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Hapur News: लखनऊ बैठक में जा रहे थे एसई, ट्रेन में मिला निलंबन का आदेश
Wed, 07 Feb 2024 11:07 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Wed, 07 Feb 2024 11:07 PM IST
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हापुड़। ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता यूके सिंह की सेवानिवृत्ति 29 फरवरी को होनी थी। इससे पहले ही निलंबन से निगम में हड़कंप मच गया है। शिकायत भले एक फैक्टरी संचालक ने की हो, लेकिन उस दिन उक्त फीडर से जुड़ी दो अन्य फैक्टरी भी सप्लाई नहीं मिलने से दस घंटे तक बंद रही थीं। इस खंड के अधिकारियों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं, क्योंकि गढ़ डिवीजन में एक्सईएन और जेई भी ऐसे ही मामले में निलंबित हुए हैं।
दरअसल, अधीक्षण अभियंता की शिकायतें जन प्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने शासन में की थी। यही कारण है कि उनकी सेवानिवृत्ति से 23 दिन पहले ही उनका निलंबन किया गया है। एई यूके सिंह मंगलवार रात को ट्रेन से लखनऊ जा रहे थे, क्योंकि बुधवार को उन्हें निगम के चेयरमैन की बैठक में शामिल होना था। लेकिन ट्रेन में सफर के दौरान ही उन्हें निलंबन का आदेश मिला। हालांकि एसई ने बुधवार को खुद के बैठक में ही होने का दावा किया।
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एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों का गलत मंशा से किया स्थानांतरण-
अधीक्षण अभियंता पर पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक अवर अभियंता और अन्य कर्मचारियों का स्थानांतरण गलत मंशा से करने का आरोप लगा था। उनके कार्यालय से जारी आदेशों के साक्ष्य भी दिए गए, जिसमें पहले स्थानांतरण किया गया और अगले ही दिन उन्हें वापस उसी स्थान पर नियुक्ति दे दी गई।
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बिजनेस प्लान के टेंडर में अनियमितता का लगा आरोप
बिजनेस प्लान के टेंडर में अनियमितता का आरोप लगा है। क्योंकि टेंडर निकलने के बावजूद लंबे समय तक कागज तैयार नहीं हुए। कई ठेकेदार निगम के एक बड़े अधिकारी के यहां भी पहुंचे। उन्होंने कमिशन बढ़ाने का आरोप लगाया था।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतें पड़ीं भारी-
जनप्रतिनिधि हर बैठक में ऊर्जा निगम के अफसरों पर अनदेखी का आरोप लगाते थे। यहां तक की उनके द्वारा बताए कार्य भी नहीं किए गए। अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को एक घंटे तक का कार्यालयों में इंतजार कराया। ऐसे मामलों की शिकायतें भी भारी पड़ी।
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-करोड़ों के गबन, घोटालों में नहीं हुई कार्रवाई-
*गढ़ डिवीजन में बिजली चोरी के नोटिसों में 50 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा, विजिलेंस ने साक्ष्य दिए। लेकिन संबंधित पटल के प्रभारी को एसडीओ बना दिया।
*बाबूगढ़ के भारतीय रक्षा प्रणाली (कैंट) के एस्टीमेट में 28 लाख का झोल, मामला खुलने पर यह पैसा बिलों में समायोजित किया, कोई कार्रवाई नहीं।
*पिलखुवा डिवीजन में बिना एस्टीमेट लाइन शिफ्टिंग, मामला खोलने वाले एक्सईएन को किया निलंबित।
* नलकूप बिल घोटाले में 20 साल से चल रही जांच।
* चार बिजलीघरों की लाइन अवैध तरीके से शिफ्ट, कोई कार्रवाई नहीं।
हाल ही में इन अधिकारियों का हुआ निलंबन
* बिजलीघर बंद रखने पर गढ़ डिवीजन के तत्कालीन अधिशासी अभियंता केपी पुरी, एसडीओ राकेश प्रजापति, जेई अजय कुमार निलंबित हुए।
* कनेक्शन में अनियमितता पर तत्कालीन एसडीओ यशेंद्र सिंह और जेई का निलंबन।
* कनेक्शन में अनियमितता पर जेई सुधीर का निलंबन, बाद में बहाल हुए।
* मीटर रीडिंग मामले में सुपरवाइजर को हटाया।
* अवैध लाइन शिफ्टिंग के खिलाफ आवाज उठाने वाले पिलखुवा के तत्कालीन एक्सईन भूपेंद्र सिंह का निलंबन।
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दरअसल, अधीक्षण अभियंता की शिकायतें जन प्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने शासन में की थी। यही कारण है कि उनकी सेवानिवृत्ति से 23 दिन पहले ही उनका निलंबन किया गया है। एई यूके सिंह मंगलवार रात को ट्रेन से लखनऊ जा रहे थे, क्योंकि बुधवार को उन्हें निगम के चेयरमैन की बैठक में शामिल होना था। लेकिन ट्रेन में सफर के दौरान ही उन्हें निलंबन का आदेश मिला। हालांकि एसई ने बुधवार को खुद के बैठक में ही होने का दावा किया।
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एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों का गलत मंशा से किया स्थानांतरण-
अधीक्षण अभियंता पर पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक अवर अभियंता और अन्य कर्मचारियों का स्थानांतरण गलत मंशा से करने का आरोप लगा था। उनके कार्यालय से जारी आदेशों के साक्ष्य भी दिए गए, जिसमें पहले स्थानांतरण किया गया और अगले ही दिन उन्हें वापस उसी स्थान पर नियुक्ति दे दी गई।
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बिजनेस प्लान के टेंडर में अनियमितता का लगा आरोप
बिजनेस प्लान के टेंडर में अनियमितता का आरोप लगा है। क्योंकि टेंडर निकलने के बावजूद लंबे समय तक कागज तैयार नहीं हुए। कई ठेकेदार निगम के एक बड़े अधिकारी के यहां भी पहुंचे। उन्होंने कमिशन बढ़ाने का आरोप लगाया था।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतें पड़ीं भारी-
जनप्रतिनिधि हर बैठक में ऊर्जा निगम के अफसरों पर अनदेखी का आरोप लगाते थे। यहां तक की उनके द्वारा बताए कार्य भी नहीं किए गए। अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को एक घंटे तक का कार्यालयों में इंतजार कराया। ऐसे मामलों की शिकायतें भी भारी पड़ी।
-करोड़ों के गबन, घोटालों में नहीं हुई कार्रवाई-
*गढ़ डिवीजन में बिजली चोरी के नोटिसों में 50 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा, विजिलेंस ने साक्ष्य दिए। लेकिन संबंधित पटल के प्रभारी को एसडीओ बना दिया।
*बाबूगढ़ के भारतीय रक्षा प्रणाली (कैंट) के एस्टीमेट में 28 लाख का झोल, मामला खुलने पर यह पैसा बिलों में समायोजित किया, कोई कार्रवाई नहीं।
*पिलखुवा डिवीजन में बिना एस्टीमेट लाइन शिफ्टिंग, मामला खोलने वाले एक्सईएन को किया निलंबित।
* नलकूप बिल घोटाले में 20 साल से चल रही जांच।
* चार बिजलीघरों की लाइन अवैध तरीके से शिफ्ट, कोई कार्रवाई नहीं।
हाल ही में इन अधिकारियों का हुआ निलंबन
* बिजलीघर बंद रखने पर गढ़ डिवीजन के तत्कालीन अधिशासी अभियंता केपी पुरी, एसडीओ राकेश प्रजापति, जेई अजय कुमार निलंबित हुए।
* कनेक्शन में अनियमितता पर तत्कालीन एसडीओ यशेंद्र सिंह और जेई का निलंबन।
* कनेक्शन में अनियमितता पर जेई सुधीर का निलंबन, बाद में बहाल हुए।
* मीटर रीडिंग मामले में सुपरवाइजर को हटाया।
* अवैध लाइन शिफ्टिंग के खिलाफ आवाज उठाने वाले पिलखुवा के तत्कालीन एक्सईन भूपेंद्र सिंह का निलंबन।