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किसानों की फर्द में नहीं चढने दिया था 148 करोड़ का ऋण
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किसानों की फर्द में नहीं चढ़ने दिया था 148 करोड़ का ऋण
सिंभावली शुगर मिल प्रकरण :--
हापुड़। सिंभावली चीनी मिल ने हापुड़ के 5762 किसानों की फर्द बैंक में लगाकर 148 करोड़ का ऋण निकाल लिया, लेकिन यह ऋण आज तक भी किसानों की फर्द पर नहीं चढ़ने दिया। वर्ष 2014 में जो नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें भी नाटकीय ढंग से वापस लिया गया। पूरा मामला शांत कर दिया, वर्ष 2020 में सीबीआई जांच शुरू होने पर फिर से मामला गरमाया तो मिल प्रबंधन दिल्ली तक की दौड़ लगाने लगे। अब दो साल बाद फिर से सीबीआई ने हापुड़ में डेरा डाल दिया है। जिससे किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है।
सिंभावली चीनी मिल पर ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स के अधिकारियों ने रिजर्व बैंक से शिकायत कर सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन पर 148 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई थी।
इस मामले में 2018 में सीबीआई में एफआईआर के बाद मामले की जांच की जा रही थी। सितंबर 2020 में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने जिले के विभिन्न गांवों में उन किसानों के बयान दर्ज कराए थे, जिनके नाम पर मिल प्रबंधन ने बैंक से ऋण लिया था। टीम ने जिले में करीब 10 गांवों के किसानों से इस संबंध में पूछताछ की थी। इसमें धौलाना क्षेत्र के गांव बझैड़ा कला, दौलतपुर ढीकरी सहित सीमावर्ती बुलंदशहर जिले के भी अन्य गांवों के किसानों के बयान लिए। टीम द्वारा किसानों के कई हस्ताक्षर कराये थे ताकि सीएफएसएल (सेंट्रल फारेंसिंक सांइस लेबोरेट्री) मिलान किया जा सके। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आ रही थी कि अधिकतर किसानों के फोटो और दूसरी जानकारी तो सही है, लेकिन हस्ताक्षर अलग बताए गए थे।
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मुख्य बात यह है कि इतना बड़ा ऋण किसानों के नाम से लिया गया, लेकिन किसानों की फर्द पर ऋण का कोई उल्लेख नहीं मिला। जबकि किसान यदि 20 हजार का ऋण भी लेता है तो उसकी पूरा आख्या उसकी खतौनी पर उतार दी जाती है। इस प्रकरण में चीनी मिल, बैंक के साथ साथ कुछ सरकारी मशीनरी के मिले होने की भी संभावना जतायी जा रही थी।
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गन्ना विभाग को भी नहीं है जानकारी -
जिले में बैंक घोटाले को लेकर किसानों के गुपचुप बयान ले रही सीबीआई की टीम ने गन्ना विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क नहीं किया है। टीम फिलहाल केवल गांवों में ही किसानों के गुपचुप तरीके से बयान ले रही है। गन्ना अधिकारियों को इस बारे में जानकारी नहीं है।
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सिंभावली शुगर मिल प्रकरण :--
हापुड़। सिंभावली चीनी मिल ने हापुड़ के 5762 किसानों की फर्द बैंक में लगाकर 148 करोड़ का ऋण निकाल लिया, लेकिन यह ऋण आज तक भी किसानों की फर्द पर नहीं चढ़ने दिया। वर्ष 2014 में जो नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें भी नाटकीय ढंग से वापस लिया गया। पूरा मामला शांत कर दिया, वर्ष 2020 में सीबीआई जांच शुरू होने पर फिर से मामला गरमाया तो मिल प्रबंधन दिल्ली तक की दौड़ लगाने लगे। अब दो साल बाद फिर से सीबीआई ने हापुड़ में डेरा डाल दिया है। जिससे किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है।
सिंभावली चीनी मिल पर ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स के अधिकारियों ने रिजर्व बैंक से शिकायत कर सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन पर 148 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई थी।
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इस मामले में 2018 में सीबीआई में एफआईआर के बाद मामले की जांच की जा रही थी। सितंबर 2020 में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने जिले के विभिन्न गांवों में उन किसानों के बयान दर्ज कराए थे, जिनके नाम पर मिल प्रबंधन ने बैंक से ऋण लिया था। टीम ने जिले में करीब 10 गांवों के किसानों से इस संबंध में पूछताछ की थी। इसमें धौलाना क्षेत्र के गांव बझैड़ा कला, दौलतपुर ढीकरी सहित सीमावर्ती बुलंदशहर जिले के भी अन्य गांवों के किसानों के बयान लिए। टीम द्वारा किसानों के कई हस्ताक्षर कराये थे ताकि सीएफएसएल (सेंट्रल फारेंसिंक सांइस लेबोरेट्री) मिलान किया जा सके। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आ रही थी कि अधिकतर किसानों के फोटो और दूसरी जानकारी तो सही है, लेकिन हस्ताक्षर अलग बताए गए थे।
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मुख्य बात यह है कि इतना बड़ा ऋण किसानों के नाम से लिया गया, लेकिन किसानों की फर्द पर ऋण का कोई उल्लेख नहीं मिला। जबकि किसान यदि 20 हजार का ऋण भी लेता है तो उसकी पूरा आख्या उसकी खतौनी पर उतार दी जाती है। इस प्रकरण में चीनी मिल, बैंक के साथ साथ कुछ सरकारी मशीनरी के मिले होने की भी संभावना जतायी जा रही थी।
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गन्ना विभाग को भी नहीं है जानकारी -
जिले में बैंक घोटाले को लेकर किसानों के गुपचुप बयान ले रही सीबीआई की टीम ने गन्ना विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क नहीं किया है। टीम फिलहाल केवल गांवों में ही किसानों के गुपचुप तरीके से बयान ले रही है। गन्ना अधिकारियों को इस बारे में जानकारी नहीं है।