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कोहरे के कहर से लोग रहे बेहाल
अमर उजाला, हापुड़
Updated Thu, 31 Dec 2015 11:55 PM IST
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कोहरे की सफेद चादर बृहस्पतिवार को सुबह से दोपहर तक शहर और देहात क्षेत्र लिपटी रही। सूर्य देवता के दर्शन होने पर कुछ राहत मिली लेकिन शीत लहर ने परेशान करे रखा। अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रहा।
बृहस्पतिवार को सुबह करीब बजे तक आम दिनों की तरह सूर्य निकला लेकिन अचानक कोहरा पडने लगा तथा कुह ही देर में आसपास का भी दिखलाई देना मुश्किल हो गया। सुबह आठ बजते बजते शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर भयंकर कोहरा पडने लगा।
कोहरे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि सुबह 10 बजे भी मेरठ रोड फ्लाई ओवर पर चालक वाहनों की लाइट जलाकर वाहनों को कतार में धीमी रफ्तार से चल रहे थे। दिन में भी वाहन चालक किसी तरह लाइट जलाकर मंद गति से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे।
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कोहरे के कारण स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्म कपड़ों में पैक होकर लोग किसी तरह अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे। गरीब बेसहाराओं का बुरा हाल था। किसी तरह वह अलाव की मदद से ठंड को दूर भगाने में लगे थे।
शीत लहर के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा था। हर कोई यही दुआ कर रहा था कि जल्द धूप निकल जाए ताकि कोहरे और ठंड से राहत मिल सके।
करीब साढ़े दस बजे सूर्य देवता के दर्शन हुए तब कहीं जाकर लोगों को कुछ राहत मिली। धूप निकलने पर महिलाओं ने घरेलू कामकाज निपटाया और बुजुर्ग धूप में बैठे। लेकिन शीतलहर काफी परेशान कर रही थी।
शाम होते होते फिर से ठंड पडने लगी। बुजुर्ग बिजली हीटरों की मदद से ठंड दूर करने में लगे थे। देर शाम को बाजारों में सन्नाटा सा छा गया। ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे थे और दुकानदार भी जल्द दुकानें बंद कर घरों को रवाना हो रहे थे।
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बृहस्पतिवार को सुबह करीब बजे तक आम दिनों की तरह सूर्य निकला लेकिन अचानक कोहरा पडने लगा तथा कुह ही देर में आसपास का भी दिखलाई देना मुश्किल हो गया। सुबह आठ बजते बजते शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर भयंकर कोहरा पडने लगा।
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कोहरे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि सुबह 10 बजे भी मेरठ रोड फ्लाई ओवर पर चालक वाहनों की लाइट जलाकर वाहनों को कतार में धीमी रफ्तार से चल रहे थे। दिन में भी वाहन चालक किसी तरह लाइट जलाकर मंद गति से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे।
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कोहरे के कारण स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्म कपड़ों में पैक होकर लोग किसी तरह अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे। गरीब बेसहाराओं का बुरा हाल था। किसी तरह वह अलाव की मदद से ठंड को दूर भगाने में लगे थे।
शीत लहर के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा था। हर कोई यही दुआ कर रहा था कि जल्द धूप निकल जाए ताकि कोहरे और ठंड से राहत मिल सके।
करीब साढ़े दस बजे सूर्य देवता के दर्शन हुए तब कहीं जाकर लोगों को कुछ राहत मिली। धूप निकलने पर महिलाओं ने घरेलू कामकाज निपटाया और बुजुर्ग धूप में बैठे। लेकिन शीतलहर काफी परेशान कर रही थी।
शाम होते होते फिर से ठंड पडने लगी। बुजुर्ग बिजली हीटरों की मदद से ठंड दूर करने में लगे थे। देर शाम को बाजारों में सन्नाटा सा छा गया। ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे थे और दुकानदार भी जल्द दुकानें बंद कर घरों को रवाना हो रहे थे।