{"_id":"62224a5bed57b807c0772557","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd2349335118","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाहनों की धुलाई से रोजाना बर्बाद हो रहा छह लाख लीटर पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाहनों की धुलाई से रोजाना बर्बाद हो रहा छह लाख लीटर पानी
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वाहनों की धुलाई से रोजाना बर्बाद हो रहा छह लाख लीटर पानी
हापुड़। वाहन धुलाई केंद्रों पर पानी की जमकर बर्बादी हो रही है। जिले भर में 110 से अधिक वाहन धुलाई केंद्र (डग) भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। वाहनों की धुलाई में प्रतिदिन छह लाख लीटर से अधिक पेयजल बर्बाद हो रहा है। जबकि, यहां के तीन ब्लॉक अति जल दोहन की श्रेणी के कारण आकर डार्क जोन में शामिल हैं। सिंभावली ब्लॉक में पानी का स्तर 16 मीटर से भी नीचे पहुंच गया है, जो सर्वाधिक है।
वर्ष 2016 में भूगर्भ विभाग ने जिले के चारों ब्लॉक का सर्वे किया था, इसमें जलस्तर तेजी से गिरता मिला। गढ़, सिंभावली और हापुड़ ब्लॉक में हालत सबसे खराब दिखी तो इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर दिया गया। नए नलकूप कनेक्शन पर रोक लगा दी गई, जो वर्ष 2020 में फिर से खोली गई।
वर्ष 2019 में भूगर्भ अधिनियम जारी हुआ, इसमें बिना अनुमति के घर या किसी अन्य स्थान पर सबमर्सिबल लगाने के लिए लघु सिंचाई विभाग से अनुमति लेने के आदेश हुए। अनुमति नहीं लेने पर बोरिंग रद्द करने का भी आदेश था।
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लेकिन जिले के अंदर 110 से अधिक डग लगा दिए गए, इनके बोरिंग के लिए कोई आवेदन लघु सिंचाई विभाग में नहीं आया। इन दिनों डग पर सुबह से लेकर शाम तक वाहनों की लाइन लगी रहती हैं, दिलचस्प बात यह है कि वाहन धुलाई में लगने वाला पानी भूगर्भ से ही निकाला जाता है और धुलाई के बाद पानी को संचयन करने के बजाए ऐसे ही बहा दिया जाता है।
इस तरह हो रही पानी की बर्बादी
एक कार को धोने में 200 लीटर से अधिक पानी लगता है, जबकि बड़े वाहनों में एक हजार लीटर तक पानी प्रयोग कर लिया जाता है। प्रत्येक डग पर रोजाना 20-25 गाड़ी और 5 से 10 बड़े वाहनों की धुलाई की जाती है। इसमें प्रतिदिन वाहनों की धुलाई पर 6 लाख लीटर से अधिक पानी की बर्बादी होती है।
सिर्फ धौलाना ब्लॉक डार्क जोन से बाहर
जिले के चार ब्लॉक में हापुड़, सिंभावली और गढ़ डार्क जोन में हैं, इनमें सबसे अधिक जलस्तर सिंभावली ब्लॉक का गिरा है। जबकि धौलाना ब्लॉक ही इस संकट से बचा है, यहां जल का स्तर 8.22 मीटर तक है।
पालिका, जिला पंचायत नहीं दे रहे ध्यान
नगर पालिका और जिला पंचायत क्षेत्र में ही डग खुले हुए हैं। लेकिन दोनों विभागों में कोई भी इन पर ध्यान नहीं देता। यही कारण है कि गांवों के अड्डों से लेकर शहरी क्षेत्र की गली मोहल्लों में इन्हें धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
भूगर्भ जलस्तर को प्रभावित करने वाले कारक
* घरों में लगे सबमर्सिबल से जल दोहन।
* धुलाई केंद्रों पर वाहनों की धुलाई में जल दोहन।
* अत्यधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए नलकूपों द्वारा जल दोहन।
* शहर, देहात में सिमटते तालाब और अतिक्रमण।
* बारिश के पानी का संचयन न होना।
जिले के चारों ब्लॉकों में भूगर्भ जल का स्तर
ब्लॉक जलस्तर
सिंभावली 16.10 मीटर
हापुड़ 14.08 मीटर
गढ़मुक्तेश्वर 12.87 मीटर
धौलाना 8.22 मीटर।
(नोट : धौलाना ब्लॉक ही डार्क जोन से बाहर है।)
किसी डग ने नहीं ली बोरिंग की अनुमति
जिले में संचालित वाहन धुलाई केंद्रों ने विभाग से बोरिंग संबंधी अनुमति नहीं ली है। बिना अनुमति बोरिंग करना अध्यादेश का उल्लंघन है। अभियान चलाकर जल दोहन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।--शेर सिंह, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग।
