फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   156 th birthday of grand celebration district

धूमधाम से मनेगा जिले का 156वां जन्मदिन

Tue, 27 Oct 2015 11:15 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई Updated Tue, 27 Oct 2015 11:15 PM IST
विज्ञापन
156 th birthday of grand celebration district
आठ जिलों की सीमाओं से लगा एवं पंच नदियों से घिरा हरदोई जनपद बुधवार को
विज्ञापन
156 बरस का हो जाएगा। इस लंबे सफर के दौरान तरक्की की कई सीढ़ियां जिले ने चढ़ीं। शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से लेकर परिवहन व विकास के मार्ग पर भी आस पास जिलों का पीछे छोड़ दिया। विकास से शहर का दायरा बढ़ा और शिक्षा ने लोगों की सोच बदली। जन्मदिन पर

बुधवार को जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। हरदोई का पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व रहा है। इसके स्थापना दिवस को लेकर विभिन्न जनश्रुतियां व मान्यताएं रही हैं लेकिन ब्रिटिश इतिहासकारों व गजेटियर के लेखकों के अनुसार 28 अक्तूबर 1858 स्थापना का दिन माना जाता है। इस तरह सेमल्लावां से हरदोई मुख्यालय होने के बाद बुधवार को अपना जिला 156 साल

का हो गया है। जिले का जन्मदिन मनाने के  लिए तैयारियां मंगलवार को भी जारी रहीं। जन्मदिन पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा व चर्च पर विशेष पूजन कर जिले के उज्ज्वल भविष्य व विकास के लिए प्रार्थना की जाएगी। महर्षि विद्या मंदिर में सुबह आठ बजे बच्चों के द्वारा प्रार्थना सभा की जाएगी। शाहाबाद कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में सांस्कृतिक

कार्यक्रम सुबह 11 बजे, दोपहर दो बजे सांई म्यूजिकल ग्रुप की तरफ से प्रेक्षागृह में दो बजे कार्यक्रम और अन्नदाता सहायता मंच की ओर से हरदोई का एक केक दोपहर तीन बजे हरदोई बाबा मंदिर परिसर में काटा जाएगा। इसके अलावा वन विभाग की ओर से पौधरोपण भी किया जाएगा। साथ ही जिले की पांचों तहसीलों पर भी ये दिन धूमधाम से मनेगा।

एसडीएम ने खोजा, हमने निखारा
शाहाबाद के एसडीएम डा. अशोक शुक्ला ने भी काफी मंथन किया और हरदोई स्थापना दिवस 28 अक्तूबर 1858 को होने का निष्कर्ष निकाला। तमाम तर्कों के बाद इसी दिन पर स्थापना दिवस की मोहर लग गई। राजकीय गजट में जिक्र है कि 28 अक्तूबर 1858 के उपरांत जनपद मुख्यालय मल्लावां का अस्तित्व समाप्त हो गया और शासक किला छोड़ चले गए थे।

इसलिए इसी दिन जनपद का स्थापना दिवस माना जाए। इसके बाद से ही एसडीएम की खोज को निखारने व जिले को उसका हक दिलाने के लिए अमर उजाला पिछले साल से ही प्रयासरत है।

1904 का गजेटियर ये बोल रहा...
1904 के गजेटियर के अनुसार प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन 1857 के दौरान कटियारी क्षेत्र का तालुकेदार हरदेव बक्श फतेहगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लगातार भय के बावजूद पूरे संघर्ष में वफादार बना रहा। मुख्य ब्रिटिश सेनानायक के निर्देश पर उस समय उत्तर पश्चिम अवध में ब्रिटिश सेना की तीन टुकड़ियां सेनानियों के खिलाफ कार्यरत थी। इनमें से एक

को ब्रिगेडियर हाल के अधीन फतेहगढ़ से जनपद मल्लावां मे होते हुए सीतापुर की ओर बढ़ने का आदेश था। इसके बाद 28 तारीख तक रूइया का किला भी अन्य की भांति क्षतिग्रस्त किया गया।

अपने जिले की भौगौलिक स्थिति
जनपद की उत्तरी सीमाएं शाहजहांपुर-लखीमपुर, दक्षिणी सीमाएं उन्नाव-लखनऊ तथा पश्चिमी सीमा कानपुर-फरुखाबाद से मिलती हैं। पूर्वी सीमा गोमती नदी बनाती है जो इसे सीतापुर जनपद से पृथक करती है। इसका भौगौलिक क्षेत्रफल 5986 वर्ग किलोमीटर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed