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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Indigenous people trying drugs.

बुखार से जंग जीतने के लिए देसी दवाएं अजमा रहे लोग

Tue, 27 Sep 2016 07:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Tue, 27 Sep 2016 07:44 PM IST
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Indigenous people trying drugs.
mosquito - फोटो : Getty Images

जिले में बुखार अब तक पचास से अधिक जिंदगी लील चुका है। आलम यह है कि लोग बुखार से पीछा छुड़ाने के लिए एलोपैथिक के साथ देसी नुश्खे भी अजमा रहे हैं। नारियल पानी और बकरी के दूध के दाम आसमान छू रहे हैं।

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वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया से लोगों का हाल बेहाल है। बेकाबू होते बुखार से जंग जीतने के लिए लोग एलोपैथिक के साथ देसी उपचार भी कर रहे हैं। बुखार में हरे नारियल का पानी, बकरी का दूध और गिलोय की बेल कारगर साबित हो रही है।
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इसके चलते बाजार में नारियल पानी 60 रुपये, बकरी का दूध 400 रुपये लीटर तक बिक रहा है। जबकि गिलोय की बेल बाजार में भले ही न बिक रही हो लेकिन इसके लिए लोग गांवों की खाक छान रहे हैं।
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डॉ. पराग शर्मा का कहना है कि बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकों की सलाह लें। हालांकि देखने में आया है कि मरीजों में बकरी का दूध और हरे नारियल का पानी प्लेटलेट्स में बढ़ोत्तरी में सहायक सिद्ध हो रहा है।


इसके अलावा गिलोय की बेल का जूस लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। फिर भी मरीजों को सिर्फ देसी नुश्खे के भरोसे नहीं रहकर चिकित्सकों से जरूर सलाह लेनी चाहिए।

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