फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   hapur news

बढ़ेगा डाल्फिन का कुनबा, गढ़ गंगा क्षेत्र में 50 से अधिक की उम्मीद

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 11:36 PM IST
विज्ञापन
hapur news
बढ़ा डाल्फिन का कुनबा, गढ़ गंगा क्षेत्र में 50 से अधिक की उम्मीद
विज्ञापन

-विश्व प्रकृति निधि, वन्य जीव संस्थान एवं वन विभाग की ओर से चलाया जा रहा अभियान
-वर्तमान में ब्रजघाट क्षेत्र में कुल 41 डाल्फिन हैं मौजूद, इनकी संख्या के बढने की उम्मीद है
-नितिन दीक्षित-
हापुड़। इस बार गंगा में डाल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद है। जागरूकता और सरकार की पहल के बाद डाल्फिन की संख्या 50 के पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। लॉक डाउन के दौरान गंगा में डाल्फिन के कुछ बच्चे भी देखे गए थे। मंगलवार को विश्व प्रकृति निधि, वन्य जीव संस्थान एवं वन विभाग की टीम गंगा में इनकी गणना करेगी।
पिछले कुछ सालों में गंगा में जलीय जीवों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए डाल्फिन, घड़ियाल और कछुओं को छोड़ा गया था। पिछले वर्ष तक हुई गणना में गंगा में डाल्फिन की संख्या 41 थी। इसके बाद लगातार इस क्षेत्र में निगरानी की जा रही है। पिछले लॉकडाउन में गंगा का पानी पहले से काफी साफ हो गया था। गंगा का पानी साफ हुआ था तो इसमें डाल्फिन के अठखेलियां खेलने का सिलसिला तेज हुआ था। इस दौरान विशेषज्ञों ने गंगा में डाल्फिन के कई बच्चों को देखा था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार गंगा में डाल्फिन की संख्या 41 से बढ़कर 50 या इसके आसपास पहुंच सकती है।
विज्ञापन

--
28 से बढ़कर 41 हुई डॉल्फिनों की संख्या
पर्यावरणविद व डॉल्फिन गार्जियन भारतभूषण गर्ग ने बताया है कि वर्ष 2018 में बिजनौर से लेकर नरौरा तक रामसर साइट में 28 डॉल्फिन मौजूद थीं। वर्ष 2019 में बढ़कर 32 और 2020 में हुई गणना में 41 तक गिनती पहुंच गई। घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए नौ से 12 फीट पानी नदी में होना चाहिए। जल कम होने पर यह जीव गहरे जल की तरफ को प्रस्थान कर जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डाल्फिन के लिए उचित है गंगा का पानी
वर्तमान में गंगा में डीओ की मात्रा 9.10 मिलीग्राम प्रति लीटर, बीओडी की मात्रा 1.00 मिलीग्राम प्रति लीटर, टोटल कालिफार्म 430 व फीकल कालिफार्म 150 एमपीएन प्रति 100 एमएल के आसपास है। इस प्रकार गंगा का जल वर्तमान में बी श्रेणी में है। पिछले कुछ सालों से गंगा में प्रदूषण कम हुआ है। इसका असर रामसर साइट पर भी दिख रहा है। इसी साइट पर सबसे अधिक डाल्फिन मिलती हैं। यह साफ और शुद्ध जल में निवास और प्रजनन करती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि जहां डॉल्फिन होती है, वहां का पानी बिनी किसी टेस्टिंग के पीने योग्य होता है।
---
--
घड़ियालों की भी संख्या बढ़ी -
घड़ियाल को गंगा की सफाई का चौकीदार कहा जाता है। इनकी भी गणना नहीं की जाती है, लेकिन गढ़ क्षेत्र में पिछले दिनों 10 से 15 घड़ियाल देखने को मिले हैं और इनकी भी संख्या अब तेजी से बढ़ रही है।

---
मंगलवार को बोट से पहुंचेगी यहां टीम -
प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी शाहनवाज खान ने बताया कि बिजनौर बैराज से यह गणना शुरू की जा चुकी है। गणना करने वाली टीम दो बोट में सवार होगी। मंगलवार को तकनीकी यंत्रों से लैस होकर टीमें ब्रजघाट पहुंच जाएंगी। दो हिस्सों में गणना की जा रही है, जिसमें पहली टीम बिजनौर से कानपुर तक करीब सात सौ किलोमीटर तक गणना करेगी। जबकि दूसरी टीम कानपुर से प्रयागराज तक 350 किलोमीटर दूरी में गणना करेगी। चार से 21 दिसंबर तक यह अभियान चलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed