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बसपा छोड़ साइकिल पर सवार हुए धौलाना विधायक असलम चौधरी
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असलम चौधरी
- फोटो : HAPUR
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बसपा छोड़ साइकिल पर सवार हुए धौलाना विधायक असलम चौधरी
हापुड़। धौलाना विधानसभा से बसपा विधायक असलम चौधरी शनिवार को सपा में शामिल हो गए। करीब एक साल पहले उन्होंने अपनी पत्नी को सपा में शामिल कर बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। पार्टी ने भी उनसे किनारा कर लिया था। अब आधिकारिक रूप से उनके सपा में शामिल होने से यहां धौलाना सीट के समीकरण बदल गए हैं।
असलम चौधरी की पत्नी नसीम बेगम ने वर्ष 2000 में बसपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद पिछले चुनाव में उन्होंने खुद बसपा से चुनाव लड़कर भाजपा के रमेश चंद तोमर को हराया। हालांकि असलम चौधरी एक साल पूर्व अपनी पत्नी नसीम बेगम को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में शामिल कराने के बाद चर्चाओं में आए। इसके बाद बसपा ने उनसे किनारा कर लिया था। शनिवार को असलम चौधरी ने आधिकारिक रुप से सपा की सदस्यता ग्रहण की।
सपा के वोट बैंक का मिल सकता है लाभ
असलम चौधरी के सपा में शामिल होने से इतना जरूर कहा जा सकता है कि विधायक कुछ शर्तों के साथ पाटी में शामिल हुए होंगे। उनके पीछे उनका पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक तो होगा ही, सपा के वोट बैंक का भी उन्हें लाभ मिलेगा। हालांकि धौलाना क्षेत्र में सपा का पारंपरिक वोट बैंक अधिक नहीं है और यहां चेहरों को देखकर वोट दिए जाते हैं। पिछले चुनाव में सपा से धर्मेश तोमर प्रत्याशी थे, जिन्हें करीब 71,786 वोट प्राप्त हुए थे। जबकि भाजपा के रमेश चंद तोमर को 84004 मत प्राप्त हुए थे। विजयी रहे असलम चौधरी ने 88,580 मत हासिल किए थे। अब धर्मेश तोमर भाजपा में हैं और यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। भाजपा से दावेदारी कर रहे वाईपी सिंह कहते हैं कि असलम चौधरी से जनता पहले ही नाराज है। ऐसे में कहीं आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
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चुनाव लड़ने की इच्छा ने बनाया बागी
बसपा ने वर्ष 2006 में मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था। उस समय बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। लेकिन 2007 में नामांकन से चार दिन पहले बसपा ने उनका टिकट काटकर वहाब चौधरी को टिकट दे दिया था। इससे नाराज होकर असलम चौधरी ने यह निर्दलीय चुनाव लड़ा और सिर्फ 13800 मत पाकर हार गए। 2012 में धौलाना विधानसभा सीट से असलम को बसपा से टिकट मिला लेकिन सपा से धर्मेश तोमर ने उन्हें 9339 मतों से हराया। वहीं 2017 में पत्नी को सपा में शामिल करने के बाद यह साफ हो गया था कि अब बसपा उन्हें टिकट नहीं देगी। ऐसे में उनके द्वारा दल बदल लिया गया।
पार्टी से पहले ही निलंबित हैं असलम
बसपा के हापुड़ जिलाध्यक्ष देवेंद्र भारती का कहना है कि असलम चौधरी पहले से बागी थे। उनके जाने से धौलाना सीट को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वे पहले ही पार्टी से निलंबित हैं।
भाजपा धौलाना में मजबूत
भाजपा के जिलाध्यक्ष उमेश तोमर का कहना है कि भाजपा धौलाना में पूरी तरह से मजबूत है, उनके आने और जाने से भाजपा को कोई खतरा नहीं है।
भाजपा का विकल्प सपा
सपा के जिला प्रभारी मदन चौहान का कहना है कि भाजपा का विकल्प केवल सपा है। लोग सपा की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में आ रहे हैं। टिकट किसे देना है, यह निर्णय हाईकमान का है।
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हापुड़। धौलाना विधानसभा से बसपा विधायक असलम चौधरी शनिवार को सपा में शामिल हो गए। करीब एक साल पहले उन्होंने अपनी पत्नी को सपा में शामिल कर बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। पार्टी ने भी उनसे किनारा कर लिया था। अब आधिकारिक रूप से उनके सपा में शामिल होने से यहां धौलाना सीट के समीकरण बदल गए हैं।
असलम चौधरी की पत्नी नसीम बेगम ने वर्ष 2000 में बसपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद पिछले चुनाव में उन्होंने खुद बसपा से चुनाव लड़कर भाजपा के रमेश चंद तोमर को हराया। हालांकि असलम चौधरी एक साल पूर्व अपनी पत्नी नसीम बेगम को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में शामिल कराने के बाद चर्चाओं में आए। इसके बाद बसपा ने उनसे किनारा कर लिया था। शनिवार को असलम चौधरी ने आधिकारिक रुप से सपा की सदस्यता ग्रहण की।
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सपा के वोट बैंक का मिल सकता है लाभ
असलम चौधरी के सपा में शामिल होने से इतना जरूर कहा जा सकता है कि विधायक कुछ शर्तों के साथ पाटी में शामिल हुए होंगे। उनके पीछे उनका पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक तो होगा ही, सपा के वोट बैंक का भी उन्हें लाभ मिलेगा। हालांकि धौलाना क्षेत्र में सपा का पारंपरिक वोट बैंक अधिक नहीं है और यहां चेहरों को देखकर वोट दिए जाते हैं। पिछले चुनाव में सपा से धर्मेश तोमर प्रत्याशी थे, जिन्हें करीब 71,786 वोट प्राप्त हुए थे। जबकि भाजपा के रमेश चंद तोमर को 84004 मत प्राप्त हुए थे। विजयी रहे असलम चौधरी ने 88,580 मत हासिल किए थे। अब धर्मेश तोमर भाजपा में हैं और यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। भाजपा से दावेदारी कर रहे वाईपी सिंह कहते हैं कि असलम चौधरी से जनता पहले ही नाराज है। ऐसे में कहीं आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
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चुनाव लड़ने की इच्छा ने बनाया बागी
बसपा ने वर्ष 2006 में मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था। उस समय बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। लेकिन 2007 में नामांकन से चार दिन पहले बसपा ने उनका टिकट काटकर वहाब चौधरी को टिकट दे दिया था। इससे नाराज होकर असलम चौधरी ने यह निर्दलीय चुनाव लड़ा और सिर्फ 13800 मत पाकर हार गए। 2012 में धौलाना विधानसभा सीट से असलम को बसपा से टिकट मिला लेकिन सपा से धर्मेश तोमर ने उन्हें 9339 मतों से हराया। वहीं 2017 में पत्नी को सपा में शामिल करने के बाद यह साफ हो गया था कि अब बसपा उन्हें टिकट नहीं देगी। ऐसे में उनके द्वारा दल बदल लिया गया।
पार्टी से पहले ही निलंबित हैं असलम
बसपा के हापुड़ जिलाध्यक्ष देवेंद्र भारती का कहना है कि असलम चौधरी पहले से बागी थे। उनके जाने से धौलाना सीट को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वे पहले ही पार्टी से निलंबित हैं।
भाजपा धौलाना में मजबूत
भाजपा के जिलाध्यक्ष उमेश तोमर का कहना है कि भाजपा धौलाना में पूरी तरह से मजबूत है, उनके आने और जाने से भाजपा को कोई खतरा नहीं है।
भाजपा का विकल्प सपा
सपा के जिला प्रभारी मदन चौहान का कहना है कि भाजपा का विकल्प केवल सपा है। लोग सपा की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में आ रहे हैं। टिकट किसे देना है, यह निर्णय हाईकमान का है।