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Hapur News: यूजीसी नियम का विरोध, आलमपुर में भाजपा के विरोध में लगाए बोर्ड
Fri, 30 Jan 2026 10:58 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 30 Jan 2026 10:58 PM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। यूजीसी नियम के विरोध में सवर्ण समाज ने भाजपा के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव आलमनगर में पृथ्वीराज चौहान स्मारक स्थल पर बड़ा बोर्ड लगाकर साफ संदेश दिया है कि भाजपा नेता वोट मांगने गांव में न आएं। बोर्ड पर लिखा गया है कि जब तक यूजीसी नियम समाप्त नहीं किया जाता, तब तक भाजपा को वोट नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने गांव प्रधान ब्रह्मपाल चौहान के नेतृत्व में सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे इस कानून के विरोध में एकजुट रहेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और इससे सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवाद की विदाई का नारा देने वाली भाजपा इस कानून के जरिए सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कानून बनना चाहिए, लेकिन ऐसा कानून जो झूठी शिकायतों के आधार पर लोगों का जीवन बर्बाद कर दे, वह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज के लोगों ने बटोगे तो कटोगे जैसे नारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यही सामाजिक एकता का भाव है। उनका कहना है कि इस तरह के कानून समाज में भय और असंतोष पैदा कर रहे हैं। यूजीसी कानून के विरोध को और तेज करते हुए ग्रामीणों ने घोषणा की कि दो फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर के लिए ट्रैक्टरों से कूच किया जाएगा, जहां अपनी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा। गांव में इस आंदोलन को लेकर खासा उत्साह और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
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इस मौके पर प्रधान ब्रह्मपाल चौहान, चंदकिरन, कपिल चौहान, गोलू, कृष्ण चौहान, शिवम चौहान, आशु, अमन चौहान, हिमांशु चौहान, सोनू, राहुल, समय सिंह, विनीत और सुमित चौहान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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ग्रामीणों का कहना है कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और इससे सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवाद की विदाई का नारा देने वाली भाजपा इस कानून के जरिए सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि कानून बनना चाहिए, लेकिन ऐसा कानून जो झूठी शिकायतों के आधार पर लोगों का जीवन बर्बाद कर दे, वह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज के लोगों ने बटोगे तो कटोगे जैसे नारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यही सामाजिक एकता का भाव है। उनका कहना है कि इस तरह के कानून समाज में भय और असंतोष पैदा कर रहे हैं। यूजीसी कानून के विरोध को और तेज करते हुए ग्रामीणों ने घोषणा की कि दो फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर के लिए ट्रैक्टरों से कूच किया जाएगा, जहां अपनी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा। गांव में इस आंदोलन को लेकर खासा उत्साह और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
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इस मौके पर प्रधान ब्रह्मपाल चौहान, चंदकिरन, कपिल चौहान, गोलू, कृष्ण चौहान, शिवम चौहान, आशु, अमन चौहान, हिमांशु चौहान, सोनू, राहुल, समय सिंह, विनीत और सुमित चौहान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।