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रक्षाबंधन पर पूरे दिन रहेगा भद्राकाल का साया
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रक्षाबंधन पर पूरे दिन रहेगा भद्राकाल का साया
हापुड़। सावन माह की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर पूरे दिन भद्रा का साया रहने वाला है। पंडित धर्म सिंधु के अनुसार अपराह्न या प्रदोष व्यापिनी श्रवण शुक्ल रक्षाबंधन मनानी चाहिए। जो भद्रा व्याप्त नहीं होनी चाहिए। ऐसे में रक्षाबंधन पर भद्रा होने पर भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि राजधानी, विश्वविजय आदि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई को सुबह 10.38 से पूर्णिमा आ जाएगी। लेकिन, 10.38 बजे से रात्रि 8.51 बजे तक भद्राकाल रहेगी। भद्रा काल में दो त्योहार नहीं मनाने चाहिए। श्रावणी रक्षाबंधन और फाल्गुनी होली। भद्रा काल में रक्षाबंधन मनेगा तो राजा के लिए कष्टकारी है और होली दहन के समय भद्रा रहेगी तो प्रजा, ग्राम आदि के लिए हानिकारक है।
उन्होंने बताया कि 12 अगस्त को सुबह 7.05 बजे तक पूर्णिमा है उसके पश्चात प्रतिपदा आ जाएगा। पूर्णिमा मात्र एक घंटा तेरह मिनट रहेगी। 12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार में सूर्योदय के बाद 3 घंटे से अधिक है। धर्म कृत्योपयोगी रक्षाबंधन के लिए श्रेष्ठ मानी जाएगी। जिस समय पूर्णिमा आएगी उसी समय भद्रा आरंभ हो जाएगी और भद्रा में रक्षाबंधन करना शुभ नहीं होता है।
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11 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
पंडित संतोष तिवारी के अनुसार रात्रि 8.50 तक भद्रा मे रक्षा सूत्र बांधना उचित नहीं है। लेकिन, रात्रि 8.50 से 10.08 तक मीन लग्न लगनस्थ गुरु बेला रक्षासूत्र बंधवा सकते हैं। इसके बाद 12 अगस्त को सुबह 6.13 से 7.05 तक पूर्णिमा, स्थिर लग्न, ब्रह्म मुहूर्त में रक्षा सूत्र राखी बंधवाना उचित है। उसके बाद पूर्णिमा तिथि की समाप्ति हो जाएगी और पड़वा में शुभ कार्य वर्जित हैं।
राखी बांधने का मंत्र
- येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबल:
- तेनत्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल
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हापुड़। सावन माह की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर पूरे दिन भद्रा का साया रहने वाला है। पंडित धर्म सिंधु के अनुसार अपराह्न या प्रदोष व्यापिनी श्रवण शुक्ल रक्षाबंधन मनानी चाहिए। जो भद्रा व्याप्त नहीं होनी चाहिए। ऐसे में रक्षाबंधन पर भद्रा होने पर भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि राजधानी, विश्वविजय आदि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई को सुबह 10.38 से पूर्णिमा आ जाएगी। लेकिन, 10.38 बजे से रात्रि 8.51 बजे तक भद्राकाल रहेगी। भद्रा काल में दो त्योहार नहीं मनाने चाहिए। श्रावणी रक्षाबंधन और फाल्गुनी होली। भद्रा काल में रक्षाबंधन मनेगा तो राजा के लिए कष्टकारी है और होली दहन के समय भद्रा रहेगी तो प्रजा, ग्राम आदि के लिए हानिकारक है।
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उन्होंने बताया कि 12 अगस्त को सुबह 7.05 बजे तक पूर्णिमा है उसके पश्चात प्रतिपदा आ जाएगा। पूर्णिमा मात्र एक घंटा तेरह मिनट रहेगी। 12 अगस्त 2022 दिन शुक्रवार में सूर्योदय के बाद 3 घंटे से अधिक है। धर्म कृत्योपयोगी रक्षाबंधन के लिए श्रेष्ठ मानी जाएगी। जिस समय पूर्णिमा आएगी उसी समय भद्रा आरंभ हो जाएगी और भद्रा में रक्षाबंधन करना शुभ नहीं होता है।
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11 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
पंडित संतोष तिवारी के अनुसार रात्रि 8.50 तक भद्रा मे रक्षा सूत्र बांधना उचित नहीं है। लेकिन, रात्रि 8.50 से 10.08 तक मीन लग्न लगनस्थ गुरु बेला रक्षासूत्र बंधवा सकते हैं। इसके बाद 12 अगस्त को सुबह 6.13 से 7.05 तक पूर्णिमा, स्थिर लग्न, ब्रह्म मुहूर्त में रक्षा सूत्र राखी बंधवाना उचित है। उसके बाद पूर्णिमा तिथि की समाप्ति हो जाएगी और पड़वा में शुभ कार्य वर्जित हैं।
राखी बांधने का मंत्र
- येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबल:
- तेनत्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल