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आधी रात तक जले पटाखे, हवा में बढ़ा जहर
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हापुड़ में छायी धुंध में ढके मकान। संवाद
- फोटो : HAPUR
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आधी रात तक जले पटाखे, हवा में बढ़ा जहर
हापुड़। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की परवाह किए बगैर जिले में हुई जबरदस्त आतिशबाजी से जिले की हवा खराब हो गई। एक्यूआई का स्तर 418 दर्ज किया गया, जबकि ध्वनि प्रदूषण भी 95 डेसीबल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। दिवाली की रात सामान्य दिनों से दो गुना अधिक ध्वनि और करीब चार गुना अधिक वायु प्रदूषण रिकॉर्ड किया गया।
एनजीटी ने प्रदूषण के स्तर को देखते हुए एनसीआर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और उनके जलाने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके अलावा पटाखे बेचने और पटाखा जलाते पकड़ने जाने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की गई। इसी के कारण प्रशासन द्वारा इस बार पटाखओं की बिक्री की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन इसके बावजूद दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई। सुबह चार बजे शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 418 दर्ज किया गया, जो बीते साल से भी अधिक रहा। अच्छी सांस लेने योग्य हवा में पीएम 10 की मात्रा सामान्यत 100 माइक्रोग्राम तक होनी चाहिए। लेकिन दिवाली के बाद अचानक 418 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक रिकॉर्ड की गई। दिवाली से पहले यह मात्रा 210 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक तक दर्ज की गई थी।
इसके अलावा सामान्य दिनों में हापुड़ में ध्वनि प्रदूषण करीब 45 डेसीबल दर्ज किया जाता है। जबकि दिवाली की रात इसका स्तर करीब दोगुना होकर 96 डेसीबल दर्ज किया गया। कुल मिलाकर हापुड़ में सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण के जो आंकड़े रहते हैं, उनमें साढ़े चार गुना प्रदूषण दर्ज किया गया।
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पिछले सालों में प्रदूषण का स्तर
वर्ष वायु प्रदूषण (एक्यूआई) ध्वनि प्रदूषण
2016 439 90 डेसीबल
2017 445 88 डेसीबल
2018 451 95 डेसीबल
2019 655 95 डेसीबल
2020 422 94 डेसीबल
तीन गुना बढ़ गया वायु प्रदूषण
जिले में आतिशबाजी की वजह से वायु प्रदूषण में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई। पर्यावरणविद् निमित कुमार ने बताया कि वातावरण में धुंधनुमा प्रदूषण की परत होती है। खतरनाक गैस और कोहरे के मिलने से धुंध बनती है। तेज हवा चलने व बारिश के बाद ही स्मॉग का असर खत्म होता है। जहां गर्मियों में वातावरण में पहुंचने वाली धुंध ऊपर की ओर उठ जाती है वहीं ठंड में ऐसा नहीं हो पाता और धुएं और धुंध का एक जहरीला मिश्रण तैयार होकर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने लगता है। धुंध कई मायनोें में स्मॉग और फॉग दोनों से ज्यादा खतरनाक है।
पाबंदी हवा में, आतिशबाजी बिक्री पर कोई कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में आतिशबाजी की बिक्री पर प्रशासन ने रोक लगा दी थी। यहां तक कि इनकी बिक्री के लिए इस बार अनुमति भी नहीं दी गई। लेकिन चोरी छिपे जिले में आतिशबाजी की जमकर बिक्री हुई। लोगों ने महंगे दामों पर खरीदारी की। देर रात तक आसमान में आतिशबाजी होती रही। पुलिस की सुस्ती और चूक के कारण ही शहर में चोरी छिपे जमकर पटाखों की बिक्री हुई। भले ही लोगों को पांच का माल दस में मिला हो लेकिन उत्साह मनाने के लिए लोगों ने जमकर पैसे खर्च किए।
देसी जुगाड़ ने हवा की बिगाड़ दी सेहत
देहात अंचल में गंधक पोटाश के मिश्रण से जमकर विस्फोट किए गए। लोगों ने लोहे का एक यंत्र बनवाया, जिसे धमाका भी कहा जाता है। गंधक, पोटाश के मिश्रण को इसमें रखकर छोड़ने से तेज आवाज के साथ ही बेहद हानिकारक धुआं निकलता है, जो पर्यावरण के लिए भी खतरा है।
