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Hapur: रिश्वत मामले में निलंबित किया तो मानसिक तनाव में आया लेखपाल, तहसील में खा लिया जहर; उपचार के दौरान मौत
Thu, 10 Jul 2025 12:30 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 10 Jul 2025 12:30 PM IST
सार
लेखपाल सुभाष मीणा मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के रहने वाले थे। 3 जून को जन चौपाल के दौरान किसानों की रिश्वत मांगने की शिकायत पर डीएम अभिषेक पांडे ने लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए थे।
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मृतक का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हापुड़ के धौलाना तहसील में तैनात निलंबित लेखपाल सुभाष मीणा की गुरुवार की सुबह गाजियाबाद के अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। बुधवार को उन्होंने तहसील परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर मंडल आयुक्त मेरठ और डीआईजी को जांच सौंपी गई है। दोनों आज तहसील परिसर में जांच के लिए भी पहुंचेंगे। वहीं, जिले के लेखपाल कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर धरना देंगे। सभी तहसील में हड़ताल की भी घोषणा की गई है।
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लेखपाल सुभाष मीणा मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र के रहने वाले थे। 3 जून को जन चौपाल के दौरान किसानों की रिश्वत मांगने की शिकायत पर डीएम अभिषेक पांडे ने लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए थे। निलंबन के बाद से ही वह मानसिक रूप से तनाव में चल रहे थे।
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लेखपाल के चालक शाहिद के अनुसार, बुधवार की सुबह सुभाष मीणा जब घर से निकले थे तो अत्यधिक तनाव में थे। उन्होंने रास्ते में एक मेडिकल स्टोर से सिर दर्द की दवा भी ली थी। सुबह करीब साढ़े दस बजे वह धौलाना तहसील परिसर पहुंचे और लेखपालों के कमरे में गए। यहां से निकलकर तहसीलदार के कार्यालय पहुंचे और वार्ता कर बाहर आ गए। इस बीच में ही लेखपाल ने एक डिब्बी से निकालकर कुछ जहरीला पदार्थ खा लिया। यहां तक कि चालक से लेकर पानी भी पिया।
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इस बीच लेखपाल की तबीयत बिगड़ गई। जिस पर सभी अधिकारी व कर्मचारी आदि लेकर उन्हें रामा अस्पताल पहुंचे। मौके पर एसडीएम शुभम श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी भी पहुंच गए। सूचना के बाद जिले के अधिकारियों के पसीने छूट गए। आनन-फानन में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं, मौके पर पहुंचे लेखपालों की मौजूद अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। यहां तक कि लेखपाल धरने पर बैठ गए थे।
तीन जून को हुई थी शिकायत
गांव डहाना में तीन जून को डीएम अभिषेक पांडेय से जनचौपाल के दौरान किसान ने खसरा-खतौनी की नकल देने के बदले अतिरिक्त पैसे वसूलने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही पीड़ितों के बयान दर्ज कराए और लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए। लेखपालों के अनुसार निलंबन के बाद से ही वह अवसाद में थे। लेखपालों का आरोप है कि शिकायतकर्ता मामले को निपटाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था। विभागीय स्तर से भी लेखपाल को कोई मदद तक नहीं मिल रही थी। यहां तक कि लेखपाल के निजी सहायक मिंटू के विरुद्ध धौलाना थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
देर रात गाजियाबाद जाकर परिजनों से मिले थे डीएम
बुधवार की देर रात करीब 11:30 बजे डीएम अभिषेक पांडे, डिप्टी कलेक्टर मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी गाजियाबाद के अस्पताल में पहुंचे। जहां लेखपाल के परिजनों से बातचीत की थी।