{"_id":"61a90883c5488861ae7ad5cb","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd230360248","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में आ गए गांव, स्कूल न अस्पताल, सड़कें जर्जर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में आ गए गांव, स्कूल न अस्पताल, सड़कें जर्जर
विज्ञापन
गांव दस्तोई को जाने वाले रास्ते की टूटी सड़क होने के कारण सड़क पर भरा पानी। संवाद
- फोटो : HAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर बढ़ा, सुविधाएं नहीं....
शहर में आ गए गांव, स्कूल न अस्पताल, सड़कें जर्जर
हापुड़। हापुड़ को जिला बने 11 साल बीत गए हैं, आबादी बढ़ने के साथ शहर का लगातार विस्तार हो रहा है। दर्जनों गांव शहर की सीमा में आ गए हैं। लेकिन सीमा विस्तार नहीं होने के कारण इन्हें शहरी होने का दर्जा आज तक नहीं मिला है। इन गांवों का विकास राम भरोसे हैं, टूटी सड़कें, जर्जर नालियां, जलभराव की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। कई कॉलोनियां एचपीडीए से प्रमाणित होने के बावजूद शहर, देहात के बीच फंसकर सुविधाओं की बांट जोह रही हैं।
वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने हापुड़ को जिला घोषित किया था। तीन तहसीलों में बंटे जिले की आबादी को बेहतर सुविधाओं और शहर के निकट बसें गांवों में विकास की उम्मीद जगी थी। जैसे-जैसे समय बढ़ा शहर का विस्तार होता गया। लेकिन परिसीमन नहीं होने के कारण लेकिन हालात नहीं सुधरे।
सीमा विस्तार को रखा था प्रस्ताव, नहीं मिली मंजूरी-
तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मालती भारती के कार्यकाल में बोर्ड बैठक में नगर पालिका की सीमा विस्तार का प्रस्ताव रखा गया था। जिसमें आस पास के दर्जनों गांवों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन बैठक में इस पर मुहर नहीं लग सकी। यही कारण है कि शहर की सीमा में होने के बावजूद गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
मेरठ रोड आवास विकास कॉलोनी की हालत बदतर
मेरठ रोड पर बनी आवास विकास कॉलोनी शहर की प्रमुख कॉलोनियों में से एक है। लेकिन यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं, टूटी सड़कें, उड़ती धूल समस्या का कारण बन रही हैं। इस कॉलोनी में न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही सरकारी विद्यालय की व्यवस्था है।
इन कॉलोनियों में सुविधाओं की दरकार
जरौठी रोड पर ग्रीन वैली, प्रभा विहार कॉलोनी, ग्रीन पार्क कॉलोनी हैं, सभी कॉलोनी एचपीडीए से प्रमाणित हैं, जो जरौठी गांव के क्षेत्र में आती हैं। जरौठी देहात में लगता है, नगर पालिका का परिसीमन नहीं होने के कारण इन कॉलोनियों को शहर में अब तक शामिल नहीं किया गया। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
हापुड़ शहर की सीमा में आने वाले गांव
शहर की सीमा में गांव सबली, असौड़ा, श्यामनगर, अच्छेजा, जसरूपनगर, गोयना, दस्तोई, असौड़ा, दोयमी, जरौठी, मंसूरपुर, पटना मुरादपुर।
सुनिए ग्रामीणों का दर्द
कलक्ट्रेट से सटा सबली गांव बदहाल
हमारा गांव आनंद विहार योजना और कलक्ट्रेट से सटा है। जमीनें भी अधिग्रहीत हो चुकी हैं, शहर जैसा गांव का माहौल है। फिर भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। सड़क जर्जर है, साफ सफाई की स्थिति बदतर है। --कैलाश चंद, सबली।--फोटो संख्या--09
गोयना, जसरूपनगर में जलभराव
शहरी क्षेत्र की कॉलोनियां हमारे गांव तक पहुंच गई हैं। कॉलोनियां बस रहीं हैं। लेकिन यहां जलभराव से निजात नहीं मिल रहा है। रास्तों का निर्माण तक नहीं हुआ है। जिला अस्पताल भी पास है। लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। --अंकुर, गोयना।--फोटो संख्या--10
जर्जर सड़कें जी का जंजाल
पॉश कॉलोनियों में शुमार होने के बावजूद आवास विकास में जर्जर सड़कों से लोग परेशान हैं। पार्क भी बदहाल हैं, झूले टूटे पड़े हैं। इतनी बड़ी कॉलोनी में न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही विद्यालय। - सुभाष त्यागी, आवास विकास।--फोटो संख्या--11
विज्ञापन
शहर में आ गए गांव, स्कूल न अस्पताल, सड़कें जर्जर
हापुड़। हापुड़ को जिला बने 11 साल बीत गए हैं, आबादी बढ़ने के साथ शहर का लगातार विस्तार हो रहा है। दर्जनों गांव शहर की सीमा में आ गए हैं। लेकिन सीमा विस्तार नहीं होने के कारण इन्हें शहरी होने का दर्जा आज तक नहीं मिला है। इन गांवों का विकास राम भरोसे हैं, टूटी सड़कें, जर्जर नालियां, जलभराव की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। कई कॉलोनियां एचपीडीए से प्रमाणित होने के बावजूद शहर, देहात के बीच फंसकर सुविधाओं की बांट जोह रही हैं।
वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने हापुड़ को जिला घोषित किया था। तीन तहसीलों में बंटे जिले की आबादी को बेहतर सुविधाओं और शहर के निकट बसें गांवों में विकास की उम्मीद जगी थी। जैसे-जैसे समय बढ़ा शहर का विस्तार होता गया। लेकिन परिसीमन नहीं होने के कारण लेकिन हालात नहीं सुधरे।
विज्ञापन
सीमा विस्तार को रखा था प्रस्ताव, नहीं मिली मंजूरी-
तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मालती भारती के कार्यकाल में बोर्ड बैठक में नगर पालिका की सीमा विस्तार का प्रस्ताव रखा गया था। जिसमें आस पास के दर्जनों गांवों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन बैठक में इस पर मुहर नहीं लग सकी। यही कारण है कि शहर की सीमा में होने के बावजूद गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
मेरठ रोड आवास विकास कॉलोनी की हालत बदतर
मेरठ रोड पर बनी आवास विकास कॉलोनी शहर की प्रमुख कॉलोनियों में से एक है। लेकिन यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं, टूटी सड़कें, उड़ती धूल समस्या का कारण बन रही हैं। इस कॉलोनी में न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही सरकारी विद्यालय की व्यवस्था है।
इन कॉलोनियों में सुविधाओं की दरकार
जरौठी रोड पर ग्रीन वैली, प्रभा विहार कॉलोनी, ग्रीन पार्क कॉलोनी हैं, सभी कॉलोनी एचपीडीए से प्रमाणित हैं, जो जरौठी गांव के क्षेत्र में आती हैं। जरौठी देहात में लगता है, नगर पालिका का परिसीमन नहीं होने के कारण इन कॉलोनियों को शहर में अब तक शामिल नहीं किया गया। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
हापुड़ शहर की सीमा में आने वाले गांव
शहर की सीमा में गांव सबली, असौड़ा, श्यामनगर, अच्छेजा, जसरूपनगर, गोयना, दस्तोई, असौड़ा, दोयमी, जरौठी, मंसूरपुर, पटना मुरादपुर।
सुनिए ग्रामीणों का दर्द
कलक्ट्रेट से सटा सबली गांव बदहाल
हमारा गांव आनंद विहार योजना और कलक्ट्रेट से सटा है। जमीनें भी अधिग्रहीत हो चुकी हैं, शहर जैसा गांव का माहौल है। फिर भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। सड़क जर्जर है, साफ सफाई की स्थिति बदतर है। --कैलाश चंद, सबली।--फोटो संख्या--09
गोयना, जसरूपनगर में जलभराव
शहरी क्षेत्र की कॉलोनियां हमारे गांव तक पहुंच गई हैं। कॉलोनियां बस रहीं हैं। लेकिन यहां जलभराव से निजात नहीं मिल रहा है। रास्तों का निर्माण तक नहीं हुआ है। जिला अस्पताल भी पास है। लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। --अंकुर, गोयना।--फोटो संख्या--10
जर्जर सड़कें जी का जंजाल
पॉश कॉलोनियों में शुमार होने के बावजूद आवास विकास में जर्जर सड़कों से लोग परेशान हैं। पार्क भी बदहाल हैं, झूले टूटे पड़े हैं। इतनी बड़ी कॉलोनी में न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही विद्यालय। - सुभाष त्यागी, आवास विकास।--फोटो संख्या--11

आवास विकास कालोनी में बदहाल पड़ा पार्क। संवाद- फोटो : HAPUR