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सरकारी अस्पताल में दो महीने से नहीं है आई ड्रॉप
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सरकारी अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
- फोटो : HAPUR
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सरकारी अस्पताल में दो महीने से नहीं है आई ड्रॉप
हापुड़। जिले के सरकारी अस्पतालों में दो महीने से आई ड्रॉप नहीं है। चिकित्सकों को बाहर से ही दवा लेने के लिए लिखना पड़ रहा है। ऐसे में जिनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। इसके अलावा एलर्जी, एंटीबायोटिक दवाओं की किल्लत भी चल रही है।
शासन द्वारा सरकारी अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए 180 से अधिक दवाएं सूचीबद्ध की गई हैं। इन दवाओं का स्टॉक अस्पतालों में होना आवश्यक है। नेत्र रोगियों के लिए सबसे अधिक सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप की डिमांड रहती है। यह एंटीबायोटिक का कार्य करती है, जो एलर्जी या अन्य रोग से पीड़ित मरीजों को दी जाती है। दो महीने से इस दवा का स्टॉक जिले के अस्पतालों में पूरी तरह खत्म पड़ा है। गरीब मरीज इसलिए ही सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं ताकि उन्हें फ्री में उपचार और दवा मिल सके। मगर नेत्र रोगियों के लिए दवा खत्म होने से सेहत का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि चिकित्सक के परामर्श के बाद वह बिना दवा के ही लौट रहे हैं। मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ रही है।
- इन दवाओं की भी कमी
जिले के कई सरकारी अस्पतालों में एंटी एलर्जी सेटजिन टैबलेट, एंटी बायोटिक अमोक्सीक्लैव टैबलेट, फ्लुकोनाजोल टैबलेट की कमी चल रही है। पहले कई दिन का स्टॉक अस्पतालों में उपलब्ध रहता था लेकिन अब इन दवाओं का सीमित स्टॉक ही बचा है।
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- आंख का उपचार कराने आया, नहीं मिला दवा
आंख में खुजली और कम दिखने की समस्या है। उपचार के लिए सरकारी अस्पताल आया हूं, मगर दवा नहीं मिली है। अब बिना दवा के ही घर लौटना पड़ रहा है, क्योंकि मेरे पास बाहर से दवा खरीदने के पैसे नहीं हैं। - संजय, इंद्रगढ़ी --फोटो संख्या--03
- बाहर से 145 की मिलती है दवा
आंख की बीमारी से परेशान हूं। सरकारी अस्पताल में आंख की दवा नहीं मिलती है। बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ती है, जो 145 रुपये में मिलती है। सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। - कंछिद, फूलगढ़ी। - फोटो संख्या--04
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- शासन को भेजी गई है डिमांड -
शासन को आई ड्रॉप की डिमांड भेजी गई है। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए दवा की व्यवस्था कराई जा रही है। बीच में आई ड्रोप आई भी थी। स्टॉक कम होने के कारण थोड़ी परेशानी हो रही है।- डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ।
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हापुड़। जिले के सरकारी अस्पतालों में दो महीने से आई ड्रॉप नहीं है। चिकित्सकों को बाहर से ही दवा लेने के लिए लिखना पड़ रहा है। ऐसे में जिनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। इसके अलावा एलर्जी, एंटीबायोटिक दवाओं की किल्लत भी चल रही है।
शासन द्वारा सरकारी अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए 180 से अधिक दवाएं सूचीबद्ध की गई हैं। इन दवाओं का स्टॉक अस्पतालों में होना आवश्यक है। नेत्र रोगियों के लिए सबसे अधिक सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप की डिमांड रहती है। यह एंटीबायोटिक का कार्य करती है, जो एलर्जी या अन्य रोग से पीड़ित मरीजों को दी जाती है। दो महीने से इस दवा का स्टॉक जिले के अस्पतालों में पूरी तरह खत्म पड़ा है। गरीब मरीज इसलिए ही सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं ताकि उन्हें फ्री में उपचार और दवा मिल सके। मगर नेत्र रोगियों के लिए दवा खत्म होने से सेहत का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि चिकित्सक के परामर्श के बाद वह बिना दवा के ही लौट रहे हैं। मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ रही है।
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- इन दवाओं की भी कमी
जिले के कई सरकारी अस्पतालों में एंटी एलर्जी सेटजिन टैबलेट, एंटी बायोटिक अमोक्सीक्लैव टैबलेट, फ्लुकोनाजोल टैबलेट की कमी चल रही है। पहले कई दिन का स्टॉक अस्पतालों में उपलब्ध रहता था लेकिन अब इन दवाओं का सीमित स्टॉक ही बचा है।
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- आंख का उपचार कराने आया, नहीं मिला दवा
आंख में खुजली और कम दिखने की समस्या है। उपचार के लिए सरकारी अस्पताल आया हूं, मगर दवा नहीं मिली है। अब बिना दवा के ही घर लौटना पड़ रहा है, क्योंकि मेरे पास बाहर से दवा खरीदने के पैसे नहीं हैं। - संजय, इंद्रगढ़ी --फोटो संख्या--03
- बाहर से 145 की मिलती है दवा
आंख की बीमारी से परेशान हूं। सरकारी अस्पताल में आंख की दवा नहीं मिलती है। बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ती है, जो 145 रुपये में मिलती है। सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। - कंछिद, फूलगढ़ी। - फोटो संख्या--04
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- शासन को भेजी गई है डिमांड -
शासन को आई ड्रॉप की डिमांड भेजी गई है। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए दवा की व्यवस्था कराई जा रही है। बीच में आई ड्रोप आई भी थी। स्टॉक कम होने के कारण थोड़ी परेशानी हो रही है।- डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ।