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55 बसों से पहुंचे तीन हजार यात्री
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हरदोई के नुमाइश चौराहे पर दिल्ली से आए लोगों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। लॉकडाउन के चलते दिल्ली यूपी बार्डर पर फंसे श्रमिकों को लेने के लिए शनिवार सुबह यूपी- दिल्ली बार्डर रवाना हुईं 55 बसें रात दो बजे के बाद से यात्रियों को लेकर लौटने लगीं। अधिकारियों के मुताबिक 55 बसों में लगभग तीन हजार लोगों को वापस लाया गया है। इनमें हरदोई समेत सीतापुर व अन्य नजदीकी जनपदों के लोग भी शामिल हैं।
रविवार तड़के कोई बसों की छतों पर बैठा दिखा तो गेट के पास लटककर सफर कर आया। बसें और अन्य वाहन नुमाइश चौराहे पहुंचे तो प्रशासन के सामने यात्रियों की जांच और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करने की चुनौती रही। इसके लिए प्रशासन शनिवार रात से ही मुस्तैद रहा। सुबह छह बजे ही डाक्टरों ने बाहर से आए लोगों को लाइन में लगवा जांच करना शुरू कर दिया। हालांकि इस दौरान निर्धारित दूरी के मानक का पालन नहीं हो पाया। दोपहर को भीड़ कम होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
शनिवार रात 10 बजे से ही प्रशासन बसों की वापसी के बाद की तैयारियों को लेकर नुमाइश चौराहे पर अलर्ट रहा। वहां मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट जंग बहादुर यादव को जब लखनऊ से आए लाल लवकुश का परिवार दिखा तो उन्होंने पूछताछ की। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें फर्रुखाबाद भेजने के लिए वाहन भी तलाशे गए।
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वाहन न मिलने पर उन्होंने पैदल यात्रा ही शुरू कर दी। रविवार तड़के नुमाइश चौराहे पर दिल्ली व आसपास के जिलों से बसों का आना शुरू हो गया। यात्रियों के नाम पते नोट कर व उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर वाहनों द्वारा भेजा जा रहा था। रविवार सुबह करीब छह बजे नुमाइश चौराहे से डीएम चौराहे तक यात्रियों की कतार लगी रही। जांच के बाद जब वाहनों पर बैठकर रवाना होने का नंबर आया तो लोगों को जगह ही नहीं मिली। जिन्हें जगह मिली तो अधिक किराया देना पड़ा। रोडवेज के एआरएम आरबी यादव ने बताया कि औसतन हर बस में 50 से 55 लोगों को लाया गया है। रविवार को फिर 35 बसें दिल्ली रवाना की गईं।
530 किलोमीटर का सफर तय कराएगी जुगाड़
दिल्ली से हैदरगढ़ करीब 530 किलोमीटर का सफर देशराज जुगाड़ गाड़ी के भरोसे करेंगे। हरदोई पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह इसी वाहन से दिल्ली में सब्जी की ढुलाई करते हैं। उनके साथ अन्य साथी भी उन्हीं के जिले के हैं इसलिए दूसरे जुगाड़ वाहन को भी जोड़कर ले जा रहे हैं। इससे पेट्रोल की खपत कम होगी।
नहीं दिखे वाहन तो पैदल ही चल पड़े
कुछ ऐसे लोग भी रहे जो दिल्ली से आकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद पैदल ही निकल लिए। उनमें अधिकांश जिले के क्षेत्रों के ही थे। बसें न मिलने पर वह चल पड़े।
प्यारे खरगोशों को भी लिया साथ
दिल्ली से ही किराये का डाला करके लखनऊ जा रहे अनीश के परिवार ने अपना सारा सामान डाले में रख लिया। उन्होंने नुमाइश चौराहे से गुजरते हुए बताया कि उन्होंने पालतू खरगोश को भी साथ ले लिया।
पापा, मैं हरदोई आ गई...
ग्रेटर नोएडा में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाली अंकिता लखनऊ की रहने वाली है। वह अकेले ही बस से यात्रा कर रविवार सुबह हरदोई आ गई। यहां पहुंचकर उसने मोबाइल फोन से अभिभावकों को सूचना दी कि वह आ गई है। कुछ ही देर में वहां भी पहुंच जाएगी।
बस किसी तरह अहिरोरी तक साधन मिल जाए
अपने परिवार के साथ गाजियाबाद से नि:शक्त शिमला यहां पहुंची। नुमाइश चौराहे पर पूछा भइया अहिरोरी के लिए कोई साधन मिलेगा। बस कैसे भी मैं अपने परिवार संग अपने गांव पहुंच जाऊं।
मां संग बच्चों ने भी झेला दर्द
पति शंकर के साथ नौ माह के बेटे अभिषेक को लेकर दिल्ली से लखनऊ जा रही पूजा ने बताया कि किस तरह बेटे को भीड़ से बचाती हुईं जा रहीं हैं, वह ही जानती हैं। ये दिन उन्हें आजीवन याद रहेंगे।
दिल्ली से बिलग्राम के लिए निकले मोतीलाल का परिवार सुबह सात बजे नुमाइश चौराहे पहुंचने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराके वाहन तलाश रहा था। परिवार की पिंकी व रीना बच्चों को गोद में उठाए वाहनों को तलाश रहीं थीं। उनका यही कहना था कि अब दिल्ली नहीं जाएंगे।
गाजियाबाद से लखनऊ जा रहे राजू ने बताया कि पत्नी संगीता व बेटे अभिषेक (9) को लेकर घर जाने की सोचकर परेशान हूं। वह तीन रातों से सोया नहीं है। दिल्ली से रात में वाहन मिलने के बाद कुछ उम्मीद जगी कि हां अब वह घर भी पहुंच सकता है।
मंडी पदाधिकारियों ने बांटे लंच पैकेट
नवीन गल्ला मंडी के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने रविवार दोपहर नुमाइश चौराहे पर बाहर से आए लोगों को लंच पैकेट बांटे। इस मौके पर अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता, उपाध्यक्ष रामशरण गुप्ता, महामंत्री हरिश्याम गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष मनोज गुप्ता, सूरज गुप्ता व अमित गुप्ता मौजूद रहे।
पालिका ने शुरू किया रैन बसेरा
रोडवेज बस अड्डे के बाहर नगर पालिका का रैन बसेरा शुरू हो गया है। ईओ नगर पालिका रविशंकर शुक्ला ने बताया कि जो लोग दूर दराज से आ रहे हैं, वह रैन बसेरा में ठहर सकते हैं।
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रविवार तड़के कोई बसों की छतों पर बैठा दिखा तो गेट के पास लटककर सफर कर आया। बसें और अन्य वाहन नुमाइश चौराहे पहुंचे तो प्रशासन के सामने यात्रियों की जांच और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करने की चुनौती रही। इसके लिए प्रशासन शनिवार रात से ही मुस्तैद रहा। सुबह छह बजे ही डाक्टरों ने बाहर से आए लोगों को लाइन में लगवा जांच करना शुरू कर दिया। हालांकि इस दौरान निर्धारित दूरी के मानक का पालन नहीं हो पाया। दोपहर को भीड़ कम होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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शनिवार रात 10 बजे से ही प्रशासन बसों की वापसी के बाद की तैयारियों को लेकर नुमाइश चौराहे पर अलर्ट रहा। वहां मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट जंग बहादुर यादव को जब लखनऊ से आए लाल लवकुश का परिवार दिखा तो उन्होंने पूछताछ की। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें फर्रुखाबाद भेजने के लिए वाहन भी तलाशे गए।
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वाहन न मिलने पर उन्होंने पैदल यात्रा ही शुरू कर दी। रविवार तड़के नुमाइश चौराहे पर दिल्ली व आसपास के जिलों से बसों का आना शुरू हो गया। यात्रियों के नाम पते नोट कर व उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर वाहनों द्वारा भेजा जा रहा था। रविवार सुबह करीब छह बजे नुमाइश चौराहे से डीएम चौराहे तक यात्रियों की कतार लगी रही। जांच के बाद जब वाहनों पर बैठकर रवाना होने का नंबर आया तो लोगों को जगह ही नहीं मिली। जिन्हें जगह मिली तो अधिक किराया देना पड़ा। रोडवेज के एआरएम आरबी यादव ने बताया कि औसतन हर बस में 50 से 55 लोगों को लाया गया है। रविवार को फिर 35 बसें दिल्ली रवाना की गईं।
530 किलोमीटर का सफर तय कराएगी जुगाड़
दिल्ली से हैदरगढ़ करीब 530 किलोमीटर का सफर देशराज जुगाड़ गाड़ी के भरोसे करेंगे। हरदोई पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह इसी वाहन से दिल्ली में सब्जी की ढुलाई करते हैं। उनके साथ अन्य साथी भी उन्हीं के जिले के हैं इसलिए दूसरे जुगाड़ वाहन को भी जोड़कर ले जा रहे हैं। इससे पेट्रोल की खपत कम होगी।
नहीं दिखे वाहन तो पैदल ही चल पड़े
कुछ ऐसे लोग भी रहे जो दिल्ली से आकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद पैदल ही निकल लिए। उनमें अधिकांश जिले के क्षेत्रों के ही थे। बसें न मिलने पर वह चल पड़े।
प्यारे खरगोशों को भी लिया साथ
दिल्ली से ही किराये का डाला करके लखनऊ जा रहे अनीश के परिवार ने अपना सारा सामान डाले में रख लिया। उन्होंने नुमाइश चौराहे से गुजरते हुए बताया कि उन्होंने पालतू खरगोश को भी साथ ले लिया।
पापा, मैं हरदोई आ गई...
ग्रेटर नोएडा में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाली अंकिता लखनऊ की रहने वाली है। वह अकेले ही बस से यात्रा कर रविवार सुबह हरदोई आ गई। यहां पहुंचकर उसने मोबाइल फोन से अभिभावकों को सूचना दी कि वह आ गई है। कुछ ही देर में वहां भी पहुंच जाएगी।
बस किसी तरह अहिरोरी तक साधन मिल जाए
अपने परिवार के साथ गाजियाबाद से नि:शक्त शिमला यहां पहुंची। नुमाइश चौराहे पर पूछा भइया अहिरोरी के लिए कोई साधन मिलेगा। बस कैसे भी मैं अपने परिवार संग अपने गांव पहुंच जाऊं।
मां संग बच्चों ने भी झेला दर्द
पति शंकर के साथ नौ माह के बेटे अभिषेक को लेकर दिल्ली से लखनऊ जा रही पूजा ने बताया कि किस तरह बेटे को भीड़ से बचाती हुईं जा रहीं हैं, वह ही जानती हैं। ये दिन उन्हें आजीवन याद रहेंगे।
दिल्ली से बिलग्राम के लिए निकले मोतीलाल का परिवार सुबह सात बजे नुमाइश चौराहे पहुंचने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराके वाहन तलाश रहा था। परिवार की पिंकी व रीना बच्चों को गोद में उठाए वाहनों को तलाश रहीं थीं। उनका यही कहना था कि अब दिल्ली नहीं जाएंगे।
गाजियाबाद से लखनऊ जा रहे राजू ने बताया कि पत्नी संगीता व बेटे अभिषेक (9) को लेकर घर जाने की सोचकर परेशान हूं। वह तीन रातों से सोया नहीं है। दिल्ली से रात में वाहन मिलने के बाद कुछ उम्मीद जगी कि हां अब वह घर भी पहुंच सकता है।
मंडी पदाधिकारियों ने बांटे लंच पैकेट
नवीन गल्ला मंडी के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने रविवार दोपहर नुमाइश चौराहे पर बाहर से आए लोगों को लंच पैकेट बांटे। इस मौके पर अध्यक्ष वेद प्रकाश गुप्ता, उपाध्यक्ष रामशरण गुप्ता, महामंत्री हरिश्याम गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष मनोज गुप्ता, सूरज गुप्ता व अमित गुप्ता मौजूद रहे।
पालिका ने शुरू किया रैन बसेरा
रोडवेज बस अड्डे के बाहर नगर पालिका का रैन बसेरा शुरू हो गया है। ईओ नगर पालिका रविशंकर शुक्ला ने बताया कि जो लोग दूर दराज से आ रहे हैं, वह रैन बसेरा में ठहर सकते हैं।