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सरकारी अस्पताल में एक रुपये का पर्चा,दवा लेने में जेब हो रही खाली
सार
सरकारी अस्पताल में एक रुपये का पर्चा, दवा लेने में जेब हो रहीं खाली हापुड़।आई ड्रोप, एंटी एलर्जिक और मधुमेह की दवाएं तक मरीजों को नहीं मिल रही है, खांसी की गोलियां दी जा रही हैं, बच्चों के लिए भी सीरप तक नहीं है।बहुत से मरीज पैसे नहीं होने के कारण मायूस लौट रहे हैं।
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सरकारी अस्पताल में दवाई लेने के लिये लगी मरीजो की लाइन । संवाद
- फोटो : HAPUR
विस्तार
सरकारी अस्पताल में एक रुपये का पर्चा, दवा लेने में जेब हो रहीं खाली
हापुड़। जिले के सरकारी अस्पताल आवश्यक दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। आई ड्रोप, एंटी एलर्जिक और मधुमेह की दवाएं तक मरीजों को नहीं मिल रही है, खांसी की गोलियां दी जा रही हैं, बच्चों के लिए भी सीरप तक नहीं है। एक रुपये के पर्चे पर उपचार पाकर मरीजों को बाजार से 200 से 250 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। बहुत से मरीज पैसे नहीं होने के कारण मायूस लौट रहे हैं। अफसर पत्राचार की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
गरीब वर्ग मरीज पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं, लेकिन अस्पतालों में ऐसे मरीजों को गंभीर बीमारियों का इलाज तो दूर सामान्य रोगों से निजात दिलाने के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं मिल रही हैं। चिकित्सक मर्ज के अनुसार दवा तो लिख रहे हैं, लेकिन इनमें आधे से ज्यादा दवाएं फार्मेसी में होती ही नहीं है।
गढ़ रोड सीएचसी का बजट खत्म होने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, किसी तरह बहादुरगढ़ सीएचसी के बजट से यहां दवाएं मंगाई जा रही है। लेकिन अब ऊपर से ही कई महत्वपूर्ण दवाओं की कमी हो गई हैं। मौसम में परिवर्तन से खांसी, बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, त्वचा रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में इन मर्जों की दवाएं ही पर्याप्त नहीं हैं।
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अस्पताल से एंटी बायोटिक तो मिल रही हैं, लेकिन खांसी वाले बच्चों को सीरप व एंटी एलर्जिक पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। खांसी सीरप व अन्य दवाएं लेने में मरीजों की जेब से 200 से 250 रुपये खर्च हो जाते हैं।
अफ्रीका में बच्चों की मौत से परिजन परेशान
अफ्रीका में सीरप पीने से 66 बच्चों की मौत के बाद अब बाजारों से खांसी का सीरप खरीदने में हिचकिचा रहे हैं। शुक्रवार को बड़ी संख्या में मरीज खांसी का सीरप लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
कोट -
अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं मौजूद हैं, खांसी के सीरप सरकारी अस्पतालों में नहीं आते हैं, इनके स्थान पर गोलियां आती हैं, जो मरीजों को दी जा रही है। जहां दवाओं की कमी है उन्हें पूरा कराया जाएगा। - डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।
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हापुड़। जिले के सरकारी अस्पताल आवश्यक दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। आई ड्रोप, एंटी एलर्जिक और मधुमेह की दवाएं तक मरीजों को नहीं मिल रही है, खांसी की गोलियां दी जा रही हैं, बच्चों के लिए भी सीरप तक नहीं है। एक रुपये के पर्चे पर उपचार पाकर मरीजों को बाजार से 200 से 250 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। बहुत से मरीज पैसे नहीं होने के कारण मायूस लौट रहे हैं। अफसर पत्राचार की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
गरीब वर्ग मरीज पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं, लेकिन अस्पतालों में ऐसे मरीजों को गंभीर बीमारियों का इलाज तो दूर सामान्य रोगों से निजात दिलाने के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं मिल रही हैं। चिकित्सक मर्ज के अनुसार दवा तो लिख रहे हैं, लेकिन इनमें आधे से ज्यादा दवाएं फार्मेसी में होती ही नहीं है।
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गढ़ रोड सीएचसी का बजट खत्म होने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, किसी तरह बहादुरगढ़ सीएचसी के बजट से यहां दवाएं मंगाई जा रही है। लेकिन अब ऊपर से ही कई महत्वपूर्ण दवाओं की कमी हो गई हैं। मौसम में परिवर्तन से खांसी, बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, त्वचा रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में इन मर्जों की दवाएं ही पर्याप्त नहीं हैं।
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अस्पताल से एंटी बायोटिक तो मिल रही हैं, लेकिन खांसी वाले बच्चों को सीरप व एंटी एलर्जिक पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। खांसी सीरप व अन्य दवाएं लेने में मरीजों की जेब से 200 से 250 रुपये खर्च हो जाते हैं।
अफ्रीका में बच्चों की मौत से परिजन परेशान
अफ्रीका में सीरप पीने से 66 बच्चों की मौत के बाद अब बाजारों से खांसी का सीरप खरीदने में हिचकिचा रहे हैं। शुक्रवार को बड़ी संख्या में मरीज खांसी का सीरप लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
कोट -
अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं मौजूद हैं, खांसी के सीरप सरकारी अस्पतालों में नहीं आते हैं, इनके स्थान पर गोलियां आती हैं, जो मरीजों को दी जा रही है। जहां दवाओं की कमी है उन्हें पूरा कराया जाएगा। - डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।

सरकारी अस्पताल से दवा न मिलने के कारण बाहर से दवाई लेकर खडा युवक । संवाद- फोटो : HAPUR