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भाग्यशाली थे हम, जो बाल-बाल बच गए
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 07 Feb 2017 09:16 PM IST
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ठगी
- फोटो : अमर उजाला
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3700 करोड़ की ठगी में सात लाख लोग शिकार हो गए, लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो पिता, भाई या बैंक में कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण ठगी का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। अब वह लोग खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं।
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एमए संस्कृत के छात्र बोबी कुमार ने बताया कि उसके दोस्त ने उसे आईडी लगाकर पैसे कमाने के संबंध में जानकारी दी थी। उसने 57,500 रुपये की आईडी लगाने का फैसला भी कर लिया था। इससे पहले पिता को इस संबंध में बताया तो उन्होंने पैसे लगाने से मना कर दिया।
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अब ठगी का मामला प्रकाश में आने पर वह चकित हैं। अगर पिता ने मना नहीं किया होता तो आज वह भी पीड़ितों की लिस्ट में शामिल होते। इसी तरह युवा नाहर सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनके भाई ने 57500-57500 की दो-दो आईडी लगाने का मन बना लिया था।
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पैसे बैंक में जमा थे, दोनों बैंक में कंपनी के नाम ड्राफ्ट बनवाने के लिए गए थे, लेकिन कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण उनके ड्रॉफ्ट नहीं बन पाए। इसके बाद वह घूमने के लिए बाहर चले गए थे। लौटने पर इस फ्रॉड के बारे में पता चला। पैसे लगा देते तो कहीं के भी नहीं रहते।
छात्र अरुण प्रताप ने बताया कि उनके अन्य दोस्तों ने आईडी लगा रखी थी, जो उन्हें रोज खाते में पैसे आने की जानकारी देते थे। दोस्तों को देेखकर उन्होंने भी 11-11 हजार की दो आईडी लगाने का निर्णय कर लिया था।
पैसे भी बैंक से निकालकर ले आए थे। एक वक्त पर एक रिश्तेदार को पैसे की जरूरत पड़ गई तो उसे देने पड़ गए। ऐसे में वह आईडी लगा नहीं पाए। आईडी लगा लेते तो फंस जाते।
‘ठग कंपनी’ के मालिक अनुभव मित्तल के दादा वेदप्रकाश मित्तल मंगलवार को दिनभर अपनी परचून की दुकान पर बैठे रहे, लेकिन पिता सुनील मित्तल अपनी इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान से गायब रहे।
दोनों की दुकान एक ही मोहल्ले में हैं। पिता सुनील मित्तल की दुकान पर कर्मी कार्य करते रहे। सुनील मित्तल के संबंध में जानकारी करने पर पता चला कि वह कहीं बाहर गए हैं।