{"_id":"65f090166cfed236c8047425","slug":"mob-linching-hapur-news-c-135-1-hpr1001-108585-2024-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: चारा काट रहे थे, तभी भीड़ ने बोल दिया हमला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: चारा काट रहे थे, तभी भीड़ ने बोल दिया हमला
Tue, 12 Mar 2024 10:55 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 12 Mar 2024 10:55 PM IST
विज्ञापन
हापुड़। गांव बझेड़ा खुर्द में भीड़ के हमले में घायल हुए गांव मदापुर निवासी समयद्दीन अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों को उनके किए की सजा मिल गई। रमजान के पहले दिन उन्हें न्याय मिलने की खुशी है।
घटना के बारे में बातचीत करते हुए समयद्दीन भावुक हो गए। बोले, 18 जून 2018 की दोपहर करीब 11 बजे का समय था। गांव के ही हसन के साथ पशुओं के लिए चारा काटने के लिए गए थे। उन्होंने जैसे ही चारा काटना शुरू किया, उनका दोस्त कासिम भी पहुंच गया। इसी दौरान काफी संख्या में भीड़ बझैड़ा खुर्द की ओर से आ गई। भीड़ को देखकर कम उम्र हसन वहां से भाग निकला। मेरी उम्र करीब 65 साल रही होगी। कासिम का शरीर भी भारी था। इस वजह से हम दोनों भाग नहीं पाए। भीड़ ने दोनों को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। भीड़ के सिर पर खून सवार था। उनके हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। गोकशी का झूठा आरोप लगाते भीड़ उन पर वार कर रही थी।
इसके बाद वहां से उन्हें पकड़कर अपने गांव के पास जंगल में ले आए। इस दौरान कासिम और उन्हें बेरहमी से पीटा। जमीन पर पड़े पानी और रहम की भीख मांग रहे थे, किसी ने एक नहीं सुनी। बाद में पुलिस पहुंची तो लोग कुछ शांत हुए। पुलिस उन्हें लेकर जैसे तैसे वहां से निकली। वह पूरे 17 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, जब जाकर जान बची।
विज्ञापन
विज्ञापन
घटना के बारे में बातचीत करते हुए समयद्दीन भावुक हो गए। बोले, 18 जून 2018 की दोपहर करीब 11 बजे का समय था। गांव के ही हसन के साथ पशुओं के लिए चारा काटने के लिए गए थे। उन्होंने जैसे ही चारा काटना शुरू किया, उनका दोस्त कासिम भी पहुंच गया। इसी दौरान काफी संख्या में भीड़ बझैड़ा खुर्द की ओर से आ गई। भीड़ को देखकर कम उम्र हसन वहां से भाग निकला। मेरी उम्र करीब 65 साल रही होगी। कासिम का शरीर भी भारी था। इस वजह से हम दोनों भाग नहीं पाए। भीड़ ने दोनों को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। भीड़ के सिर पर खून सवार था। उनके हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। गोकशी का झूठा आरोप लगाते भीड़ उन पर वार कर रही थी।
विज्ञापन
इसके बाद वहां से उन्हें पकड़कर अपने गांव के पास जंगल में ले आए। इस दौरान कासिम और उन्हें बेरहमी से पीटा। जमीन पर पड़े पानी और रहम की भीख मांग रहे थे, किसी ने एक नहीं सुनी। बाद में पुलिस पहुंची तो लोग कुछ शांत हुए। पुलिस उन्हें लेकर जैसे तैसे वहां से निकली। वह पूरे 17 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, जब जाकर जान बची।
विज्ञापन