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नोटबंदी: ...तो चंदा जुटाकर होगी चार गांवों में बेटियों की शादी
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 22 Nov 2016 09:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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विकास खंड हापुड़ के चार गांव ऐसे हैं, जहां बेटी की डोली उठाने व मां की अरष्टि के लिए चंदा जुटाने की नौबत आ गई है। इन गांवों के हजारों ग्रामीणों का खाता हापुड़ के चंडी रोड स्थित जिला सहकारी बैंक की सायंकालीन शाखा में है, पांच दिन से यहां कैश ही नहीं आ सका है।
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सब्र टूटा तो मंगलवार को ग्रामीणों ने प्रबंधक को बंधक बना लिया। अब ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बेटियों की शादी करने का निर्णय लिया है। क्षेत्र के गांव वझीलपुर, खड़खड़ी, श्यामपुर, ददायरा के हजारों ग्रामीणों का खाता चंडी रोड स्थित जिला सहकारी बैंक की सायंकालीन शाखा में है।
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चारों गांवों में करीब एक दर्जन शादियां आगामी 10 दिनों में होनी हैं। तीन दिन बाद वझीलपुर में एक ग्रामीण को अपनी मां की आरष्टि भी मनानी है। लोगों ने बताया कि बैंक में बीते पांच दिन से कैश नहीं आया है।
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दर्जनों की संख्या में ग्रामीण बैंक पर पहुंच रहे हैं, लेकिन कैश न होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। सोमवार शाम को ग्रामीणों ने बैंक में धरना भी दिया था। बुधवार को भी हालात नहीं सुधरे, शादी और आरष्टि के कार्ड लिए ग्रामीण प्रबंधक से कैश देने की गुहार लगाते रहे।
बैंक में कैश नहीं आने से मजबूर प्रबंधक भी ग्रामीणों को आश्वासन के बजाय कुछ नहीं दे सके। सब्र टूटा तो ग्रामीणों ने प्रबंधक को बंधक बना लिया। लेकिन प्रबंधक की मजबूरी देख ग्रामीणों ने उन्हें मुक्त कर दिया।
वझीलपुर निवासी किसान ज्ञानेंद्र त्यागी ने बताया कि चारों गांवों में पैसे की जबरदस्त किल्लत बन रही है, बैंक साथ नहीं दे रहे हैं मजबूरी में अब चंदा एकत्र कर शादी का काज पूरा किया जाएगा।
उधर, गढ़ रोड स्थित यूनियन बैंक में कैश खत्म होने पर मंगलवार को ग्राहक भड़क उठे। लोगों ने बैंक के बाहर जमकर हंगामा किया, इस दौरान पुलिस को व्यवस्था बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
ग्राहकों का आरोप था कि बीते चार दिन से वह बैंक के बाहर कतार में लग रहे हैं, लेकिन कैश खत्म होने की बात कह उन्हें वापस भेज दिया जाता है। घर खर्च चलाने में मुश्किल आ रही है। इतना ही नहीं बैंक में दोपहर तीन बजे के बाद कैश भी जमा नहीं किया जा सका।
इसके विरोध में भी ग्राहकों ने हंगामा किया। वहीं, जिला अग्रणी बैंक के प्रबंधक एपी चतुर्वेदी का कहना है कि बैंकों में कैश पहुंचाया जा रहा है, जिन बैंकों में कैश नहीं पहुंच रहा, वह निरीक्षण कर व्यवस्था बनवाएंगे।