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Hardoi News: विद्यालयों की साफ-सफाई पर फिर खर्च होंगे 15 करोड़
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हरदोई। परिषदीय विद्यालयों में विगत पांच साल से शौचालय टायलेट क्लीनर से और फर्श फिनायल से साफ की जा रही है। खाने से पूर्व विद्यार्थी हैंडवाॅश से हाथ धो रहे हैं, ताकि इनके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। यह हम नहीं विद्यालय में विगत पांच वर्ष से खर्च हो रही कंपोजिट ग्रांट के आंकड़े कह रहे हैं। इस बार फिर विद्यालयों को 15 करोड़ की धनराशि स्थानांतरित की जा रही है। इससे यह सुविधाएं विद्यालयों को आगे भी मिलती रहे।
जिले में 3446 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें चार लाख 39 हजार 245 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों को संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रतिवर्ष कंपोजिट ग्रांट के रूप में धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2018 से पूर्व प्राथमिक विद्यालय को पांच हजार और जूनियर हाईस्कूल को सात हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, अतिरिक्त कक्षों के लिए धनराशि दस हजार तक भेजी जाती थी। इसमें विद्यालय के संसाधन के साथ रंगाई-पुताई भी शामिल थी।
मगर वर्ष 2018 से विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर धनराशि स्थानांतरित की जाती है। जो 10 हजार से एक लाख तक प्रति विद्यालय उपलब्ध कराई जाती है। विद्यालय की रंगाई-पुताई व अन्य निर्माण कार्य कायाकल्प के तहत प्राप्त बजट से कराएं जाते है। इसलिए कंपोजिट ग्रांट का प्रयोग सिर्फ विद्यालय के रख-रखाव में ही व्यय किया जाता है, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधा मिल सके।
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प्रतिवर्ष यह सामग्री की होती खरीद-
विभागीय निर्देशानुसार कंपोजिट ग्रांट की 10 प्रतिशत धनराशि साफ-सफाई पर व्यय की जाती है। जिसमें टायलेट क्लीनर, फिनालय, साबुन, चूना, झाडू, डस्टबिन, हैंडवास, नेल कटर, फास्ट ऐड बाक्स का सामान, दवाइयां, जूनियर विद्यालयों के प्रयोगशाला की सामग्री, बॉलपेटिंग, एलईडी, ट्यूबलाइट, पंखे की मरम्मत, बिजली स्विच की मरम्मत, इंटरनेट पर व्यय, व्हाइट व ग्रीन ब्लैक बोर्ड, अग्निशमन यंत्र की रिफीलिंग आदि शामिल है।
इस प्रकार भेजी जा रही धनराशि-
विद्यालय की संख्या- धनराशि प्रति विद्यालय
30- 10 हजार
1177 - 25 हजार
1892 - 50 हजार
346- 75 हजार
एक- एक लाख
3446- को 1503.75 लाख
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जिले में 3446 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें चार लाख 39 हजार 245 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों को संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रतिवर्ष कंपोजिट ग्रांट के रूप में धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2018 से पूर्व प्राथमिक विद्यालय को पांच हजार और जूनियर हाईस्कूल को सात हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, अतिरिक्त कक्षों के लिए धनराशि दस हजार तक भेजी जाती थी। इसमें विद्यालय के संसाधन के साथ रंगाई-पुताई भी शामिल थी।
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मगर वर्ष 2018 से विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर धनराशि स्थानांतरित की जाती है। जो 10 हजार से एक लाख तक प्रति विद्यालय उपलब्ध कराई जाती है। विद्यालय की रंगाई-पुताई व अन्य निर्माण कार्य कायाकल्प के तहत प्राप्त बजट से कराएं जाते है। इसलिए कंपोजिट ग्रांट का प्रयोग सिर्फ विद्यालय के रख-रखाव में ही व्यय किया जाता है, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधा मिल सके।
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प्रतिवर्ष यह सामग्री की होती खरीद-
विभागीय निर्देशानुसार कंपोजिट ग्रांट की 10 प्रतिशत धनराशि साफ-सफाई पर व्यय की जाती है। जिसमें टायलेट क्लीनर, फिनालय, साबुन, चूना, झाडू, डस्टबिन, हैंडवास, नेल कटर, फास्ट ऐड बाक्स का सामान, दवाइयां, जूनियर विद्यालयों के प्रयोगशाला की सामग्री, बॉलपेटिंग, एलईडी, ट्यूबलाइट, पंखे की मरम्मत, बिजली स्विच की मरम्मत, इंटरनेट पर व्यय, व्हाइट व ग्रीन ब्लैक बोर्ड, अग्निशमन यंत्र की रिफीलिंग आदि शामिल है।
इस प्रकार भेजी जा रही धनराशि-
विद्यालय की संख्या- धनराशि प्रति विद्यालय
30- 10 हजार
1177 - 25 हजार
1892 - 50 हजार
346- 75 हजार
एक- एक लाख
3446- को 1503.75 लाख