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सरकारी अस्पतालों में 20 दिन से ऑपरेशन सेवा बंद
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सरकारी अस्पतालों में 20 दिन से ऑपरेशन सेवा बंद
हापुड़। स्वास्थ्य विभाग के सरकारी अस्पतालों में 20 दिन से ऑपरेशन सेवा बंद है। जिला अस्पताल के सर्जन सेवानिवृत्त हो चुके हैं, एक सर्जन ट्रेनिंग पर हैं। ऑपरेशन थियेटर ठप पड़े हैं, गरीब मरीज दर्द निवारक गोलियां खाकर समय काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में हार्निया और पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन 80 हजार से एक लाख रुपये तक में हो रहा है। सरकारी अस्पतालों की वेटिंग में ऑपरेशन वाले मरीजों की कतार बढ़ती जा रही है।
हापुड़ को जिला बने 10 साल हो गए हैं, अस्पतालों की यहां कमी नहीं है। सात सीएचसी और एक जिला अस्पताल के अलावा 200 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन संसाधन और चिकित्सकों के अभाव में अस्पतालों के भवन सफेद हाथी बने हैं, इनमें मरीजों को ऑपरेशन तक की सुविधा नहीं मिल रही।
13 लाख आबादी की सर्जरी का जिम्मा सिर्फ दो सर्जन पर था, इनमें जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राजकुमार 20 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए हैं। सप्ताह में तीन दिन वह ऑपरेशन करते थे। इसके अलावा एक सर्जन धौलाना सीएचसी में कार्यरत हैं, वह बीते दो सप्ताह से ट्रेनिंग में हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन दिनों बिना सर्जन स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। छोटी सर्जरी के लिए भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। बेहद गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, क्योंकि निजी में वह इलाज करा नहीं सकते और सरकारी में सर्जन नहीं मिल रहे। दर्द निवारक गोलियां खाकर ही वह समय काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के पैकेज बनाए गए हैं, छोटे ऑपरेशन के भी 50 हजार रुपये जेब में होना जरूरी है।
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ऑपरेशन के निजी अस्पतालों में रेट-
* पित्त की थैली में पत्थरी---50 हजार से एक लाख
* बच्चेदानी निकालना------25 हजार से 80 हजार
* गुर्दे की पत्थरी---------40 हजार से 80 हजार
* हर्निया--------------30 हजार से 70 हजार
* टीबी की गांठ--------़30 हजार से डेढ़ लाख
सरकारी अस्पतालों में सर्जनों की स्थिति
जिला अस्पताल----00
धौलाना सीएचसी---01
सपनावत--------00
पिलखुवा--------00
हापुड़----------00
सिखैड़ा--------00
गढ़मुक्तेश्वर-----00
गोहरा---------00
इन चिकित्सकों की कमी
* हृदय रोग विशेषज्ञ।
* ईएनटी रोग विशेषज्ञ।
* हड्डी रोग विशेषज्ञ।
* जनरल सर्जन।
* चर्म रोग विशेषज्ञ।
* छाती रोग विशेषज्ञ।
धौलाना सीएचसी के सर्जन किए अटैच-
धौलाना सीएचसी में तैनात सर्जन को जिला अस्पताल और गढ़ रोड सीएचसी से अटैच किया जा रहा है। सप्ताह में चार दिन जिला अस्पताल और दो दिन गढ़ रोड सीएचसी में सर्जन सेवा देंगे। लेकिन अभी वह ट्रेनिंग पर हैं, ऐसे में ऑपरेशन के लिए इंतजार करना होगा।
-
जिला अस्पताल में नहीं एक्सरे सेवा
जिला अस्पताल में एक्सरे सेवा नहीं है, टीबी अस्पताल में मरीजों को एक्सरे कराने के लिए भेजा जाता है। अब वहां भी टेक्नीशियन नहीं हैं, हापुड़ सीएचसी में एक मात्र टेक्नीशियन है, जिसके ऊपर पूरे जिले के मरीजों के एक्सरे करने की जिम्मेदारी है।
कोट-
सर्जनों की कमी को लेकर शासन को अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही सरकारी अस्पतालों में सर्जरी शुरू हो जाएंगी। जिला अस्पताल के सर्जन के सेवानिवृत्त होने से परेशानी बनी है, मरीजों को राहत दिलाई जाएगी। - डॉ सुनील कुमार, सीएमओ।
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हापुड़। स्वास्थ्य विभाग के सरकारी अस्पतालों में 20 दिन से ऑपरेशन सेवा बंद है। जिला अस्पताल के सर्जन सेवानिवृत्त हो चुके हैं, एक सर्जन ट्रेनिंग पर हैं। ऑपरेशन थियेटर ठप पड़े हैं, गरीब मरीज दर्द निवारक गोलियां खाकर समय काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में हार्निया और पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन 80 हजार से एक लाख रुपये तक में हो रहा है। सरकारी अस्पतालों की वेटिंग में ऑपरेशन वाले मरीजों की कतार बढ़ती जा रही है।
हापुड़ को जिला बने 10 साल हो गए हैं, अस्पतालों की यहां कमी नहीं है। सात सीएचसी और एक जिला अस्पताल के अलावा 200 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन संसाधन और चिकित्सकों के अभाव में अस्पतालों के भवन सफेद हाथी बने हैं, इनमें मरीजों को ऑपरेशन तक की सुविधा नहीं मिल रही।
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13 लाख आबादी की सर्जरी का जिम्मा सिर्फ दो सर्जन पर था, इनमें जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राजकुमार 20 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए हैं। सप्ताह में तीन दिन वह ऑपरेशन करते थे। इसके अलावा एक सर्जन धौलाना सीएचसी में कार्यरत हैं, वह बीते दो सप्ताह से ट्रेनिंग में हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन दिनों बिना सर्जन स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। छोटी सर्जरी के लिए भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। बेहद गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, क्योंकि निजी में वह इलाज करा नहीं सकते और सरकारी में सर्जन नहीं मिल रहे। दर्द निवारक गोलियां खाकर ही वह समय काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के पैकेज बनाए गए हैं, छोटे ऑपरेशन के भी 50 हजार रुपये जेब में होना जरूरी है।
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ऑपरेशन के निजी अस्पतालों में रेट-
* पित्त की थैली में पत्थरी---50 हजार से एक लाख
* बच्चेदानी निकालना------25 हजार से 80 हजार
* गुर्दे की पत्थरी---------40 हजार से 80 हजार
* हर्निया--------------30 हजार से 70 हजार
* टीबी की गांठ--------़30 हजार से डेढ़ लाख
सरकारी अस्पतालों में सर्जनों की स्थिति
जिला अस्पताल----00
धौलाना सीएचसी---01
सपनावत--------00
पिलखुवा--------00
हापुड़----------00
सिखैड़ा--------00
गढ़मुक्तेश्वर-----00
गोहरा---------00
इन चिकित्सकों की कमी
* हृदय रोग विशेषज्ञ।
* ईएनटी रोग विशेषज्ञ।
* हड्डी रोग विशेषज्ञ।
* जनरल सर्जन।
* चर्म रोग विशेषज्ञ।
* छाती रोग विशेषज्ञ।
धौलाना सीएचसी के सर्जन किए अटैच-
धौलाना सीएचसी में तैनात सर्जन को जिला अस्पताल और गढ़ रोड सीएचसी से अटैच किया जा रहा है। सप्ताह में चार दिन जिला अस्पताल और दो दिन गढ़ रोड सीएचसी में सर्जन सेवा देंगे। लेकिन अभी वह ट्रेनिंग पर हैं, ऐसे में ऑपरेशन के लिए इंतजार करना होगा।
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जिला अस्पताल में नहीं एक्सरे सेवा
जिला अस्पताल में एक्सरे सेवा नहीं है, टीबी अस्पताल में मरीजों को एक्सरे कराने के लिए भेजा जाता है। अब वहां भी टेक्नीशियन नहीं हैं, हापुड़ सीएचसी में एक मात्र टेक्नीशियन है, जिसके ऊपर पूरे जिले के मरीजों के एक्सरे करने की जिम्मेदारी है।
कोट-
सर्जनों की कमी को लेकर शासन को अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही सरकारी अस्पतालों में सर्जरी शुरू हो जाएंगी। जिला अस्पताल के सर्जन के सेवानिवृत्त होने से परेशानी बनी है, मरीजों को राहत दिलाई जाएगी। - डॉ सुनील कुमार, सीएमओ।