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Hapur News: फैक्टरियों की जांच के नाम पर उत्पीड़न का आरोप, उद्यमियों का कलक्ट्रेट पर हंगामा
Thu, 06 Feb 2025 09:52 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 06 Feb 2025 09:52 PM IST
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हापुड़। धौलाना के एमजी रोड क्षेत्र में संचालित फैक्टरियों की जांच के नाम पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को सैकड़ों उद्यमी नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। कुछ उद्यमियों ने हाथों में फैक्टरियों की चाबी भी ली हुई थी, जिसे वह डीएम को सौंपना चाहते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम संदीप कुमार मौके पर पहुंचे, जिस पर उद्यमियों ने उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। वहीं, प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मुलाकात की, लेकिन उनके आश्वासन पर उद्यमी संतुष्ट नजर नहीं आए। बाद में उद्यमियों ने अगले बुधवार को फैक्टरियों को बंद करने की घोषणा की है। हालांकि, आज फिर से उद्यमियों की डीएम से मुलाकात होगी।
एमजी रोड पर करीब 1768 फैक्टरी संचालित हैं। इन फैक्टरियों में किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए नौ विभागों की टीम मिलकर मानकों की जांच कर रही है। इस जांच से औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों में नाराजगी है। उद्योग बंधु वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु सिंहल ने कहा कि यूपीएसआईडीसी में कई साल पुरानी फैक्ट्रियां है, इसमें कुछ छोटी फैक्टरी कम स्थान पर भी बनी हैं। इस कारण सेटबैक बनाने की स्थिति ही नहीं बन पा रही है। जबकि, यह क्षेत्र हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व देता है। इस पर डीएम ने कहा कि फैक्ट्रियों में कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, इस पर उद्यमी शांत रहे। हालांकि इस मामले में शुक्रवार को भी उद्यमियों की बैठक जिलाधिकारी से होगी।
वहीं, एमजीआर इंडस्ट्रीयल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा व सचिव धीरज तोमर ने कहा कि टीम द्वारा चेकिंग के दौरान सेटबैक को लेकर उद्यमियों का उत्पीडऩ किया जा रहा है और बिना अनुमति के प्लांट की फोटो ली जा रही है। यहां तक कि कर्मचारियों से गलत तरह से सवाल-जवाब पूछे जा रहे हैं।
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मसूरी-गुलावठी रोड इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के सचिव विपिन मोहन गर्ग ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती हैं। जबकि, अधिकारी जिले में शोषण कर रहे हैं।
मौके पर एमजीआर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष एनएन मिश्रा, निरंकार सिंह, अजय गर्ग, संदीप बंसल, पीयूष गोयल, घनश्याम अग्रवाल, स्नेह गुप्ता, गगनदीप सिंह, सुदीप चौधरी, बबलू चौधरी, एनके चौधरी, अभिषेक वशिष्ठ, पवन अग्रवाल, समयद्दीन, असलम, नागेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
पहले कई बार हो चुके हादसे--
इस क्षेत्र में कई बार फैक्टरियों में आग लगने की वजह से हादसे हो चुके है। भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके लिए डीएम ने नौ विभागों की टीम गठित की थी, जिसमें यूपीसीडा, अग्निशमन विभाग, ऊर्जा निगम, श्रम विभाग, प्रदूषण विभाग, कारखाना विभाग आदि को फैक्ट्रियों की जांच के निर्देश दिए गए थे। इन विभागों ने फैक्टरियों में सेटबैक न होने, विद्युत लोड अधिक होने, अग्निशमन विभाग की एनओसी न होने आदि पर संचालकों को नोटिस दिए हैं।
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एमजी रोड पर करीब 1768 फैक्टरी संचालित हैं। इन फैक्टरियों में किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए नौ विभागों की टीम मिलकर मानकों की जांच कर रही है। इस जांच से औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों में नाराजगी है। उद्योग बंधु वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु सिंहल ने कहा कि यूपीएसआईडीसी में कई साल पुरानी फैक्ट्रियां है, इसमें कुछ छोटी फैक्टरी कम स्थान पर भी बनी हैं। इस कारण सेटबैक बनाने की स्थिति ही नहीं बन पा रही है। जबकि, यह क्षेत्र हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व देता है। इस पर डीएम ने कहा कि फैक्ट्रियों में कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, इस पर उद्यमी शांत रहे। हालांकि इस मामले में शुक्रवार को भी उद्यमियों की बैठक जिलाधिकारी से होगी।
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वहीं, एमजीआर इंडस्ट्रीयल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा व सचिव धीरज तोमर ने कहा कि टीम द्वारा चेकिंग के दौरान सेटबैक को लेकर उद्यमियों का उत्पीडऩ किया जा रहा है और बिना अनुमति के प्लांट की फोटो ली जा रही है। यहां तक कि कर्मचारियों से गलत तरह से सवाल-जवाब पूछे जा रहे हैं।
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मसूरी-गुलावठी रोड इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के सचिव विपिन मोहन गर्ग ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती हैं। जबकि, अधिकारी जिले में शोषण कर रहे हैं।
मौके पर एमजीआर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष एनएन मिश्रा, निरंकार सिंह, अजय गर्ग, संदीप बंसल, पीयूष गोयल, घनश्याम अग्रवाल, स्नेह गुप्ता, गगनदीप सिंह, सुदीप चौधरी, बबलू चौधरी, एनके चौधरी, अभिषेक वशिष्ठ, पवन अग्रवाल, समयद्दीन, असलम, नागेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
पहले कई बार हो चुके हादसे
इस क्षेत्र में कई बार फैक्टरियों में आग लगने की वजह से हादसे हो चुके है। भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके लिए डीएम ने नौ विभागों की टीम गठित की थी, जिसमें यूपीसीडा, अग्निशमन विभाग, ऊर्जा निगम, श्रम विभाग, प्रदूषण विभाग, कारखाना विभाग आदि को फैक्ट्रियों की जांच के निर्देश दिए गए थे। इन विभागों ने फैक्टरियों में सेटबैक न होने, विद्युत लोड अधिक होने, अग्निशमन विभाग की एनओसी न होने आदि पर संचालकों को नोटिस दिए हैं।