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बंदर और कुत्तों का आतंक, किशोर को किया घायल

Wed, 18 May 2016 10:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Wed, 18 May 2016 10:01 PM IST
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Monkeys and dogs panic.
बंदरों की दहशत - फोटो : अमर उजाला

गढ़ ब्रजघाट गंगानगरी में इन दिनों बंदरों और आवारा कुत्तों का खौफ लोगों में छाया हुआ है। बुधवार को आवारा कुत्ते ने किशोर को काटकर घायल कर दिया। बांह और टांग में काटने से किशोर को गंभीर चोटें आई हैं।

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वहीं, अस्पतालों में बंदरों और कुत्तों के काटने के मरीजों की संख्या प्रतिमाह ढाई हजार का आंकड़ा पार कर गई है। अस्पतालों में रैबीज के इंजेक्शन की मारामारी हो गई है। बंदरों और कुत्तों का आतंक होने के बावजूद पालिका प्रशासन और वन विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
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गंगानगरी में बंदरों और कुत्तों के आतंक  से लोग खौफजदा हैं। रात के अंधेरे में कुत्ते राहगीरों को निशाना बना लेते हैं। कोतवाली के पास रहने वाले वीरेंद्र सिंह के 12 वर्षीय बेटे दीपांशु को कुत्तों ने दौड़ाकर उसकी टांग और बांह में काट लिया।
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मदन पाल सिंह, अनिल सैन, अमरजीत सिंह, लवली शर्मा का कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद पालिका प्रशासन और वन विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

बंदरों और कुत्तों का भय कालोनियों के साथ हाइवे और सूनसान जंगलों में भी फैला हुआ है। जंगलों में लोग रातभर जागकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं।

गढ़-चौपला समेत ब्रजघाट गंगानगरी में बंदरों के आतंक से आए दिन गली-मुहल्लों में बिजली सप्लाई से लेकर डिश केबिल सप्लाई ठप रहती है। बंदरों के केबिल तोड़ने के साथ छतों और घर के बाहर रखे सामान को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

बंदरों का आतंक दिल्ली सहित गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ सहित तमाम शहरों में है। महानगरों में बंदरों को पकड़ने के अभियान चलाए जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बंदरों को गढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में छोड़े जाने का आरोप भी लगाया।

पिछले दिनों ब्रजघाट, गढ़, गंदूनंगला, अल्लाबख्शपुर में बंदरों के हमले की कई घटनाएं होने से किसानों में दहशत है। बंदरों और कुत्तों के भय को खत्म करने के लिए किसानों ने प्रशासन से मांग की है।

किसानों ने कार्रवाई नहीं होने पर तहसील कर घेराव कर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। किशन, अमित, कुंवरपाल ने बताया कि जान-माल के साथ ही अब बंदर कड़ी मेहनत से उगाई हुई फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। समस्या का समाधान न होने पर वे आंदोलन को मजबूर होंगे।

गढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते साल 15 सितंबर को बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया था। जिसमें अस्पताल से दवा लेने आई स्नेह, सोनू, मानसिंह, शिवानी, कृष्ण, गंगाराम, राजकुमार, अमन, नवीन, संजय सहित आदि लोग घायल हो गए थे।

बंदरों का बढ़ता आतंक चिंता का विषय है। इसकी रोकथाम के लिए पालिका और वन विभाग के साथ संयुक्त रणनीति बनाकर जल्द कार्रवाई की जाएगी। - शमशाद हुसैन, एसडीएम


विभागीय स्तर से बंदरों की धरपकड़ के लिए कोई स्कीम नहीं है। पालिका प्रशासन अगर कोई सहयोग मांगता है तो विभाग तैयार है। - डीसी मिश्रा, वन रेंजर  

कुत्ते और बंदरों के आतंक को खत्म करने के लिए पालिका बोर्ड की आगामी बैठक में विचार-विमर्श कर कार्रवाई की जाएगी। - संगीता पुरुषोत्तम, चेयरमैन

कुत्ते और बंदरों के हमलों में घायल मरीजों के हर माह ढाई हजार से ज्यादा केस आ रहे हैं। इंटी रैबीज इंजेक्शन की मांग भी बढ़ी है।- डा. रविंद्र, सीएचसी अधीक्षक

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