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नहीं साबित हो पाए कोरोना फैलाने के आरोप, 11 जमाती बरी
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बरी होने के बाद कोर्ट के बाहर जमाती व अधिवक्ता.
- फोटो : HAPUR
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नहीं साबित हो पाए कोरोना फैलाने के आरोप, 11 जमाती बरी
हापुड़। कोरोना की पहली लहर में जिले में कोरोना महामारी फैलाने और पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 11 जमातियों सहित 13 लोगों को मंगलवार को कोर्ट ने बरी कर दिया। हापुड़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव भारती ने मंगलवार को यह अहम फैसला सुनाया। इनमें गांव हावल के तत्कालीन ग्राम प्रधान और एक मदरसा संचालक भी शामिल है।
अधिवक्ता जमील अहमद व अधिवक्ता पराग सक्सेना ने बताया कि एक अप्रैल 2020 को पिलखुवा पुलिस ने थाईलैंड के नौ, रांची के दो जमातियों को गांव हावल के मदरसे से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा तत्कालीन ग्राम प्रधान और मदरसा संचालक को भी गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के खिलाफ पिलखुवा कोतवाली में महामारी फैलाने और विदेशी जमातियों पर पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। तभी से यह सुनवाई चल रही थी। इनके अधिवक्ता पंकज सक्सेना ने बताया कि पुलिस ने सभी जमातियों पर गलत आरोपों में मुकदमा दर्ज किया था। जबकि ये सभी लोग धार्मिक स्थल के दर्शन करने भारत आए थे। यहां हापुड़ पहुंचने पर लॉकडाउन लग गया और सभी लोग गांव हावल के मदरसे में फंस गए।
सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता आरोपों को सिद्ध नहीं कर सके। सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया कि लॉकडाउन के दौरान सभी लोग यहां फंस गए थे, इसके अलावा इन्होंने अपने पासपोर्ट का इस्तेमाल भी केवल धार्मिक यात्रा के लिए ही किया था। मंगलवार को अहम फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव भारती ने इंडोनेशिया के दाहा दासे, सूटे कलमिटकल, मामा खोटाइ, जिनुद्दीन, मदारी वोचुरे, अब्दुललोह चेमा, अदुल लोंगकुनान, एसईए यसोह, मोहम्मद फाईद, अयूब अंसारी, मोहम्मद इरशाद, एमडी अय्यूब को बरी कर दिया गया है।
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गिरफ्तारी के तीन महीने बाद ही मिल गई थी जमानत
मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर की शुरुआत हुई थी। सरकार की ओर से लॉकडाउन लगा दिया गया था और इस मामले में सख्ती बरती जा रही थी। ऐसे में जिले में पहला कोरोना का मामला हावल में ही एक जमाती का सामने आया था। कुछ लोग इन्हीं जमातियों को जिले में कोरोना फैलने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे। देश भर में भी कुछ जमातियों पर कोरोना फैलाने के आरोप लगे थे। इसी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
निजामुद्दीन मरकज से आए थे ये जमाती
कोरोना फैलने से पहले दिल्ली की निजामुद्दीन मरकज मस्जिद में तब्लीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए देश विदेश से सैकड़ों की संख्या में जमाती एकत्र हुए थे। कोरोना ने पैर पसारे तो बड़ी संख्या में जमाती कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। हापुड़ आए जमीती भी दिल्ली की इसी मजिस्द से होकर यहां आए थे।
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हापुड़। कोरोना की पहली लहर में जिले में कोरोना महामारी फैलाने और पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 11 जमातियों सहित 13 लोगों को मंगलवार को कोर्ट ने बरी कर दिया। हापुड़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव भारती ने मंगलवार को यह अहम फैसला सुनाया। इनमें गांव हावल के तत्कालीन ग्राम प्रधान और एक मदरसा संचालक भी शामिल है।
अधिवक्ता जमील अहमद व अधिवक्ता पराग सक्सेना ने बताया कि एक अप्रैल 2020 को पिलखुवा पुलिस ने थाईलैंड के नौ, रांची के दो जमातियों को गांव हावल के मदरसे से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा तत्कालीन ग्राम प्रधान और मदरसा संचालक को भी गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के खिलाफ पिलखुवा कोतवाली में महामारी फैलाने और विदेशी जमातियों पर पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। तभी से यह सुनवाई चल रही थी। इनके अधिवक्ता पंकज सक्सेना ने बताया कि पुलिस ने सभी जमातियों पर गलत आरोपों में मुकदमा दर्ज किया था। जबकि ये सभी लोग धार्मिक स्थल के दर्शन करने भारत आए थे। यहां हापुड़ पहुंचने पर लॉकडाउन लग गया और सभी लोग गांव हावल के मदरसे में फंस गए।
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सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता आरोपों को सिद्ध नहीं कर सके। सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया कि लॉकडाउन के दौरान सभी लोग यहां फंस गए थे, इसके अलावा इन्होंने अपने पासपोर्ट का इस्तेमाल भी केवल धार्मिक यात्रा के लिए ही किया था। मंगलवार को अहम फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव भारती ने इंडोनेशिया के दाहा दासे, सूटे कलमिटकल, मामा खोटाइ, जिनुद्दीन, मदारी वोचुरे, अब्दुललोह चेमा, अदुल लोंगकुनान, एसईए यसोह, मोहम्मद फाईद, अयूब अंसारी, मोहम्मद इरशाद, एमडी अय्यूब को बरी कर दिया गया है।
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गिरफ्तारी के तीन महीने बाद ही मिल गई थी जमानत
मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर की शुरुआत हुई थी। सरकार की ओर से लॉकडाउन लगा दिया गया था और इस मामले में सख्ती बरती जा रही थी। ऐसे में जिले में पहला कोरोना का मामला हावल में ही एक जमाती का सामने आया था। कुछ लोग इन्हीं जमातियों को जिले में कोरोना फैलने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे। देश भर में भी कुछ जमातियों पर कोरोना फैलाने के आरोप लगे थे। इसी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
निजामुद्दीन मरकज से आए थे ये जमाती
कोरोना फैलने से पहले दिल्ली की निजामुद्दीन मरकज मस्जिद में तब्लीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए देश विदेश से सैकड़ों की संख्या में जमाती एकत्र हुए थे। कोरोना ने पैर पसारे तो बड़ी संख्या में जमाती कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। हापुड़ आए जमीती भी दिल्ली की इसी मजिस्द से होकर यहां आए थे।