
एक व्यक्ति को एलाट सॉफ्टी की पांच दुकानें
मेला कमेटी ने दुकानों के एलाटमेंट में कुछ लोगों पर खुलकर दरियादिली दिखाई है। यहां गुड्डू पाठक नाम के एक व्यक्ति को पांच दुकानें आवंटित हैं। इन पांचों दुकानों पर गुड्डू नाम का कोई भी दुकानदार नहीं मिला।
इन्हीं दुकानों में से एक पर मौजूद रविंद्र ने बताया कि वह कई वर्षों से अधिकृत दुकान मालिक को इसका किराया देते हैं। इस बार भी 40 हजार रुपये किराया दिया है।
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ऐसी 32 दुकानें कई वर्षों से किराये पर हैं और कमेटी को खबर तक नहीं। नुमाइश एवं रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामप्रकाश शुक्ला कहना है कि उन्हें किराये पर दुकानें उठाए जाने की जानकारी नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है तो नियमत: उसकी दुकान का एलाटमेंट निरस्त कर दिया जाएगा।
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देश के कोने-कोने में अपनी पहचान रखने वाली ऐतिहासिक नुमाइश मेला इस वर्ष 25 फरवरी से शुरू हुआ है। हार साल होली के आखिर सप्ताह तक मेला चलता है। मेला स्थल पर दुकानों का एलाटमेंट और संचालन सवालों के घेरे में रहा है।
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दुकानों के आवंटन को लेकर कमेटी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। यहां मोहम्मद जाबिर, मोहम्मद शाकिर, राजेंद्र गुप्ता, गुड्डू पाठक, मुन्ना और पंकज, श्याम, रविंद्र, मंगू, राजेंद्र गुप्ता की दुकानों समेत 32 ऐसी दुकानें संचालित हैं
जिन्हें मुख्य आवंटियों ने चार गुना ज्यादा किराये पर उठा रखा है। जिन्हें दुकानें एलाट की गई हैं वह यहां नजर नहीं आते। उनके स्थान पर दूसरे लोग दुकानों का संचालन कर रहे हैं।
खास बात यह है कि ये लोग पिछले कई वर्षों से इसी तरह दुकानों का संचालन कर रहे हैं। लेकिन कमेटी ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई।
कमेटी इसलिए भी शक के घेरे में है क्योंकि एक ही व्यक्ति के नाम चार या पांच दुकानें तक एलाट की गई हैं। इनमें कई लोग खुद कमेटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपनी दुकानें दूसरों को चार गुने किराये पर उठा दिया है।
32 हजार रुपये किराये पर छह फीट की दुकान
नुमाइश में छह फीट की छोटी सी दुकान 32 हजार रुपये किराये पर सांडी के मोहल्ला सरायमुल्लागंज निवासी पंकज ने ले रखी है। पंकज ने बताया कि दुकान बिंदू नाम के व्यक्ति को आवंटित है। बिंदू कमेटी से जुड़ा हैं।
बताया कि 28 हजार रुपये दुकान का किराया व चार हजार रुपये बिजली बिल का है। जबकि इस दुकान से सटी इससे बड़ी 11 फीट की दुकान का कमेटी ने केवल सात हजार रुपये किराया और चार हजार रुपये बिजली बिल वसूला है।
एक व्यक्ति को एलाट सॉफ्टी की पांच दुकानें
मेला कमेटी ने दुकानों के एलाटमेंट में कुछ लोगों पर खुलकर दरियादिली दिखाई है। यहां गुड्डू पाठक नाम के एक व्यक्ति को पांच दुकानें आवंटित हैं। इन पांचों दुकानों पर गुड्डू नाम का कोई भी दुकानदार नहीं मिला।
इन्हीं दुकानों में से एक पर मौजूद रविंद्र ने बताया कि वह कई वर्षों से अधिकृत दुकान मालिक को इसका किराया देते हैं। इस बार भी 40 हजार रुपये किराया दिया है।