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दूध में मिलावट करने पर छह माह का कारावास
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दूध में मिलावट करने पर छह माह का कारावास
हापुड़। दूध में मिलावट के एक मामले में 16 साल बाद एसीजेएम कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 माह का कारावास और एक हजार का अर्थदंड लगाया है। जिला बनने के बाद एसीजेएम कोर्ट द्वारा मिलावट के किसी मामले में पहली सजा है। हालांकि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का दावा है कि सही पैरवी के कारण अगले कुछ दिनों में करीब 20 ऐसे मामलों में सजा होने की उम्मीद बढ़ी है।
अभिहित अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि पिलखुवा नगर से वर्ष 2006 में एक डेयरी संचालक उम्मेद पुत्र खचेडू से दूध का नमूना लिया गया था, जो जांच में फेल हो गया था। तभी से मामला एसीजेएम कोर्ट में चल रहा था। ऐसे मामलों में विभाग की और से पैरवी की जा रही थी। जिसके बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया है। हापुड़ के जिला बनने के बाद किसी मिलावट खोर के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है। ऐसे में विभाग के अधिकारी इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
अगले कुछ दिनों में होगा 20 मामलों में फैसला
जिले से संबंधित एसीजेएम कोर्ट में करीब 350 वाद लंबित हैं, इनमे करीब 200 पिछले चार सालों में दर्ज किए गए हैं। अभिहित अधिकारी ने बताया कि मिलावट के मामलों में पिछले कुछ दिनों में पैरवी तेज होने के कारण अगले कुछ दिनों में 20 मामलों में फैसला आने की पूरी उम्मीद है। इनमें अधिकतर मामले दूध की ही मिलावट के हैं।
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तीन साल में बढ़ा मिलावट का खेल
जिले में मिलावट का खेल लोगों को बीमार बना रहा है। पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की ओर से 822 नमूने लिए गए। जिनमें से 360 नमूने फेल हो गए। हालांकि विभाग ने मिलावट खोरों पर एक करोड़ से भी ऊपर जुर्माना लगाया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले भर से 292 नमूने जांच के लिए लैब भेजे। जिनमें 125 फेल गए। जिनमें से 57 अधोमानक पाए गए और 42 असुरक्षित मिले। 26 मामलों में नियमों का उल्लंघन मिला था। विभाग की ओर से 114 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। इनमें से 88 पर फैसला आया। जिस पर कोर्ट ने 42.19 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में 233 नमूने लिए गए। जिसमें से 119 फेल हुए। इनमें से 59 अधोमानक, 33 असुरक्षित, 23 मिसब्रांड व चार मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया। 83 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। जिसके सापेक्ष 74 मामलों में फैसला सुनाया गया। जिसमें जुर्माने के तौर पर 31.26 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 297 नमूने लिए गए थे। जिनमें से 116 फेल हो गए थे। कुल फेल हुए नमूनों में 47 अधोमानक, 35 असुरक्षित, 32 मित्याछाप ब्रांड और मामलों में नियम उल्लंघन पाया गया है। 79 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। इसके सापेक्ष 78 वादों का निस्तारण करते हुए 47.37 लाख का जुर्माना लगाया गया। पिछले तीन सालों में दूध खोया पनीर, घर, मावे से बनी मिठाईयां सरसों का तेल, रिफाइंड, मसाले, दाल, नमकीन, आदि शामिल हैं। संवाद
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हापुड़। दूध में मिलावट के एक मामले में 16 साल बाद एसीजेएम कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 माह का कारावास और एक हजार का अर्थदंड लगाया है। जिला बनने के बाद एसीजेएम कोर्ट द्वारा मिलावट के किसी मामले में पहली सजा है। हालांकि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का दावा है कि सही पैरवी के कारण अगले कुछ दिनों में करीब 20 ऐसे मामलों में सजा होने की उम्मीद बढ़ी है।
अभिहित अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि पिलखुवा नगर से वर्ष 2006 में एक डेयरी संचालक उम्मेद पुत्र खचेडू से दूध का नमूना लिया गया था, जो जांच में फेल हो गया था। तभी से मामला एसीजेएम कोर्ट में चल रहा था। ऐसे मामलों में विभाग की और से पैरवी की जा रही थी। जिसके बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया है। हापुड़ के जिला बनने के बाद किसी मिलावट खोर के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है। ऐसे में विभाग के अधिकारी इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
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अगले कुछ दिनों में होगा 20 मामलों में फैसला
जिले से संबंधित एसीजेएम कोर्ट में करीब 350 वाद लंबित हैं, इनमे करीब 200 पिछले चार सालों में दर्ज किए गए हैं। अभिहित अधिकारी ने बताया कि मिलावट के मामलों में पिछले कुछ दिनों में पैरवी तेज होने के कारण अगले कुछ दिनों में 20 मामलों में फैसला आने की पूरी उम्मीद है। इनमें अधिकतर मामले दूध की ही मिलावट के हैं।
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तीन साल में बढ़ा मिलावट का खेल
जिले में मिलावट का खेल लोगों को बीमार बना रहा है। पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की ओर से 822 नमूने लिए गए। जिनमें से 360 नमूने फेल हो गए। हालांकि विभाग ने मिलावट खोरों पर एक करोड़ से भी ऊपर जुर्माना लगाया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले भर से 292 नमूने जांच के लिए लैब भेजे। जिनमें 125 फेल गए। जिनमें से 57 अधोमानक पाए गए और 42 असुरक्षित मिले। 26 मामलों में नियमों का उल्लंघन मिला था। विभाग की ओर से 114 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। इनमें से 88 पर फैसला आया। जिस पर कोर्ट ने 42.19 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में 233 नमूने लिए गए। जिसमें से 119 फेल हुए। इनमें से 59 अधोमानक, 33 असुरक्षित, 23 मिसब्रांड व चार मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया। 83 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। जिसके सापेक्ष 74 मामलों में फैसला सुनाया गया। जिसमें जुर्माने के तौर पर 31.26 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 297 नमूने लिए गए थे। जिनमें से 116 फेल हो गए थे। कुल फेल हुए नमूनों में 47 अधोमानक, 35 असुरक्षित, 32 मित्याछाप ब्रांड और मामलों में नियम उल्लंघन पाया गया है। 79 वाद एडीएम कोर्ट में दायर किए गए। इसके सापेक्ष 78 वादों का निस्तारण करते हुए 47.37 लाख का जुर्माना लगाया गया। पिछले तीन सालों में दूध खोया पनीर, घर, मावे से बनी मिठाईयां सरसों का तेल, रिफाइंड, मसाले, दाल, नमकीन, आदि शामिल हैं। संवाद