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Hapur News: स्ट्रक्चर ऑडिट के बिना जर्जर भवनों में रह रहे लोग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:58 AM IST
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People living in dilapidated buildings without structure audit
साहिबाबाद। जनपद की आवासीय सोसायटियों में लाखों लोग बिना स्ट्रक्चर ऑडिट के ही रह रहे हैं। कई सोसायटी का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है तो कई सोसायटी के बीम के सरिये दिखाई दे रहे हैं। सीलन से खराब हो रही दीवार और लिंटर कभी गिर सकता है। इससे लोगों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ हो रहा है। लोग डर के साए में रह रहे हैं। लोगों की ओर से शिकायत के बाद भी ऑडिट की मांग लंबित हैं।
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वसुंधरा सेक्टर 15 निवासी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि सोसायटी में वर्ष 2013 में थ्री बीएचके फ्लैट बुक कराया था। आवास विकास की ओर से वर्ष 2018 में पजेशन दिया गया था। मानक के अनुसार काम नहीं होने से चार पांच वर्षों में ही बिल्डिंग 30 साल से ज्यादा पुरानी लग रही है। दीवारों पर सीलन है, आए दिन दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। बीम के सरिये दिखाए दे रहे हैं। वहीं, 1989 में जीडीए ने तुलसी निकेतन कॉलोनी बसाई थी। इसके भी अधिकांश भवन जर्जर हो चुके हैं। जीडीए अधिकारी भी भवनों पर अगस्त 2022 में जर्जर होने के नोटिस चस्पा कर चुके हैं।
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इसी तरह से राजनगर एक्सटेंशन, इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी, वसुंधरा में निजी बिल्डर, जीडीए, आवास विकास परिषद की ओर से सैकड़ों सोसायटी बनाई गई हैं लेकिन निर्माण के कुछ वर्षों बाद ही सोसायटी के भवनों में खामियां सामने आ रही हैं। संदीप ने बताया कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा में स्ट्रक्चर ऑडिट पॉलिसी लागू हो चुकी है लेकिन जनपद में स्ट्रक्चर ऑडिट पॉलिसी लागू नहीं है जबकि गाजियाबाद की बहुमंजिला इमारतों के लिए तय की जानी जरूरी है। प्रधानमंत्री कार्यालय को गाजियाबाद स्ट्रक्चर पॉलिसी लागू कराने के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
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इन सोसायटी का भवन है जर्जर
- तुलसी निकेतन
- कल्पना अपार्टमेंट वैशाली
- अलखनंदा टावर
- मंदाकनी टावर
- कामना अपार्टमेंट
- सरयू व सतलज टावर
- वाल्मीकि कुंज के 26 फ्लैट
- राजेंद्र नगर सेक्टर दो ईडब्ल्यूएस भवन
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क्या है स्ट्रक्चर ऑडिट पॉलिसी
बहुमंजिला इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट पॉलिसी के अंतर्गत एक पैनल तैयार किया जाता है। इसमें आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय विवि, सीएसआईआर से संबंधित रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि को शामिल किया जाता है। इनकी मदद से सोसायटी के भवनों की मजबूती की रिपोर्ट तैयार कराई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्राधिकरण की ओर से अधिभोग प्रमाणपत्र (ओसी) जारी किया जाता है। शुरुआती पांच साल तक बिल्डर के खर्च पर समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट होता है जबकि पांच साल से ज्यादा समय समय बीतने पर एओए खर्चा वहन करता है। अगर किसी प्रोजेक्ट के 25 फीसदी आवंटियों की ओर से स्ट्रक्चरल खामी संबंधी शिकायत की जाती है, तो प्राधिकरण शिकायत का संज्ञान लेकर परीक्षण कर सकता है।
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