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दो साल का रिकॉर्ड खोलेगा गड़बड़ी की परत
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दो साल का रिकॉर्ड खोलेगा गड़बड़ी की परत
हापुड़। केंद्रीय विद्यालय बाबूगढ़ को गलत तरीके से जारी किए गए बिल के मामले में 2013-14 का रिकॉर्ड गड़बड़ी की परतें खोलेगा। अब मीटर और डिवीजन विभाग के अधिकारी खामियां तलाशने में जुटे हैं। इस मामले में 8 एक्सईएन समेत 25 अधिकारियों को नोटिस भेजने के बाद संबंधित अधिकारी भी पत्राचार के जरिए रिकॉर्ड जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 से वर्ष 2018 तक केंद्रीय विद्यालय को गलत तरीके से बिल जारी किया गया। क्वार्टर में रह रहा स्टाफ बिल के अनुसार भुगतान कर रहा था। लेकिन अचानक आठ लाख का बिल दिए जाने के बाद स्टाफ ने इसे चुकाने से साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं स्टाफ ने क्वार्टर तक छोड़ दिए।
बिल में गड़बड़ी का यह प्रकरण अधिकारियों की गले की फांस बन गया है। क्योंकि उच्चाधिकारियों को भी इसमें काफी फजीहत झेलनी पड़ी है, जिसके चलते नोटिस जारी हुए हैं। अब सवाल यह है कि किस स्तर पर यह गड़बड़ी हुई। क्योंकि बिल बनाने के लिए आवश्यक रिकॉर्ड मीटर विभाग के साथ साथ डिवीजन विभाग में भी होता है। सालों तक यह गड़बड़ी चलती रही और किसी अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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इस तरह के अन्य मामले और भी हो सकते हैं, बहरहाल अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए उस समय का रिकॉर्ड मांग रहे हैं। मुख्यत वर्ष 2013-14 तक का रिकॉर्ड अहम बताया जा रहा है। मीटर और डिवीजन विभागीय अधिकारी भी अपने स्तर से बिल गड़बड़ी की खामियों को तलाश रहे हैं।
प्रकरण की हो रही जांच-
बिल गड़बड़ी के प्रकरण की जांच की जा रही है, नोटिस जारी किए जाने के बाद से अभी तक किसी का जवाब दाखिल नहीं हुआ है। किस स्तर पर गलती हुई यह भी पता किया जा रहा है।--मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता।
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हापुड़। केंद्रीय विद्यालय बाबूगढ़ को गलत तरीके से जारी किए गए बिल के मामले में 2013-14 का रिकॉर्ड गड़बड़ी की परतें खोलेगा। अब मीटर और डिवीजन विभाग के अधिकारी खामियां तलाशने में जुटे हैं। इस मामले में 8 एक्सईएन समेत 25 अधिकारियों को नोटिस भेजने के बाद संबंधित अधिकारी भी पत्राचार के जरिए रिकॉर्ड जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 से वर्ष 2018 तक केंद्रीय विद्यालय को गलत तरीके से बिल जारी किया गया। क्वार्टर में रह रहा स्टाफ बिल के अनुसार भुगतान कर रहा था। लेकिन अचानक आठ लाख का बिल दिए जाने के बाद स्टाफ ने इसे चुकाने से साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं स्टाफ ने क्वार्टर तक छोड़ दिए।
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बिल में गड़बड़ी का यह प्रकरण अधिकारियों की गले की फांस बन गया है। क्योंकि उच्चाधिकारियों को भी इसमें काफी फजीहत झेलनी पड़ी है, जिसके चलते नोटिस जारी हुए हैं। अब सवाल यह है कि किस स्तर पर यह गड़बड़ी हुई। क्योंकि बिल बनाने के लिए आवश्यक रिकॉर्ड मीटर विभाग के साथ साथ डिवीजन विभाग में भी होता है। सालों तक यह गड़बड़ी चलती रही और किसी अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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इस तरह के अन्य मामले और भी हो सकते हैं, बहरहाल अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए उस समय का रिकॉर्ड मांग रहे हैं। मुख्यत वर्ष 2013-14 तक का रिकॉर्ड अहम बताया जा रहा है। मीटर और डिवीजन विभागीय अधिकारी भी अपने स्तर से बिल गड़बड़ी की खामियों को तलाश रहे हैं।
प्रकरण की हो रही जांच-
बिल गड़बड़ी के प्रकरण की जांच की जा रही है, नोटिस जारी किए जाने के बाद से अभी तक किसी का जवाब दाखिल नहीं हुआ है। किस स्तर पर गलती हुई यह भी पता किया जा रहा है।--मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता।