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Hapur News: चेक बाउंस के दोषी को एक वर्ष की जेल
Wed, 05 Feb 2025 10:38 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Wed, 05 Feb 2025 10:38 PM IST
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हापुड़। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनील शेखर ने चार लाख 60 हजार के चेक बाउंस के मामले में आरोपी को बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायाधीश ने दोषी को एक वर्ष के जेल की सजा व छह लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
मोहल्ला गिरधारीनगर गढ़ रोड हापुड़ निवासी चेतन प्रकाश ने बताया कि वह गेहूं खरीदकर उसको अपने मिल में आटा व चोकर बनाकर विभिन्न स्थानों पर बेचते हैं। मैसर्स आकृति फूड्स शॉप नंबर 77 पालिका बाजार गाजियाबाद के मालिक नीरज कुमार ने उनसे कई बार में पांच लाख 94 हजार दो सौ पचास रुपये का माल खरीदा। जिसका आरोपी की ओर से भुगतान नहीं किया गया। जिस पर उन्होंने कई बार तगादा किया।
आरोपी नीरज कुमार ने 26 सिंतबर 2021 को चार लाख 60 हजार रुपये का एक चेक उन्हें दिया। लेकिन चेक बैंक में डालने पर बाउंस हो गया। जिसके बारे में उसने आरोपी नीरज कुमार को बताया। लेकिन आरोपी ने कोई जवाब नहीं दिया। जिसके बाद उन्होंने न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण ली।
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मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही थी। मामले की सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश सुनील शेखर ने आरोपी नीरज कुमार को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही में दोषी पर छह लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
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मोहल्ला गिरधारीनगर गढ़ रोड हापुड़ निवासी चेतन प्रकाश ने बताया कि वह गेहूं खरीदकर उसको अपने मिल में आटा व चोकर बनाकर विभिन्न स्थानों पर बेचते हैं। मैसर्स आकृति फूड्स शॉप नंबर 77 पालिका बाजार गाजियाबाद के मालिक नीरज कुमार ने उनसे कई बार में पांच लाख 94 हजार दो सौ पचास रुपये का माल खरीदा। जिसका आरोपी की ओर से भुगतान नहीं किया गया। जिस पर उन्होंने कई बार तगादा किया।
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आरोपी नीरज कुमार ने 26 सिंतबर 2021 को चार लाख 60 हजार रुपये का एक चेक उन्हें दिया। लेकिन चेक बैंक में डालने पर बाउंस हो गया। जिसके बारे में उसने आरोपी नीरज कुमार को बताया। लेकिन आरोपी ने कोई जवाब नहीं दिया। जिसके बाद उन्होंने न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण ली।
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मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही थी। मामले की सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश सुनील शेखर ने आरोपी नीरज कुमार को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही में दोषी पर छह लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।