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गन्ने की खेती से मुंह फेर रहे जिले के किसान,दो हजार हेक्टेयर रकबा घटा
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खास खबर--
गन्ने से किसानों का हो रहा मोहभंग, दो हजार हेक्टेयर घटा रकबा
जतिन त्यागी
हापुड़। भुगतान में देरी व गन्ने के दाम न बढ़ने के चलते किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होता जा रहा है। पेराई सत्र 2020-21 में लगभग दो हजार हेक्टेयर रकबा घट गया है। इन किसानों ने अब दूसरी फसल की तरफ रुख कर लिया है। वहीं जल्द पैसों की चाह में किसान क्रेशरों पर नकद में गन्ना सप्लाई कर रहे हैं। स्थिति यही रही तो गन्ने की खेती छोड़ने वाले किसानों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत हापुड़ जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। कृषि कानूनों का किसान पहले से ही विरोध कर रहे हैं, ऐसे में उम्मीद थी कि सरकार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए गन्ने के दामों में इजाफा करेगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका और तीन साल पुराने दाम फिर से रिवाइज कर दिए गए। इस अनदेखी का खामियाजा किसानों को भी उठाना पड़ रहा है।
हापुड़ जिले के गन्ना किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहला तो गन्ने के दाम और दूसरा मिलों पर अटका बीते सत्र का भुगतान। हापुड़ जिले की दोनों शुगर मिलों ने किसानों का सत्र 2019-20 का करीब 107 करोड़ रुपये भुगतान अटकाया हुआ है। यह समस्या प्रत्येक साल बनी रहती है।
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इसका परिणाम यह है कि सत्र 2020-21 में किसानों ने गन्ने का रकबा करीब दो हजार हेक्टेयर घटा दिया है, इसके स्थान पर अन्य फसलों की बुवाई शुरू कर दी गई है। भुगतान की समस्या के चलते किसान अपना गन्ना क्रेशरों पर सप्लाई कर रहे हैं। यहां दाम तो कम मिल रहे हैं, लेकिन पैसा नकद में मिल जाता है। इससे किसानों में संतोष है। गन्ना विभाग भुगतान को लेकर कोशिश करने का दावा करता है, लेकिन मिलों पर इनका कोई दबाव नहीं पड़ता।
जिले में गन्ने के रकबे की स्थिति
वर्ष रकबा
2020-21 38,945 हेक्टेयर
2019-20 41,000 हेक्टेयर
गन्ना मिलों पर भुगतान की स्थिति
मिल बकाया भुगतान
सिंभावली 91 करोड़
बृजनाथपुर 17 करोड़
(नोट: यह बकाया सत्र 2019-20 का है, वर्तमान सत्र का मिलों ने कोई भुगतान नहीं किया है।)
गन्ना किसान हो रहे कर्जदार
चीनी मिलों द्वारा किसानों का भुगातन समय पर नहीं किया जा रहा है। इसके चलते किसानों को बैंकों व साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है। वहीं भुगतान की आस में ब्याज की मार भी पड़ रही है। गन्ना भुगतान को दूसरा साल चल रहा है और मिल किसानों का पैसा दबाकर बैठे हुए हैं। जबकि रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी किसानों को इधर उधर से पैसे लेने पड़ रह हैं।
अधिकारी कहिन-
जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने बताया कि गन्ना भुगतान को लेकर लगातार शुगर मिलों पर दबाव बनाया हुआ है। कागजी कार्रवाई की जा रही है, जल्द किसानों को बीते सत्र का पूरा भुगतान करा दिया जाएगा।
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गन्ने से किसानों का हो रहा मोहभंग, दो हजार हेक्टेयर घटा रकबा
जतिन त्यागी
हापुड़। भुगतान में देरी व गन्ने के दाम न बढ़ने के चलते किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होता जा रहा है। पेराई सत्र 2020-21 में लगभग दो हजार हेक्टेयर रकबा घट गया है। इन किसानों ने अब दूसरी फसल की तरफ रुख कर लिया है। वहीं जल्द पैसों की चाह में किसान क्रेशरों पर नकद में गन्ना सप्लाई कर रहे हैं। स्थिति यही रही तो गन्ने की खेती छोड़ने वाले किसानों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत हापुड़ जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। कृषि कानूनों का किसान पहले से ही विरोध कर रहे हैं, ऐसे में उम्मीद थी कि सरकार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए गन्ने के दामों में इजाफा करेगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका और तीन साल पुराने दाम फिर से रिवाइज कर दिए गए। इस अनदेखी का खामियाजा किसानों को भी उठाना पड़ रहा है।
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हापुड़ जिले के गन्ना किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहला तो गन्ने के दाम और दूसरा मिलों पर अटका बीते सत्र का भुगतान। हापुड़ जिले की दोनों शुगर मिलों ने किसानों का सत्र 2019-20 का करीब 107 करोड़ रुपये भुगतान अटकाया हुआ है। यह समस्या प्रत्येक साल बनी रहती है।
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इसका परिणाम यह है कि सत्र 2020-21 में किसानों ने गन्ने का रकबा करीब दो हजार हेक्टेयर घटा दिया है, इसके स्थान पर अन्य फसलों की बुवाई शुरू कर दी गई है। भुगतान की समस्या के चलते किसान अपना गन्ना क्रेशरों पर सप्लाई कर रहे हैं। यहां दाम तो कम मिल रहे हैं, लेकिन पैसा नकद में मिल जाता है। इससे किसानों में संतोष है। गन्ना विभाग भुगतान को लेकर कोशिश करने का दावा करता है, लेकिन मिलों पर इनका कोई दबाव नहीं पड़ता।
जिले में गन्ने के रकबे की स्थिति
वर्ष रकबा
2020-21 38,945 हेक्टेयर
2019-20 41,000 हेक्टेयर
गन्ना मिलों पर भुगतान की स्थिति
मिल बकाया भुगतान
सिंभावली 91 करोड़
बृजनाथपुर 17 करोड़
(नोट: यह बकाया सत्र 2019-20 का है, वर्तमान सत्र का मिलों ने कोई भुगतान नहीं किया है।)
गन्ना किसान हो रहे कर्जदार
चीनी मिलों द्वारा किसानों का भुगातन समय पर नहीं किया जा रहा है। इसके चलते किसानों को बैंकों व साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है। वहीं भुगतान की आस में ब्याज की मार भी पड़ रही है। गन्ना भुगतान को दूसरा साल चल रहा है और मिल किसानों का पैसा दबाकर बैठे हुए हैं। जबकि रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी किसानों को इधर उधर से पैसे लेने पड़ रह हैं।
अधिकारी कहिन-
जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने बताया कि गन्ना भुगतान को लेकर लगातार शुगर मिलों पर दबाव बनाया हुआ है। कागजी कार्रवाई की जा रही है, जल्द किसानों को बीते सत्र का पूरा भुगतान करा दिया जाएगा।