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ग्राम पंचायतों को देना होगा विकास कार्यों का हिसाब
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ग्राम पंचायतों को देना होगा विकास कार्यों का हिसाब
हापुड़। गांवों में सरकार की योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त करने व योजना राशि का सही इस्तेमाल करने के उद्देश्य से शासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम प्रधानों को गांवों में होने वाले विकास कार्यों में खर्च हुई धनराशि का हिसाब अब पंचायती राज विभाग की वेबसाइट पर दर्ज कराना होता है। अभी तक ग्राम प्रधानों द्वारा विवरण ब्लॉक, निजी स्तर या जनसेवा केंद्र से अंकित कराती हैं। लेकिन अब शासन ने व्यवस्था में बदलाव कर दिया है।
वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए आबादी के अनुसार बजट मिलता है। वित्तीय वर्ष की आवंटित रकम करोड़ों में होती है। अभी तक ग्राम पंचायत ब्लॉक के अलावा जनसेवा केंद्रों से विवरण अपलोड करा सकती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
निजी कंप्यूटर या जनसेवा केंद्र पर दर्ज किए गए विवरण में शासन को विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं मिल रही थीं। डीपीआरओ विरेंद्र सिंह ने बताया कि शासन ने कार्य योजनाओं का विवरण अपलोड करने की प्रक्रिया बदल दी है। पंचायतों को केवल ग्राम सचिवालय के कंप्यूटर से ही विवरण अपलोड करना है। यदि विवरण ब्लॉक या किसी अन्य एजेंसी से अपलोड कराया जाता है तो वह पकड़ में आता है तो उसी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व सचिव की होगी और मान्य नहीं होगा।
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उन्होंने बताया कि हर पंचायत में ग्राम सचिवालय है। सचिवालय आधुनिक सुविधाए जैसे कंप्यूटर, वाईफाई आदि सुसज्जित हैं। पंचायतों में पंचायत सहायक नियुक्त हैं। पंचायत सहायक को पंचायत के कार्य योजना व विवरण अपलोड करना है। इसे अपलोड कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की है। अब इसे अपलोड कराने के लिए ब्लॉक के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।
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हापुड़। गांवों में सरकार की योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त करने व योजना राशि का सही इस्तेमाल करने के उद्देश्य से शासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम प्रधानों को गांवों में होने वाले विकास कार्यों में खर्च हुई धनराशि का हिसाब अब पंचायती राज विभाग की वेबसाइट पर दर्ज कराना होता है। अभी तक ग्राम प्रधानों द्वारा विवरण ब्लॉक, निजी स्तर या जनसेवा केंद्र से अंकित कराती हैं। लेकिन अब शासन ने व्यवस्था में बदलाव कर दिया है।
वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए आबादी के अनुसार बजट मिलता है। वित्तीय वर्ष की आवंटित रकम करोड़ों में होती है। अभी तक ग्राम पंचायत ब्लॉक के अलावा जनसेवा केंद्रों से विवरण अपलोड करा सकती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
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निजी कंप्यूटर या जनसेवा केंद्र पर दर्ज किए गए विवरण में शासन को विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं मिल रही थीं। डीपीआरओ विरेंद्र सिंह ने बताया कि शासन ने कार्य योजनाओं का विवरण अपलोड करने की प्रक्रिया बदल दी है। पंचायतों को केवल ग्राम सचिवालय के कंप्यूटर से ही विवरण अपलोड करना है। यदि विवरण ब्लॉक या किसी अन्य एजेंसी से अपलोड कराया जाता है तो वह पकड़ में आता है तो उसी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व सचिव की होगी और मान्य नहीं होगा।
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उन्होंने बताया कि हर पंचायत में ग्राम सचिवालय है। सचिवालय आधुनिक सुविधाए जैसे कंप्यूटर, वाईफाई आदि सुसज्जित हैं। पंचायतों में पंचायत सहायक नियुक्त हैं। पंचायत सहायक को पंचायत के कार्य योजना व विवरण अपलोड करना है। इसे अपलोड कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की है। अब इसे अपलोड कराने के लिए ब्लॉक के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।