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Hapur News: प्रदूषण से मिली थोड़ी राहत, फिर भी खराब श्रेणी में हवा
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दिल्ली रोड पर प्रदूषण से बचने के लिए मुंह पर मास्क लगाकर जाते युवक। संवाद
हापुड़। प्रदूषण से मंगलवार को थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन हवा खराब श्रेणी में ही दर्ज की गई। सोमवार के मुकाबले मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 89 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद एक्यूआई 250 पर बना हुआ है, जो खराब श्रेणी में आता है। ऐसे में सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं।
सोमवार को जिले का एक्यूआई इस सीजन के रिकॉर्ड स्तर 339 पर पहुंच गया था। इसके बाद मंगलवार को इसमें गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, प्रदूषण कम होने के बावजूद वातावरण में धूल और प्रदूषक कणों का असर बना हुआ है। सुबह और शाम के समय लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह सड़कों पर उड़ती धूल और निर्माण सामग्री का खुले में पड़ा होना है। कई स्थानों पर निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली रेत, बजरी और अन्य सामग्री को ढककर नहीं रखा जा रहा है। वाहनों के गुजरने से यह धूल हवा में फैल रही है। इसके अलावा सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, वाहनों से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर रहा है।
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बता दें कि प्रदूषित हवा के कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से दमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
धूल रोकने के इंतजाम जरूरी
एक्यूआई में गिरावट के बावजूद सड़कों पर खुले में रखी निर्माण सामग्री और धूल पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखने और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के इंतजाम जरूरी हैं।
आसपास के क्षेत्रों में एक्यूआई की स्थिति
क्षेत्र का नाम एक्यूआई
गाजियाबाद 235
दिल्ली 350
नोएडा 291
मेरठ 156
बुलंदशहर 264
जिले में प्रदूषण कम करने के सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं। सोमवार के मुकाबले मंगलवार को वायु प्रदूषण कम हुआ है। बहुत जल्द जिले का प्रदूषण और अधिक कम होगा।
- विपुल कुमार, सहायक अभियंता, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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सोमवार को जिले का एक्यूआई इस सीजन के रिकॉर्ड स्तर 339 पर पहुंच गया था। इसके बाद मंगलवार को इसमें गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, प्रदूषण कम होने के बावजूद वातावरण में धूल और प्रदूषक कणों का असर बना हुआ है। सुबह और शाम के समय लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह सड़कों पर उड़ती धूल और निर्माण सामग्री का खुले में पड़ा होना है। कई स्थानों पर निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली रेत, बजरी और अन्य सामग्री को ढककर नहीं रखा जा रहा है। वाहनों के गुजरने से यह धूल हवा में फैल रही है। इसके अलावा सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, वाहनों से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर रहा है।
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बता दें कि प्रदूषित हवा के कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से दमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
धूल रोकने के इंतजाम जरूरी
एक्यूआई में गिरावट के बावजूद सड़कों पर खुले में रखी निर्माण सामग्री और धूल पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखने और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के इंतजाम जरूरी हैं।
आसपास के क्षेत्रों में एक्यूआई की स्थिति
क्षेत्र का नाम एक्यूआई
गाजियाबाद 235
दिल्ली 350
नोएडा 291
मेरठ 156
बुलंदशहर 264
जिले में प्रदूषण कम करने के सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं। सोमवार के मुकाबले मंगलवार को वायु प्रदूषण कम हुआ है। बहुत जल्द जिले का प्रदूषण और अधिक कम होगा।
- विपुल कुमार, सहायक अभियंता, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड