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Hapur News: राज्यपाल ने तलब की पत्रावली, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
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संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। मोनाड यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री-मार्कशीट की बिक्री मामले में संस्थान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। डीएम द्वारा की गई मान्यता रद्द करने की सिफारिश का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल ने पूरे मामले की पत्रावली तलब की है। ऐसे में विश्वविद्यालय की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जांच में वे बेदाग साबित होंगे।
दरअसल, एक प्रक्रिया के तहत निजी विश्वविद्यालय की मान्यता राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही दी जाती है। तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किसी विश्वविद्यालय का संचालन शुरू होता है। एक्सपर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी की मान्यता राज्यपाल से मिलने के पांच साल बाद यूजीसी से स्वीकृति करानी होती है। यूजीसी द्वारा यूनिवर्सिटी के मानकों का पालन कराने का निरीक्षण किया जाता है। फर्जीवाड़े का प्रकरण सामने आने के बाद एसटीएफ ने मालिक समेत इस पूरे गिरोह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद से मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है।
डीएम अभिषेक पांडेय ने 19 मई को शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने मोनाड की मान्यता और पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की थी। डीएम के पत्र के बाद शासन स्तर से जांच टीम का गठन किया गया था। इस मामले में पांच सदस्यीय टीम ने यूनिवर्सिटी की पत्रावली की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। हालांकि राज्यपाल की ओर से पूरी रिपोर्ट को तलब किया गया है। जिलाधिकारी और एसटीएफ के साथ ही उच्च शिक्षा विभाग की टीम द्वारा भी महत्वपूर्ण फाइल शासन को उपलब्ध कराई गई हैं। जिन्हे राजभवन में मंगवा लिया गया है। राजभवन की एक्सपर्ट टीम मोनार्ड मामले की जांच करेगी। ऐसे में विश्वविद्यालय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उधर, विश्वविद्यालय के अधिकारी किसी भी जांच के लिए तैयार रहने का दावा कर रहे हैं।
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मोनाड यूनिवर्सिटी के कुलपति, डॉ.एके जावेद ने बताया कि इस मामले को राजनीतिक साजिश के तहत बेवजह का तूल दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के स्तर पर कोई फर्जी डिग्री-मार्कशीट जारी नहीं की गई है। हमारे पास पूरा रिकार्ड मौजूद है। हम किसी भी निष्पक्ष जांच को तैयार हैं। उच्च शिक्षा विभाग, एसटीएफ व राजभवन द्वारा जो जानकारी मांगी गई है, सभी दस्तावेज मुहैया करा दिए गए हैं।
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हापुड़। मोनाड यूनिवर्सिटी के फर्जी डिग्री-मार्कशीट की बिक्री मामले में संस्थान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। डीएम द्वारा की गई मान्यता रद्द करने की सिफारिश का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल ने पूरे मामले की पत्रावली तलब की है। ऐसे में विश्वविद्यालय की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जांच में वे बेदाग साबित होंगे।
दरअसल, एक प्रक्रिया के तहत निजी विश्वविद्यालय की मान्यता राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही दी जाती है। तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किसी विश्वविद्यालय का संचालन शुरू होता है। एक्सपर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी की मान्यता राज्यपाल से मिलने के पांच साल बाद यूजीसी से स्वीकृति करानी होती है। यूजीसी द्वारा यूनिवर्सिटी के मानकों का पालन कराने का निरीक्षण किया जाता है। फर्जीवाड़े का प्रकरण सामने आने के बाद एसटीएफ ने मालिक समेत इस पूरे गिरोह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद से मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है।
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डीएम अभिषेक पांडेय ने 19 मई को शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने मोनाड की मान्यता और पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की थी। डीएम के पत्र के बाद शासन स्तर से जांच टीम का गठन किया गया था। इस मामले में पांच सदस्यीय टीम ने यूनिवर्सिटी की पत्रावली की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। हालांकि राज्यपाल की ओर से पूरी रिपोर्ट को तलब किया गया है। जिलाधिकारी और एसटीएफ के साथ ही उच्च शिक्षा विभाग की टीम द्वारा भी महत्वपूर्ण फाइल शासन को उपलब्ध कराई गई हैं। जिन्हे राजभवन में मंगवा लिया गया है। राजभवन की एक्सपर्ट टीम मोनार्ड मामले की जांच करेगी। ऐसे में विश्वविद्यालय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उधर, विश्वविद्यालय के अधिकारी किसी भी जांच के लिए तैयार रहने का दावा कर रहे हैं।
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मोनाड यूनिवर्सिटी के कुलपति, डॉ.एके जावेद ने बताया कि इस मामले को राजनीतिक साजिश के तहत बेवजह का तूल दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के स्तर पर कोई फर्जी डिग्री-मार्कशीट जारी नहीं की गई है। हमारे पास पूरा रिकार्ड मौजूद है। हम किसी भी निष्पक्ष जांच को तैयार हैं। उच्च शिक्षा विभाग, एसटीएफ व राजभवन द्वारा जो जानकारी मांगी गई है, सभी दस्तावेज मुहैया करा दिए गए हैं।