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हापुड़। वाहन धुलाई केंद्रों पर पानी की जमकर बर्बादी हो रही है। जिले भर में 110 से अधिक वाहन धुलाई केंद्र (डग) भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। वाहनों की धुलाई में प्रतिदिन छह लाख लीटर से अधिक पेयजल बर्बाद हो रहा है। जबकि, यहां के तीन ब्लॉक अति जल दोहन की श्रेणी के कारण आकर डार्क जोन में शामिल हैं। सिंभावली ब्लॉक में पानी का स्तर 16 मीटर से भी नीचे पहुंच गया है, जो सर्वाधिक है।
वर्ष 2016 में भूगर्भ विभाग ने जिले के चारों ब्लॉक का सर्वे किया था, इसमें जलस्तर तेजी से गिरता मिला। गढ़, सिंभावली और हापुड़ ब्लॉक में हालत सबसे खराब दिखी तो इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर दिया गया। नए नलकूप कनेक्शन पर रोक लगा दी गई, जो वर्ष 2020 में फिर से खोली गई।
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वर्ष 2019 में भूगर्भ अधिनियम जारी हुआ, इसमें बिना अनुमति के घर या किसी अन्य स्थान पर सबमर्सिबल लगाने के लिए लघु सिंचाई विभाग से अनुमति लेने के आदेश हुए। अनुमति नहीं लेने पर बोरिंग रद्द करने का भी आदेश था।
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लेकिन जिले के अंदर 110 से अधिक डग लगा दिए गए, इनके बोरिंग के लिए कोई आवेदन लघु सिंचाई विभाग में नहीं आया। इन दिनों डग पर सुबह से लेकर शाम तक वाहनों की लाइन लगी रहती हैं, दिलचस्प बात यह है कि वाहन धुलाई में लगने वाला पानी भूगर्भ से ही निकाला जाता है और धुलाई के बाद पानी को संचयन करने के बजाए ऐसे ही बहा दिया जाता है।
इस तरह हो रही पानी की बर्बादी
एक कार को धोने में 200 लीटर से अधिक पानी लगता है, जबकि बड़े वाहनों में एक हजार लीटर तक पानी प्रयोग कर लिया जाता है। प्रत्येक डग पर रोजाना 20-25 गाड़ी और 5 से 10 बड़े वाहनों की धुलाई की जाती है। इसमें प्रतिदिन वाहनों की धुलाई पर 6 लाख लीटर से अधिक पानी की बर्बादी होती है।
सिर्फ धौलाना ब्लॉक डार्क जोन से बाहर
जिले के चार ब्लॉक में हापुड़, सिंभावली और गढ़ डार्क जोन में हैं, इनमें सबसे अधिक जलस्तर सिंभावली ब्लॉक का गिरा है। जबकि धौलाना ब्लॉक ही इस संकट से बचा है, यहां जल का स्तर 8.22 मीटर तक है।
पालिका, जिला पंचायत नहीं दे रहे ध्यान
नगर पालिका और जिला पंचायत क्षेत्र में ही डग खुले हुए हैं। लेकिन दोनों विभागों में कोई भी इन पर ध्यान नहीं देता। यही कारण है कि गांवों के अड्डों से लेकर शहरी क्षेत्र की गली मोहल्लों में इन्हें धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
भूगर्भ जलस्तर को प्रभावित करने वाले कारक
* घरों में लगे सबमर्सिबल से जल दोहन।
* धुलाई केंद्रों पर वाहनों की धुलाई में जल दोहन।
* अत्यधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए नलकूपों द्वारा जल दोहन।
* शहर, देहात में सिमटते तालाब और अतिक्रमण।
* बारिश के पानी का संचयन न होना।
जिले के चारों ब्लॉकों में भूगर्भ जल का स्तर
ब्लॉक जलस्तर
सिंभावली 16.10 मीटर
हापुड़ 14.08 मीटर
गढ़मुक्तेश्वर 12.87 मीटर
धौलाना 8.22 मीटर।
(नोट : धौलाना ब्लॉक ही डार्क जोन से बाहर है।)
किसी डग ने नहीं ली बोरिंग की अनुमति
जिले में संचालित वाहन धुलाई केंद्रों ने विभाग से बोरिंग संबंधी अनुमति नहीं ली है। बिना अनुमति बोरिंग करना अध्यादेश का उल्लंघन है। अभियान चलाकर जल दोहन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।--शेर सिंह, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग।

बुलंदशहर रोड स्थित गाड़ी धोने के डक पर पानी की बर्बादी करते युवक संवाद- फोटो : HAPUR

ुलंदशहर रोड स्थित गाड़ी धोने के डक पर पानी से गाड़ी धोते व्यक्ति संवाद- फोटो : HAPUR

बुलंदशहर रोड स्थित डक पर पानी से गाड़ी धोते युवक संवाद- फोटो : HAPUR