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मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे एसडीएम, नहीं पहचान पाए चिकित्सक
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शुक्रवार को गढ़ रोड सीएचसी में पर्चा बनवाने के लिये लाइन में लगे एसडीएम दिग्विजय सिंह । संवाद
- फोटो : HAPUR
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मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे एसडीएम, नहीं पहचान सके चिकित्सक
हापुड़। गढ़ रोड सीएचसी से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजे जाने की सूचना पर शुक्रवार को एसडीएम सदर मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे। कतार में लगकर पर्चा बनवाया, इसके बाद चिकित्सक से परामर्श लिया। लेकिन चिकित्सक उन्हें पहचान तक नहीं सके, बाद में सीएचसी अधीक्षक को मौके पर बुलाया तो अफरा तफरी मच गई। अधीक्षक से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
एसडीएम सदर दिग्विजय सिंह शुक्रवार को बाइक से गढ़ रोड सीएचसी पहुंचे। बिना किसी को बताए वह पर्चा काउंटर के बाहर लाइन में लग गए, करीब 15 मिनट तक लाइन में लगे रहने के बाद उनका नंबर आया, दस रुपये देकर पर्चा बनवाया। पर्चा काउंटर से 9 रुपये वापस दिए गए, एसडीएम ने कोविड जांच के बारे में पूछा, जिसका जवाब दिया गया।
इसके बाद एसडीएम अस्पताल के अंदर पहुंचे, जहां चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए कतार में लग गए। चिकित्सक डॉ अशरफ अली ने आराम से एसडीएम को परामर्श दिया, लेकिन एसडीएम को पहचान नहीं पाए। पूरी हकीकत जानने के बाद एसडीएम ने सीएचसी अधीक्षक को फोन किया, इससे अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल बन गया।
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सीएचसी अधीक्षक से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजे जाने के मामले को लेकर जवाब तलब किया। साथ ही रिपोर्ट बनाकर प्रेषित करने के आदेश दिए। उनके जाने के बाद भी अस्पताल में अफरा तफरी मची रही।
एसडीएम दिग्विजय सिंह ने बताया कि मरीजों को उपचार देना चिकित्सकों की जिम्मेदारी है। सरकारी अस्पताल से किसी मरीज को बिना उपचार नहीं लौटाया जाए, आगे भी इस तरह के निरीक्षण जारी रहेंगे।
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हापुड़। गढ़ रोड सीएचसी से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजे जाने की सूचना पर शुक्रवार को एसडीएम सदर मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे। कतार में लगकर पर्चा बनवाया, इसके बाद चिकित्सक से परामर्श लिया। लेकिन चिकित्सक उन्हें पहचान तक नहीं सके, बाद में सीएचसी अधीक्षक को मौके पर बुलाया तो अफरा तफरी मच गई। अधीक्षक से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
एसडीएम सदर दिग्विजय सिंह शुक्रवार को बाइक से गढ़ रोड सीएचसी पहुंचे। बिना किसी को बताए वह पर्चा काउंटर के बाहर लाइन में लग गए, करीब 15 मिनट तक लाइन में लगे रहने के बाद उनका नंबर आया, दस रुपये देकर पर्चा बनवाया। पर्चा काउंटर से 9 रुपये वापस दिए गए, एसडीएम ने कोविड जांच के बारे में पूछा, जिसका जवाब दिया गया।
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इसके बाद एसडीएम अस्पताल के अंदर पहुंचे, जहां चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए कतार में लग गए। चिकित्सक डॉ अशरफ अली ने आराम से एसडीएम को परामर्श दिया, लेकिन एसडीएम को पहचान नहीं पाए। पूरी हकीकत जानने के बाद एसडीएम ने सीएचसी अधीक्षक को फोन किया, इससे अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल बन गया।
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सीएचसी अधीक्षक से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजे जाने के मामले को लेकर जवाब तलब किया। साथ ही रिपोर्ट बनाकर प्रेषित करने के आदेश दिए। उनके जाने के बाद भी अस्पताल में अफरा तफरी मची रही।
एसडीएम दिग्विजय सिंह ने बताया कि मरीजों को उपचार देना चिकित्सकों की जिम्मेदारी है। सरकारी अस्पताल से किसी मरीज को बिना उपचार नहीं लौटाया जाए, आगे भी इस तरह के निरीक्षण जारी रहेंगे।