सांस, नेत्र रोगियों को मुश्किल
वातावरण में छाए हानिकारक धुआं के कारण सांस और नेत्र रोगियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। दिनभर आंखों में चुभन से लोग परेशान रहे, साथ ही सांस लेेने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। आतिशबाजी के बाद से इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं।
सांस रोगी घरों के अंदर ही रहें
फिजिशियन डॉ गौरव मित्तल ने बताया कि आतिशबाजी के कारण वातावरण में धुआं छाया हुआ है, जो अस्थमा के रोगियों के लिए बेहतर खतरनाक है। सांस रोग से पीड़ित मरीज फिलहाल सुबह की सैर बंद कर दें। घरों के अंदर ही रहें तो ज्यादा अच्छा है, समय से दवाएं लेते रहें। बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।
आंखों में जलन होने पर ताजे पानी से धोएं
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल आनंद ने बताया कि वातावरण में धुआं फैलने से आंखों में जलन की समस्या बनने लगी है। इस तरह की समस्या होने पर आंखों को ताजे पानी से धोएं, बाहर निकलते समय चश्मा जरूर लगाएं। ज्यादा समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। घबराए नहीं और न ही अपनी मर्जी से दवाओं का चयन करें।
धुंध से होने वाली दिक्कतों
- खांसी, सांस लेने में तकलीफ
- आंखों में जलन, ब्रॉनकाइटिस
- दिल की बीमारी, त्वचा संबंधी बीमारी
- नाक-कान, गला, फेफड़ों में इंफेक्शन
- ब्लड प्रेशर के रोगियों के ब्रेन स्ट्रोक की समस्या
- दमा के रोगियों को अटैक का खतरा
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पिएं
- घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं
- बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी में मुंह, आंखों और नाक साफ करें
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर लें
- तुलसी, अदरक की चाय का सेवन भी फायदेमंद रहता है
- साइकिल चलाते वक्त मास्क लगाएं
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हापुड़। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की परवाह किए बगैर जिले में हुई जबरदस्त आतिशबाजी से जिले की हवा खराब हो गई। एक्यूआई का स्तर 418 दर्ज किया गया, जबकि ध्वनि प्रदूषण भी 95 डेसीबल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। दिवाली की रात सामान्य दिनों से दो गुना अधिक ध्वनि और करीब चार गुना अधिक वायु प्रदूषण रिकॉर्ड किया गया।
एनजीटी ने प्रदूषण के स्तर को देखते हुए एनसीआर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और उनके जलाने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके अलावा पटाखे बेचने और पटाखा जलाते पकड़ने जाने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की गई। इसी के कारण प्रशासन द्वारा इस बार पटाखओं की बिक्री की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन इसके बावजूद दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई। सुबह चार बजे शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 418 दर्ज किया गया, जो बीते साल से भी अधिक रहा। अच्छी सांस लेने योग्य हवा में पीएम 10 की मात्रा सामान्यत 100 माइक्रोग्राम तक होनी चाहिए। लेकिन दिवाली के बाद अचानक 418 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक रिकॉर्ड की गई। दिवाली से पहले यह मात्रा 210 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक तक दर्ज की गई थी।
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इसके अलावा सामान्य दिनों में हापुड़ में ध्वनि प्रदूषण करीब 45 डेसीबल दर्ज किया जाता है। जबकि दिवाली की रात इसका स्तर करीब दोगुना होकर 96 डेसीबल दर्ज किया गया। कुल मिलाकर हापुड़ में सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण के जो आंकड़े रहते हैं, उनमें साढ़े चार गुना प्रदूषण दर्ज किया गया।
