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प्रदूषण से बिगड़ा अब निमोनिया, बच्चों की चलने लगी पसलियां

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:36 AM IST
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जहरीली हवा से बच्चों को निमोनिया, फेफड़ों में मिल रहे कार्बन तत्व
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हापुड़। जिले में जहरीली हवा से बच्चों का निमोनिया बिगड़ रहा है। इससे बच्चों को गले में खरास, खांसी की समस्या हो रही है वहीं सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है। पांच प्रतिशत बच्चों को भर्ती करने की नौबत बन रही है। बीते 17 दिनों में ओपीडी 200 से बढ़कर 400 तक पहुंच गई है। एक्यूआई का स्तर अभी भी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है।
दिवाली के बाद से वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। सुबह और शाम को प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। इस दौरान घर से बाहर निकलने वाले बच्चे और बुजुर्गों की सेहत बिगड़ने लगी है। कार्बन डाईआक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड के साथ ही अन्य जहरीली गैस और अति सूक्ष्म कण सांस लेने में बच्चों के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इससे सांस की नलिकाओं में संक्रमण हो रहा है और निमोनिया की समस्या होने लगी है।
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सूखी खांसी से बच्चे परेशान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश गोयल ने बताया कि धूल धुआं और कार्बन तत्वों के चलते निमोनिया बिगड़ा हुआ मिल रहा है। बच्चा जल्दी जल्दी सांस ले रहा है, पसली चल रही हैं। सूखी खांसी और सांस भी उखड़ रही है।
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उन्होंने बताया कि वायरल बुखार के मामले कम हुए हैं, लेकिन प्रदूषण से दमा और सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों की संख्या दोगुनी तक बढ़ गई है। एक्सरे कराने पर बच्चों की नली में सूजन और फेफड़ों में कार्बन तत्व मिल रहे हैं, बलगम में भी कार्बन तत्व मिले हैं।
रातभर खांसी से बच्चे परेशान
छाती में कफ जमने और नाक बहने की परेशानी के साथ ही रातभर बच्चों को खांसी उठ रही है। इससे उनकी हालत बिगड़ रही है। नींद पूरी नहीं होने के कारण चिड़चिड़ापन, भूख न लगने की परेशानी भी बच्चों को सता रही है।
ओपीडी में 50 प्रतिशत को धूल धुएं से दिक्कत
गढ़ रोड सीएचसी में रोजाना 1200 से 1300 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 50 प्रतिशत को धूल औक धूएं से दिक्कत है। सांस लेने में परेशानी, सीने में जलन, घबराहट की परेशानी सबसे ज्यादा मरीजों में है। नेत्र विभाग की प्रतिशत 120 से 150 तक ओपीडी हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल आनंद ने बताया कि आंखों में पानी आना, जलन, खुजली होना, करकराहट, धुंधला दिखने की दिक्कत के मरीज सबसे अधिक आ रहे हैं।

एक्यूआई का स्तर घटा, शुद्ध हवा अभी भी नहीं
रविवार को वाहनों का दबाव कम रहने और लोगों के घरों में रहने से एक्यूआई का स्तर 188 दर्ज किया गया, जो काफी कम रहा। लेकिन हवा की शुद्धता अभी भी बदतर ही है। इस स्तर का एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए घातक की श्रेणी में ही आता है।
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