{"_id":"64bff829a40c699bd20cda1b","slug":"sekhpur-khicra-is-better-village-for-rohingiya-hapur-news-c-135-1-hpr1001-1427-2023-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मुफीद बना शेखपुर खिचरा गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मुफीद बना शेखपुर खिचरा गांव
Tue, 25 Jul 2023 09:58 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 25 Jul 2023 09:58 PM IST
विज्ञापन
हापुड़/ धौलाना। क्षेत्र का शेखपुर खिचरा गांव रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। कुछ साल पहले कार्रवाई के बावजूद इतनी बढ़ी संख्या में रोहिंग्या का दोबारा से यहां रहना खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस की भी बड़ी विफलता है। अब मामले में पुलिस और खुफिया विभाग जांच कर रहा है। मंगलवार को यहां कई ग्रामीणों से पुलिस ने पूछताछ की। अभी भी इस गांव में कई रोहिंग्याओं के रहने की जानकारी मिल रही है।
सोमवार को मेरठ से एटीएस की टीम ने छापा मारकर 16 रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया था। जिनमें एक महिला और तीन नाबालिग भी शामिल थे। ग्रामीणों ने बताया कि पकड़े गए लोगों के परिवार जिनमें कई महिलाएं और युवतियां शामिल हैं, अभी भी गांव में रह रहे हैं। इन महिलाओं का कहना है कि जब इनके परिवार के पुरुषों को गिरफ्तार किया गया तो है तो इन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। उधर बड़ा सवाल यह है कि करीब पांच साल पहले पूर्व प्रधान के यहां किराए पर रहने वाले दो रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद अब इन संदिग्ध किरायेदारों का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया। ऐसे लोगों को किराये पर कमरा देने से पहले इनके दस्तावेज की जांच क्यों नहीं की। स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस मंगलवार को दिन भर इन रोहिंग्याओं का सत्यापन करने में जुटी रही। इन्हें कमरा देने वालों से भी पूछताछ की गई। थाना प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र कुमार बिष्ट का कहना है कि गांव में रह रहे सभी किरायेदारों का सत्यापन कराया जा रहा है। जिनके मकान में ये लोग रह रहे थे, इनकी भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
सोमवार को मेरठ से एटीएस की टीम ने छापा मारकर 16 रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया था। जिनमें एक महिला और तीन नाबालिग भी शामिल थे। ग्रामीणों ने बताया कि पकड़े गए लोगों के परिवार जिनमें कई महिलाएं और युवतियां शामिल हैं, अभी भी गांव में रह रहे हैं। इन महिलाओं का कहना है कि जब इनके परिवार के पुरुषों को गिरफ्तार किया गया तो है तो इन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। उधर बड़ा सवाल यह है कि करीब पांच साल पहले पूर्व प्रधान के यहां किराए पर रहने वाले दो रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद अब इन संदिग्ध किरायेदारों का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया। ऐसे लोगों को किराये पर कमरा देने से पहले इनके दस्तावेज की जांच क्यों नहीं की। स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस मंगलवार को दिन भर इन रोहिंग्याओं का सत्यापन करने में जुटी रही। इन्हें कमरा देने वालों से भी पूछताछ की गई। थाना प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र कुमार बिष्ट का कहना है कि गांव में रह रहे सभी किरायेदारों का सत्यापन कराया जा रहा है। जिनके मकान में ये लोग रह रहे थे, इनकी भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन