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दंगा पीड़ितों को चेक दे बाबूजी ने जीत लिया था दिल
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पूर्व विधायक जयप्रकाश की जनसभा में भाग लेते कल्याण सिंह। फाइल फोटो
- फोटो : HAPUR
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दंगा पीड़ितों को चेक दे बाबूजी ने जीत लिया था दिल
हापुड़। भाजपा के दिग्गज नेता और बाबू जी के नाम से लोकप्रिय कल्याण सिंह को हापुड़ से विशेष लगाव था। वर्ष 1992 की बात है जब हापुड़ में हुए दंगे में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने खुद यहां आकर पीड़ितों को आर्थिक मदद के चेक भेंट किए थे। इतना ही नहीं किसानों की परेशानी को देख सिंभावली शुगर मिल से गन्ने का भुगतान कराया था। अपने राजनीतिक सफर के दौरान उनका कई बार हापुड़ आना-जाना लगा रहा। उनके निधन से जिले की जनता गम में है।
वर्ष 1991 से 1998 के बीच कल्याण सिंह का करीब छह बार हापुड़ आए। दो बार भाजपा प्रत्याशियों की सभा को संबोधित किया था। वर्ष 1992 में हापुड़ गाजियाबाद जिले का हिस्सा था। उस दौरान मोहल्ला गुली पर दो संप्रदायों में दंगा हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। हापुड़ में कर्फ्यू लगा दिया गया। हापुड़ के लिए बड़ी बात थी कि बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए कल्याण सिंह यहां आए थे और अपने हाथों से पीड़ित परिवारों का आर्थिक मदद के लिए चेक भेंट किए थे। वर्ष 1998 में गढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे राम नरेश रावत ने गन्ना भुगतान की मांग तत्कालीन गन्ना मंत्री रहे ओम प्रकाश सिंह से उठाई थी। लेकिन मांग पूरी न होने पर विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बात जब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को पता चली तो उन्होंने विधायक को मिलने के लिए बुलाया और गन्ना मंत्री को बुलाकर तत्काल सिंभावली शुगर मिल से 39 करोड़ का बकाया गन्ना भुगतान कराने के आदेश जारी किए। इसके साथ ही उन्होंने हापुड़ में एक कार्यक्रम निर्धारित करने के भी आदेश दिए।
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प्रत्याशियों के पक्ष में भी कई बार मांगे वोट
1993 में यूपी में विधान सभा चुनाव का घमासान मचा था। अपने प्रत्याशी के लिए दिग्गजों की जनसभाएं हो रही थीं, इसी दौरान भाजपा के हापुड़ विधान सभा सीट से प्रत्याशी बद्री प्रसाद बाल्मीकि की जनसभा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की चुनावी सभा घोषित की गई थी। कार्यक्रम के अंतिम समय में अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह पहुंच गए थे। उनके आने पर हापुड़ की जनता ने उन्हें हाथों हाथ लिया। उनके आने पर हापुड़ की जनता का उत्साह बढ़ गया था। मनोज बाल्मीकि बताते हैं कि हापुड़ के पक्काबाग पर यह जनसभा की जा रही थी। इसके बाद 1996 के विधान सभा चुनाव में कल्याण सिंह ने भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित किया था। उनके भाषण के लोग इतने मुरीद हुए कि जयप्रकाश चुनाव जीत गए। इसके बाद एक बार फिर आभार व्यक्त करने के लिए कल्याण सिंह हापुड़ पहुंचे और एक कार्यक्रम को संबोधित किया।
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स्वागत के लिए घंटों खड़े रहते थे लोग
कल्याण सिंह का अक्सर मेरठ से लखनऊ आना जाता होता रहता था। वे ऐसी शख्सियत थे कि जब भी वे ट्रेन में सवार होकर हापुड़ स्टेशन से गुजरते तो भाजपाई ही नहीं व्यापारी भी उनके स्वागत के लिए स्टेशन पर घंटों खड़े रहते। युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजीव गर्ग बताते हैं कि 1991 में मेरठ से लखनऊ जाते हुए उन्होंने हापुड़ स्टेशन पर कल्याण सिंह का स्वागत किया था।
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छोटा कार्यकर्ता भी उनके लिए बड़ा पदाधिकारी
भाजपा के जिला महामंत्री मोहन सिंह बताते हैं कि पार्टी में दोबारा आने के बाद वर्ष 2004 में वे रेलवे रोड स्थित भाजपा के मंडल अध्यक्ष प्रभात अग्रवाल के आवास पर आए थे। इस दौरान उनसे मिलने का मौका मिला। उनकी खासियत थी कि वे हर कार्यकर्ता को उतनी ही अहमियत देते थे, जितनी बड़े पदाधिकारी को दी जाती थी। सभी से आत्मीयता के साथ मिलते थे।
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क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं जानते थे नाम
कल्याण सिंह के क्षेत्र से लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को नाम से पहचानते थे। अक्सर एक बड़े नेता का छोटे कार्यकर्ताओं को नाम से जानना काफी चौंकाने वाली बात है। वे उनकी यादों में हमेशा अमर रहेंगे। -मनोज बाल्मीकि, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य।
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चौधरी चरण सिंह भी थे कल्याण सिंह की नीतियों के मुरीद
कल्याण सिंह ही वे नेता हैं, जिनकी नीतियों से प्रभावित होकर किसान और दूसरे वर्ग उनसे जुड़े। वे खुद उनके कारण ही रालोद छोड़कर भाजपा में आए। चौधरी चरण सिंह भी खुद उनकी नीतियों के मुरीद थे।-राम नरेश रावत, भाजपा से पूर्व गढ़ विधायक।
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उनकी कमी को नहीं किया जा सकता पूरा
कल्याण सिंह भाजपा का एक स्तंभ थे। वे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने पार्टी को मुश्किल वक्त में उबारा और एक इतिहास कायम किया। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता।-विजय पाल आढ़ती, सदर विधायक।
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बड़े निर्णय लेने की क्षमता के धनी थे
भाजपा आज जिस मुकाम पर है, वह अपने बड़े और एतिहासिक निर्णयों की वजह से है। कल्याण सिंह वे नेता थे जिन्होंने ऐसे निर्णय लेने में कभी देर नहीं की। उनकी भरपाई नहीं की जा सकती।-उमेश राणा, भाजपा जिलाध्यक्ष।
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हापुड़। भाजपा के दिग्गज नेता और बाबू जी के नाम से लोकप्रिय कल्याण सिंह को हापुड़ से विशेष लगाव था। वर्ष 1992 की बात है जब हापुड़ में हुए दंगे में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने खुद यहां आकर पीड़ितों को आर्थिक मदद के चेक भेंट किए थे। इतना ही नहीं किसानों की परेशानी को देख सिंभावली शुगर मिल से गन्ने का भुगतान कराया था। अपने राजनीतिक सफर के दौरान उनका कई बार हापुड़ आना-जाना लगा रहा। उनके निधन से जिले की जनता गम में है।
वर्ष 1991 से 1998 के बीच कल्याण सिंह का करीब छह बार हापुड़ आए। दो बार भाजपा प्रत्याशियों की सभा को संबोधित किया था। वर्ष 1992 में हापुड़ गाजियाबाद जिले का हिस्सा था। उस दौरान मोहल्ला गुली पर दो संप्रदायों में दंगा हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। हापुड़ में कर्फ्यू लगा दिया गया। हापुड़ के लिए बड़ी बात थी कि बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए कल्याण सिंह यहां आए थे और अपने हाथों से पीड़ित परिवारों का आर्थिक मदद के लिए चेक भेंट किए थे। वर्ष 1998 में गढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे राम नरेश रावत ने गन्ना भुगतान की मांग तत्कालीन गन्ना मंत्री रहे ओम प्रकाश सिंह से उठाई थी। लेकिन मांग पूरी न होने पर विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बात जब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को पता चली तो उन्होंने विधायक को मिलने के लिए बुलाया और गन्ना मंत्री को बुलाकर तत्काल सिंभावली शुगर मिल से 39 करोड़ का बकाया गन्ना भुगतान कराने के आदेश जारी किए। इसके साथ ही उन्होंने हापुड़ में एक कार्यक्रम निर्धारित करने के भी आदेश दिए।
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प्रत्याशियों के पक्ष में भी कई बार मांगे वोट
1993 में यूपी में विधान सभा चुनाव का घमासान मचा था। अपने प्रत्याशी के लिए दिग्गजों की जनसभाएं हो रही थीं, इसी दौरान भाजपा के हापुड़ विधान सभा सीट से प्रत्याशी बद्री प्रसाद बाल्मीकि की जनसभा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की चुनावी सभा घोषित की गई थी। कार्यक्रम के अंतिम समय में अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह पहुंच गए थे। उनके आने पर हापुड़ की जनता ने उन्हें हाथों हाथ लिया। उनके आने पर हापुड़ की जनता का उत्साह बढ़ गया था। मनोज बाल्मीकि बताते हैं कि हापुड़ के पक्काबाग पर यह जनसभा की जा रही थी। इसके बाद 1996 के विधान सभा चुनाव में कल्याण सिंह ने भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित किया था। उनके भाषण के लोग इतने मुरीद हुए कि जयप्रकाश चुनाव जीत गए। इसके बाद एक बार फिर आभार व्यक्त करने के लिए कल्याण सिंह हापुड़ पहुंचे और एक कार्यक्रम को संबोधित किया।
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स्वागत के लिए घंटों खड़े रहते थे लोग
कल्याण सिंह का अक्सर मेरठ से लखनऊ आना जाता होता रहता था। वे ऐसी शख्सियत थे कि जब भी वे ट्रेन में सवार होकर हापुड़ स्टेशन से गुजरते तो भाजपाई ही नहीं व्यापारी भी उनके स्वागत के लिए स्टेशन पर घंटों खड़े रहते। युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजीव गर्ग बताते हैं कि 1991 में मेरठ से लखनऊ जाते हुए उन्होंने हापुड़ स्टेशन पर कल्याण सिंह का स्वागत किया था।
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छोटा कार्यकर्ता भी उनके लिए बड़ा पदाधिकारी
भाजपा के जिला महामंत्री मोहन सिंह बताते हैं कि पार्टी में दोबारा आने के बाद वर्ष 2004 में वे रेलवे रोड स्थित भाजपा के मंडल अध्यक्ष प्रभात अग्रवाल के आवास पर आए थे। इस दौरान उनसे मिलने का मौका मिला। उनकी खासियत थी कि वे हर कार्यकर्ता को उतनी ही अहमियत देते थे, जितनी बड़े पदाधिकारी को दी जाती थी। सभी से आत्मीयता के साथ मिलते थे।
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क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं जानते थे नाम
कल्याण सिंह के क्षेत्र से लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को नाम से पहचानते थे। अक्सर एक बड़े नेता का छोटे कार्यकर्ताओं को नाम से जानना काफी चौंकाने वाली बात है। वे उनकी यादों में हमेशा अमर रहेंगे। -मनोज बाल्मीकि, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य।
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चौधरी चरण सिंह भी थे कल्याण सिंह की नीतियों के मुरीद
कल्याण सिंह ही वे नेता हैं, जिनकी नीतियों से प्रभावित होकर किसान और दूसरे वर्ग उनसे जुड़े। वे खुद उनके कारण ही रालोद छोड़कर भाजपा में आए। चौधरी चरण सिंह भी खुद उनकी नीतियों के मुरीद थे।-राम नरेश रावत, भाजपा से पूर्व गढ़ विधायक।
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उनकी कमी को नहीं किया जा सकता पूरा
कल्याण सिंह भाजपा का एक स्तंभ थे। वे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने पार्टी को मुश्किल वक्त में उबारा और एक इतिहास कायम किया। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता।-विजय पाल आढ़ती, सदर विधायक।
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बड़े निर्णय लेने की क्षमता के धनी थे
भाजपा आज जिस मुकाम पर है, वह अपने बड़े और एतिहासिक निर्णयों की वजह से है। कल्याण सिंह वे नेता थे जिन्होंने ऐसे निर्णय लेने में कभी देर नहीं की। उनकी भरपाई नहीं की जा सकती।-उमेश राणा, भाजपा जिलाध्यक्ष।