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जी हां! चाऊमीन में अजीनोमोटो बिगाड़ देगा सेहत
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Thu, 21 Jul 2016 09:36 PM IST
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- फोटो : demo pic
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चाऊमीन व नूडल्स में फ्लेवर बदलने के लिए इस्तेमाल किया जाना वाले अजीनोमोटो से आपकी सेहत खराब हो सकती है। इसलिए इसका इस्तेमाल जरा संभल कर करें। डॉक्टरों की माने तो यह धीमा जहर है, लंबे समय तक इसके सेवन से आपकी सेहत खराब हो सकती है।
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यही नहीं पेट व आंत संबंधी कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा औषधि एवं प्रशासन के कानून में इस पदार्थ पर एक साल के बच्चों के लिए पूर्णतया प्रतिबंध है। इससे अधिक आयु के लोगों को भी इसका सेवन काफी कम मात्रा में करना चाहिए।
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शहर के रेलवे रोड, बुलंदशहर रोड, तहसील चौपला, मेरठ रोड सहित विभिन्न गली-मोहल्लों में शाम ढलते ही चाइनीज फूड के सज जाते हैं। इन ठेलों पर चाऊमीन व नूडल्स की बिक्री ज्यादा होती है, क्योंकि युवाओं की यही पहली डिमांड है।
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लेकिन चाऊमीन, नूडल्स बनाने में जिस प्रकार से अजीनोमोटो का इस्तेमाल किया जाता है, वह आने वाली पीढ़ी को कई प्रकार के रोगों की ओर लेकर जा रहा है। चाऊमीन व नूडल्स में पड़ने वाले अजीनोमोटो से बच्चों में मोटापा, वजन बढ़ने और पेट संबंधी बीमारी होने का खतरा रहता है।
चिकित्सक इस प्रकार के फूड से बचने की सलाह देते हैं। उधर, इस बाबत खाद्य सुरक्षा औषधि एवं प्रशासन की डीओ अर्चना धीरान बताती हैं कि चायनीज फूड में अजीनोमोटो का इस्तेमाल किए जाने का प्रावधान है। लेकिन एक वर्ष तक के बच्चों को इसका प्रयोग नहीं करने का नियम भी है।
इसमें मोनो सोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) होता है। चाइनीज फूड में इसका प्रयोग फ्लेवर बदलने के लिए किया जाता है। यदि किसी कंपनी द्वारा किसी वस्तु में अजीनोमोटो का प्रयोग होता है तो उस कंपनी को रैपर पर इसकी मात्रा भी लिखनी चाहिए।
यदि कंपनी द्वारा मात्रा का जिक्र नहीं होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल जब से उन्होंने कार्यभार संभाला है,तब से अजीनोमोटो के खिलाफ अभियान नहीं चलाया गया है। लेकिन अब इसकी रोकथाम के लिए अभियान चलाने के वह निर्देश दे रहीं है।
अजीनोमोटो से हाजमे की सबसे ज्यादा शिकायतें आती है। बड़ी आंत की बीमारी होने का खतरा बना रहता है। अजीनोमोटो आंतों में जाकर उनमें इंफेंक्शन करता है। व्यक्ति 40 की उम्र में आ जाता है तो उसे शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है। डॉ. गौरव मित्तल