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भतीजे की हत्या में चाची और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास
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भतीजे की हत्या में चाची और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास
हापुड़। थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गांव रसूलपुर बहलोलपुर में एक जुलाई 2017 को गोली मारकर भतीजे की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी चाची और उसके प्रेमी को दोषी करार दिया है। दोषियों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) कृष्णकांत गुप्ता ने बताया कि एक जुलाई 2017 को गांव रसूलपुर बहलोलपुर निवासी शैलेश सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसका तहेरा भाई सोनू उर्फ विनय अपने मकान की दूसरी मंजिल पर बैठा हुआ था। तभी अचानक संदिग्ध परिस्थिति में गोली लगने से वह घायल हो गया था। मेरठ के एक अस्पताल में उपचार के दौरान सोनू ने दम तोड़ दिया था। तहरीर के आधार पर पुलिस ने सोनू की चाची रेनू और गांव निवासी हरवंत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
रेनू के पति विजयवीर की वर्ष 2016 में मौत हो गई थी। पुलिस जांच में पता चला कि रेनू का गांव के ही हरवंत से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हरवंत अक्सर रेनू के घर पर आता जाता था। जिसका सोनू उर्फ विनय द्वारा विरोध किया जाता था। अवैध संबंधों में बाधक बनने पर उसे रास्ते से हटाने के लिए रेनू ने प्रेमी हरवंत के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रेनू की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल भी बरामद की थी। मामले में जिला न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा दोनों पर 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया गया।
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हापुड़। थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गांव रसूलपुर बहलोलपुर में एक जुलाई 2017 को गोली मारकर भतीजे की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी चाची और उसके प्रेमी को दोषी करार दिया है। दोषियों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) कृष्णकांत गुप्ता ने बताया कि एक जुलाई 2017 को गांव रसूलपुर बहलोलपुर निवासी शैलेश सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसका तहेरा भाई सोनू उर्फ विनय अपने मकान की दूसरी मंजिल पर बैठा हुआ था। तभी अचानक संदिग्ध परिस्थिति में गोली लगने से वह घायल हो गया था। मेरठ के एक अस्पताल में उपचार के दौरान सोनू ने दम तोड़ दिया था। तहरीर के आधार पर पुलिस ने सोनू की चाची रेनू और गांव निवासी हरवंत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
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रेनू के पति विजयवीर की वर्ष 2016 में मौत हो गई थी। पुलिस जांच में पता चला कि रेनू का गांव के ही हरवंत से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हरवंत अक्सर रेनू के घर पर आता जाता था। जिसका सोनू उर्फ विनय द्वारा विरोध किया जाता था। अवैध संबंधों में बाधक बनने पर उसे रास्ते से हटाने के लिए रेनू ने प्रेमी हरवंत के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रेनू की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल भी बरामद की थी। मामले में जिला न्यायाधीश बृजेंद्र मणि त्रिपाठी ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा दोनों पर 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड भी लगाया गया।
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