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डीएपी के सैंपल फेल होने के मामले में कार्रवाई अभिलेख में नहीं हो सकी दर्ज
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डीएपी के सैंपल फेल होने के मामले में कार्रवाई अभिलेख में नहीं हो सकी दर्ज
हापुड़। बफर गोदाम से वर्ष 2019 में भरे गए डीएपी के चार सैंपल अधोमानक पाए जाने के मामले में धनौरा के किसान द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में कृषि विभाग ने इस प्रकरण के संदर्भ में की गई कार्रवाई कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं होने की जवाब दिया है। शिकायतकर्ता किसान ने अब न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।
धनौरा निवासी किसान शिवकुमार त्यागी ने बताया कि किसानों को वर्ष 2016 और 2019 में घटिया उर्वरक वितरित कराए गए थे। कृषि विभाग की छापेमार कार्रवाई में इफको डीएपी के सैंपल फेल पाए गए थे। वर्ष 2019 में चार सैंपल फेल थे, इसकी पुष्टि कृषि विभाग ने की थी, जिसका साक्ष्य उनके पास है।
मिलावटी उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की फसल भी बर्बाद हुई। उस समय किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग उठाई गई थी। जिला कृषि अधिकारी ने सूचना के तहत स्वीकारा था कि चार सैंपल फेल हुए थे। साथ ही यह भी बताया कि अधोमानक नमूनों का पुन परीक्षण करने के लि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी से अनुरोध किया गया, इसके बाद इस प्रकरण के संदर्भ में की गई कार्रवाई कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।
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वहीं, पत्र में पीसीएफ के अधिकारियों ने दावा किया है कि उसी बोरे से भरे गए आठ सैंपल पास हो गए थे। फेल सैंपल की पुन जांच के लिए तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी से अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने अपील तक नहीं की।
किसान शिवकुमार त्यागी ने बताया कि अधिकारियों द्वारा गलत काम करने वालों को बचाया जा रहा है। किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। अब इस प्रकरण को लेकर वह न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
कोट =
किसान को कार्रवाई से करा दिया अवगत
किसान द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध करा दी गई है। तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी ने जो कार्रवाई की थी वह भी सूचना के तहत बता दी गई है।
- मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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हापुड़। बफर गोदाम से वर्ष 2019 में भरे गए डीएपी के चार सैंपल अधोमानक पाए जाने के मामले में धनौरा के किसान द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में कृषि विभाग ने इस प्रकरण के संदर्भ में की गई कार्रवाई कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं होने की जवाब दिया है। शिकायतकर्ता किसान ने अब न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।
धनौरा निवासी किसान शिवकुमार त्यागी ने बताया कि किसानों को वर्ष 2016 और 2019 में घटिया उर्वरक वितरित कराए गए थे। कृषि विभाग की छापेमार कार्रवाई में इफको डीएपी के सैंपल फेल पाए गए थे। वर्ष 2019 में चार सैंपल फेल थे, इसकी पुष्टि कृषि विभाग ने की थी, जिसका साक्ष्य उनके पास है।
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मिलावटी उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की फसल भी बर्बाद हुई। उस समय किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग उठाई गई थी। जिला कृषि अधिकारी ने सूचना के तहत स्वीकारा था कि चार सैंपल फेल हुए थे। साथ ही यह भी बताया कि अधोमानक नमूनों का पुन परीक्षण करने के लि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी से अनुरोध किया गया, इसके बाद इस प्रकरण के संदर्भ में की गई कार्रवाई कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।
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वहीं, पत्र में पीसीएफ के अधिकारियों ने दावा किया है कि उसी बोरे से भरे गए आठ सैंपल पास हो गए थे। फेल सैंपल की पुन जांच के लिए तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी से अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने अपील तक नहीं की।
किसान शिवकुमार त्यागी ने बताया कि अधिकारियों द्वारा गलत काम करने वालों को बचाया जा रहा है। किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। अब इस प्रकरण को लेकर वह न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
कोट =
किसान को कार्रवाई से करा दिया अवगत
किसान द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध करा दी गई है। तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी ने जो कार्रवाई की थी वह भी सूचना के तहत बता दी गई है।
- मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी