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गंगा एक्सप्रेसवे : जिले में 29 एकड़ भूमि का नहीं हुआ बैनामा
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गंगा एक्सप्रेसवे का अटका अधिग्रहण, 29 एकड़ भूमि का नहीं हुआ बैनामा
हापुड़। मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि का अधिग्रहण पिछले दो महीने से अटका हुआ है। अभी तक केवल 93 प्रतिशत जमीन का ही अधिग्रहण हुआ है। लगभग 29 एकड़ भूमि पर मुआवजा संबंधी मांगों के कारण अधिग्रहण में देरी हो रही है। हालांकि किसानों को मनाने के लिए अब कमेटी गठित की गई है।
मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर डांडू गांव तक बनने वाला गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। गंगा एक्सप्रेसवे में हापुड़ के 29 गांवों को शामिल किया गया है। हापुड़ जिले के गांवों से लगभग 93 फीसदी भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। जबकि बाकी भूमि के लिए किसानों को मनाना प्रशासन के लिए सिरदर्द बना है। किसान करीब 29 एकड़ भूमि को देने के लिए तैयार नहीं हैं। अधिकतर का कहना है कि उन्हें स्थानीय सर्किल रेटों के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इन किसानों को मनाने के लिए सामाजिक सभाकार आकंलन समिति गठित करके शासन ने भेजा था। यह समिति किसानों से वार्ता कर बैनामा कराने का प्रयास कर रही है। फिलहाल कुछ किसानों के बैनामे शुरू हुए हैं। लेकिन यदि बात नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में समिति सर्वे रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी।
शासन स्तर पर जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास करने की तैयारी है, ऐसे में अधिकारी इसके लिए भूमि को जल्द से जल्द निस्तारित कर लेना चाहते हैं।
कोट-
एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन का कहना है कि करीब सात प्रतिशत जमीन का बैनामा नहीं हुआ है जिसमें लगभग पांच प्रतिशत जमीन ऐसी है जिनके किसानों की मुआवजे संबंधी अल-अलग मांगे हैं। तहसील स्तर पर कमेटी काम कर रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद जो बैनामा नहीं करा रहे हैं उनकी जमीन को अधिग्रहण करने के बाद उनका पैसा एडीएम एलए को भेज दिया जाएगा।
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प्रधानमंत्री 18 को करेंगे शिलान्यास -
इस परियोजना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 18 दिसंबर को शिलान्यास करना है। इसके बाद एक्सप्रेस निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। अधिकारियों की मंशा थी कि इस तिथि से पहले पूरी भूमि का अधिग्रहण कर लिया जाए। लेकिन इस मामले में पेच अटकने के बाद अब प्रशासन ने इसके निस्तारण में तेजी से जुट गया है।
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हापुड़। मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि का अधिग्रहण पिछले दो महीने से अटका हुआ है। अभी तक केवल 93 प्रतिशत जमीन का ही अधिग्रहण हुआ है। लगभग 29 एकड़ भूमि पर मुआवजा संबंधी मांगों के कारण अधिग्रहण में देरी हो रही है। हालांकि किसानों को मनाने के लिए अब कमेटी गठित की गई है।
मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर डांडू गांव तक बनने वाला गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। गंगा एक्सप्रेसवे में हापुड़ के 29 गांवों को शामिल किया गया है। हापुड़ जिले के गांवों से लगभग 93 फीसदी भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। जबकि बाकी भूमि के लिए किसानों को मनाना प्रशासन के लिए सिरदर्द बना है। किसान करीब 29 एकड़ भूमि को देने के लिए तैयार नहीं हैं। अधिकतर का कहना है कि उन्हें स्थानीय सर्किल रेटों के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इन किसानों को मनाने के लिए सामाजिक सभाकार आकंलन समिति गठित करके शासन ने भेजा था। यह समिति किसानों से वार्ता कर बैनामा कराने का प्रयास कर रही है। फिलहाल कुछ किसानों के बैनामे शुरू हुए हैं। लेकिन यदि बात नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में समिति सर्वे रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी।
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शासन स्तर पर जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास करने की तैयारी है, ऐसे में अधिकारी इसके लिए भूमि को जल्द से जल्द निस्तारित कर लेना चाहते हैं।
कोट-
एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन का कहना है कि करीब सात प्रतिशत जमीन का बैनामा नहीं हुआ है जिसमें लगभग पांच प्रतिशत जमीन ऐसी है जिनके किसानों की मुआवजे संबंधी अल-अलग मांगे हैं। तहसील स्तर पर कमेटी काम कर रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद जो बैनामा नहीं करा रहे हैं उनकी जमीन को अधिग्रहण करने के बाद उनका पैसा एडीएम एलए को भेज दिया जाएगा।
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प्रधानमंत्री 18 को करेंगे शिलान्यास -
इस परियोजना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 18 दिसंबर को शिलान्यास करना है। इसके बाद एक्सप्रेस निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। अधिकारियों की मंशा थी कि इस तिथि से पहले पूरी भूमि का अधिग्रहण कर लिया जाए। लेकिन इस मामले में पेच अटकने के बाद अब प्रशासन ने इसके निस्तारण में तेजी से जुट गया है।