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दुनिया में कोई ऐसा कार्य नहीं जिसे मन ठान ले और वह पूरा न हो : प्रदीप मिश्रा
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हाफिजपुर। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कोई किताब पढ़ो या मत पढ़ो, लेकिन अपने मन के अंदर की किताब को जरूर पढ़ो। दुनिया में काई कार्य ऐसा नहीं है। जिसे जब मन ठान ले और वह कार्य पूरा न हो। हमारा मन साफ होगा और ईश्वर में लीन रहेगा तो रह कार्य होगा। ईश्वर हमें सभी अच्छे कार्यों को करने के लिए शक्ति देते हैं। मंगलवार को कथा के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
बाइपास स्थित जेएमएस कॉलेज में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में बोलते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने चौथे दिन शिव महिमा का वर्णन किया। उन्होंने श्रीरामचरित मानस में हनुमान जी की शक्ति जाग्रत करने का वर्णन किया। कहा कि माता जानकी के हरण के बाद उनको खोजने के लिए सभी लोगों को लगाया गया। समुद्र के किनारे बैठे सभी वानर समुद्र को पार करने पर मंथन कर रहे थे। इस बीच हनुमान जी को अपना बल याद नहीं आ रहा था। तब जामवंत ने हनुमान जी को उनके मन के अंदर छिपी शक्ति को जाग्रत किया। उसके बाद वे समुद्र को लांघ गए और लंका जाकर माता सीता का पता करके लंका का दहन कर दिया। लंका का दहन रावण के मन में चल रहे बुरे विचारों का दहन था। रावण लंका दहन को भी नहीं समझ सका और अंत में उसकी गलती व शक्तियों पर घमंड के कारण उसे मृत्यु ही प्राप्त हुई। आज रावण सभी के लिए एक सबक के बराबर है। उन्होंने कहा कि इसलिए आप लोग अपने मन की शक्ति को जाग्रत करो व भगवान को प्राप्त करने के लिए मन को सुंदर बनाओ। उन्होंने देवाधिदेव महादेव को एक लोटा जल देने के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि तन की सुंदरता के लिए अनेक स्थानों पर ब्यूटी पार्लर खुले हुए हैं। तन की सुंदरता से जगत के प्राणी रीझ सकते हैं, लेकिन मन की सुंदरता से देवों के देव महादेव प्रसन्न होते हैं ।
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बाइपास स्थित जेएमएस कॉलेज में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में बोलते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने चौथे दिन शिव महिमा का वर्णन किया। उन्होंने श्रीरामचरित मानस में हनुमान जी की शक्ति जाग्रत करने का वर्णन किया। कहा कि माता जानकी के हरण के बाद उनको खोजने के लिए सभी लोगों को लगाया गया। समुद्र के किनारे बैठे सभी वानर समुद्र को पार करने पर मंथन कर रहे थे। इस बीच हनुमान जी को अपना बल याद नहीं आ रहा था। तब जामवंत ने हनुमान जी को उनके मन के अंदर छिपी शक्ति को जाग्रत किया। उसके बाद वे समुद्र को लांघ गए और लंका जाकर माता सीता का पता करके लंका का दहन कर दिया। लंका का दहन रावण के मन में चल रहे बुरे विचारों का दहन था। रावण लंका दहन को भी नहीं समझ सका और अंत में उसकी गलती व शक्तियों पर घमंड के कारण उसे मृत्यु ही प्राप्त हुई। आज रावण सभी के लिए एक सबक के बराबर है। उन्होंने कहा कि इसलिए आप लोग अपने मन की शक्ति को जाग्रत करो व भगवान को प्राप्त करने के लिए मन को सुंदर बनाओ। उन्होंने देवाधिदेव महादेव को एक लोटा जल देने के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि तन की सुंदरता के लिए अनेक स्थानों पर ब्यूटी पार्लर खुले हुए हैं। तन की सुंदरता से जगत के प्राणी रीझ सकते हैं, लेकिन मन की सुंदरता से देवों के देव महादेव प्रसन्न होते हैं ।
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