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पिछले सालों में प्रदूषण का स्तर
वर्ष वायु प्रदूषण (एक्यूआई) ध्वनि प्रदूषण
2016 439 90 डेसीबल
2017 445 88 डेसीबल
2018 451 95 डेसीबल
2019 655 95 डेसीबल
2020 422 94 डेसीबल
तीन गुना बढ़ गया वायु प्रदूषण
जिले में आतिशबाजी की वजह से वायु प्रदूषण में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई। पर्यावरणविद् निमित कुमार ने बताया कि वातावरण में धुंधनुमा प्रदूषण की परत होती है। खतरनाक गैस और कोहरे के मिलने से धुंध बनती है। तेज हवा चलने व बारिश के बाद ही स्मॉग का असर खत्म होता है। जहां गर्मियों में वातावरण में पहुंचने वाली धुंध ऊपर की ओर उठ जाती है वहीं ठंड में ऐसा नहीं हो पाता और धुएं और धुंध का एक जहरीला मिश्रण तैयार होकर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने लगता है। धुंध कई मायनोें में स्मॉग और फॉग दोनों से ज्यादा खतरनाक है।
पाबंदी हवा में, आतिशबाजी बिक्री पर कोई कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में आतिशबाजी की बिक्री पर प्रशासन ने रोक लगा दी थी। यहां तक कि इनकी बिक्री के लिए इस बार अनुमति भी नहीं दी गई। लेकिन चोरी छिपे जिले में आतिशबाजी की जमकर बिक्री हुई। लोगों ने महंगे दामों पर खरीदारी की। देर रात तक आसमान में आतिशबाजी होती रही। पुलिस की सुस्ती और चूक के कारण ही शहर में चोरी छिपे जमकर पटाखों की बिक्री हुई। भले ही लोगों को पांच का माल दस में मिला हो लेकिन उत्साह मनाने के लिए लोगों ने जमकर पैसे खर्च किए।
देसी जुगाड़ ने हवा की बिगाड़ दी सेहत
देहात अंचल में गंधक पोटाश के मिश्रण से जमकर विस्फोट किए गए। लोगों ने लोहे का एक यंत्र बनवाया, जिसे धमाका भी कहा जाता है। गंधक, पोटाश के मिश्रण को इसमें रखकर छोड़ने से तेज आवाज के साथ ही बेहद हानिकारक धुआं निकलता है, जो पर्यावरण के लिए भी खतरा है।
सांस, नेत्र रोगियों को मुश्किल
वातावरण में छाए हानिकारक धुआं के कारण सांस और नेत्र रोगियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। दिनभर आंखों में चुभन से लोग परेशान रहे, साथ ही सांस लेेने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। आतिशबाजी के बाद से इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं।
सांस रोगी घरों के अंदर ही रहें
फिजिशियन डॉ गौरव मित्तल ने बताया कि आतिशबाजी के कारण वातावरण में धुआं छाया हुआ है, जो अस्थमा के रोगियों के लिए बेहतर खतरनाक है। सांस रोग से पीड़ित मरीज फिलहाल सुबह की सैर बंद कर दें। घरों के अंदर ही रहें तो ज्यादा अच्छा है, समय से दवाएं लेते रहें। बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।
आंखों में जलन होने पर ताजे पानी से धोएं
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल आनंद ने बताया कि वातावरण में धुआं फैलने से आंखों में जलन की समस्या बनने लगी है। इस तरह की समस्या होने पर आंखों को ताजे पानी से धोएं, बाहर निकलते समय चश्मा जरूर लगाएं। ज्यादा समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। घबराए नहीं और न ही अपनी मर्जी से दवाओं का चयन करें।
धुंध से होने वाली दिक्कतों
- खांसी, सांस लेने में तकलीफ
- आंखों में जलन, ब्रॉनकाइटिस
- दिल की बीमारी, त्वचा संबंधी बीमारी
- नाक-कान, गला, फेफड़ों में इंफेक्शन
- ब्लड प्रेशर के रोगियों के ब्रेन स्ट्रोक की समस्या
- दमा के रोगियों को अटैक का खतरा
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पिएं
- घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं
- बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी में मुंह, आंखों और नाक साफ करें
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर लें
- तुलसी, अदरक की चाय का सेवन भी फायदेमंद रहता है
- साइकिल चलाते वक्त मास्क लगाएं