{"_id":"633f09a5b9d44749ba025c66","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd2456450153","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के 30 हजार पेट्रोल और डीजल वाहनों का पंजीयन निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के 30 हजार पेट्रोल और डीजल वाहनों का पंजीयन निरस्त
सार
जिले के 30 हजार पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीयन निरस्त हापुड़।एनजीटी के सख्त आदेशों के बाद परिजन विभाग इस मामले में गंभीर हो गया है और 25846 पेट्रोल वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है, जो 15 वर्ष के हो चुके हैं।अभी तक मात्र पेट्रोल के 29 व डीजल के 135 वाहन स्वामियों ने ही एनओसी ली है।
विज्ञापन
खटारा जीप से निकलता काला धुआँ । संवाद
- फोटो : HAPUR
विस्तार
जिले के 30 हजार पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीयन निरस्त
हापुड़। जिले की हवा को प्रदूषित कर रहे 30 हजार पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। हालांकि विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कई बार नोटिस देने के बाद भी इन वाहनों का संचालन जारी था। अब इन्हें सड़कों से हटाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा अभियान चलाया जाएगा। अगर ये वाहन सड़कों पर चलते मिले तो इन्हें सीज कर दिया जाएगा।
शासन के आदेश के बाद 15 साल पुराने पेट्रोल और दस साल पुराने डीजल वाहनों को एनसीआर क्षेत्र से हटाने क निर्देश दिए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय (एनजीटी) के आदेशानुसार ये पुराने वाहन हवा को दूषित अधिक करते हैं। हापुड़ जिले के एनसीआर क्षेत्र में शामिल होने के कारण यहां भी ऐसे वाहनों को सड़क से हटाने के आदेश हैं।
उपसंभागीय कार्यालय द्वारा ऐसेे वाहनों की सूची बनाई गई थी। वाहनों का संचालन बंद करने या फिर दूसरे जिलों में जहां एनजीटी के आदेश प्रभावी नहीं हैं, वाहन स्वामियों को इनका पंजीकरण ट्रांसफर कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन संबंधित वाहन स्वामियों ने गंभीरता नहीं दिखाई । जिले में अभी भी इन वाहनों का संचालन हो रहा है।
विज्ञापन
समय सीमा समाप्त होने के बाद भी ऐसे वाहनों का यहां संचालन किया जा रहा है। यहां तक कि वाहनों का दोबारा पंजीयन कराकर अन्य जनपदों के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र ले जाने अथवा पंजीयन चिन्ह निरस्त कराए जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है।
एनजीटी के सख्त आदेशों के बाद परिजन विभाग इस मामले में गंभीर हो गया है और 25846 पेट्रोल वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है, जो 15 वर्ष के हो चुके हैं। जबकि चार हजार डीजल वाहन हैं, जो दस वर्ष पुराने हो चुके हैं। उपसंभागीय कार्यालय ने इन वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं और इन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया है। एआरटीओ प्रशासन अजीत श्रीवास्तव का कहना है कि अगर ये वाहन सड़कों पर दौड़ते दिखे, तो इन्हें सीज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
164 वाहन स्वामियों ने ली दूसरे जिलों की एनओसी
पिछले वर्ष से परिवहन विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्ती कर रहा है। जिले में अभी तक ऐसे कुल 570 वाहनों पर कार्रवाई हो चुकी है। जिसमें 260 दोपहिया वाहन, 279 पेट्रोल चलित और 51 डीजल चलित चार पहिया वाहन शामिल थे। अब एक बार फिर सूची तैयार हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद वाहन चालक दूसरे जिलों के लिए एनओसी के लिए जागरूकता नहीं दिख रही है। अभी तक मात्र पेट्रोल के 29 व डीजल के 135 वाहन स्वामियों ने ही एनओसी ली है।
कोट-
एनजीटी के आदेशों के बाद ऐसे वाहनों की लिस्ट तैयार की जा रही है, करीब 30 हजार वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। ऐसे वाहन चालक जिनके पेट्रोल वाहनों को 15 वर्ष और डीजल वाहनों को 10 वर्ष पूरे होने वाले हैं, वे यहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर बाकी एनसीआर क्षेत्र के बाहर के 32 जिलों में पंजीकरण करा सकते हैं। - अजीत श्रीवास्तव, एआरटीओ, प्रशासन।
विज्ञापन
हापुड़। जिले की हवा को प्रदूषित कर रहे 30 हजार पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। हालांकि विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कई बार नोटिस देने के बाद भी इन वाहनों का संचालन जारी था। अब इन्हें सड़कों से हटाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा अभियान चलाया जाएगा। अगर ये वाहन सड़कों पर चलते मिले तो इन्हें सीज कर दिया जाएगा।
शासन के आदेश के बाद 15 साल पुराने पेट्रोल और दस साल पुराने डीजल वाहनों को एनसीआर क्षेत्र से हटाने क निर्देश दिए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय (एनजीटी) के आदेशानुसार ये पुराने वाहन हवा को दूषित अधिक करते हैं। हापुड़ जिले के एनसीआर क्षेत्र में शामिल होने के कारण यहां भी ऐसे वाहनों को सड़क से हटाने के आदेश हैं।
विज्ञापन
उपसंभागीय कार्यालय द्वारा ऐसेे वाहनों की सूची बनाई गई थी। वाहनों का संचालन बंद करने या फिर दूसरे जिलों में जहां एनजीटी के आदेश प्रभावी नहीं हैं, वाहन स्वामियों को इनका पंजीकरण ट्रांसफर कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन संबंधित वाहन स्वामियों ने गंभीरता नहीं दिखाई । जिले में अभी भी इन वाहनों का संचालन हो रहा है।
विज्ञापन
समय सीमा समाप्त होने के बाद भी ऐसे वाहनों का यहां संचालन किया जा रहा है। यहां तक कि वाहनों का दोबारा पंजीयन कराकर अन्य जनपदों के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र ले जाने अथवा पंजीयन चिन्ह निरस्त कराए जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है।
एनजीटी के सख्त आदेशों के बाद परिजन विभाग इस मामले में गंभीर हो गया है और 25846 पेट्रोल वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है, जो 15 वर्ष के हो चुके हैं। जबकि चार हजार डीजल वाहन हैं, जो दस वर्ष पुराने हो चुके हैं। उपसंभागीय कार्यालय ने इन वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं और इन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया है। एआरटीओ प्रशासन अजीत श्रीवास्तव का कहना है कि अगर ये वाहन सड़कों पर दौड़ते दिखे, तो इन्हें सीज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
164 वाहन स्वामियों ने ली दूसरे जिलों की एनओसी
पिछले वर्ष से परिवहन विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्ती कर रहा है। जिले में अभी तक ऐसे कुल 570 वाहनों पर कार्रवाई हो चुकी है। जिसमें 260 दोपहिया वाहन, 279 पेट्रोल चलित और 51 डीजल चलित चार पहिया वाहन शामिल थे। अब एक बार फिर सूची तैयार हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद वाहन चालक दूसरे जिलों के लिए एनओसी के लिए जागरूकता नहीं दिख रही है। अभी तक मात्र पेट्रोल के 29 व डीजल के 135 वाहन स्वामियों ने ही एनओसी ली है।
कोट-
एनजीटी के आदेशों के बाद ऐसे वाहनों की लिस्ट तैयार की जा रही है, करीब 30 हजार वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। ऐसे वाहन चालक जिनके पेट्रोल वाहनों को 15 वर्ष और डीजल वाहनों को 10 वर्ष पूरे होने वाले हैं, वे यहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर बाकी एनसीआर क्षेत्र के बाहर के 32 जिलों में पंजीकरण करा सकते हैं। - अजीत श्रीवास्तव, एआरटीओ, प्रशासन।