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32 हजार की आबादी वाले असौड़ा में सिर्फ 1000 को लगे टीके
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32 हजार की आबादी वाले असौड़ा में सिर्फ 1000 को लगे टीके
हापुड़। कोरोना टीकाकरण की रफ्तार शहर की अपेक्षा देहात क्षेत्र में काफी कम है। शुरूआत में टीके को लेकर ग्रामीणों में व्याप्त भ्रांतियों के कारण इसमें लोग दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। 32 हजार की आबादी वाले गांव असौड़ा में दो टीकाकरण केंद्र होने के बावजूद अभी तक एक हजार के आसपास लोगों का ही टीकाकरण हुआ है। लेकिन अफसरों, प्रधान और दूसरे जिम्मेदारों ने लोगों को समझाया तो अब यहां टीकाकरण रफ्तार पकड़ रहा है।
असौड़ा हापुड़ शहर से सटा हुआ करीब 32 हजार की भारी भरकम मिश्रित आबादी का गांव है। गांव में कोरोना टीकाकरण को लेकर पहले कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन इसके बाद दो केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन केंद्र बनने के बाद भी लोग टीकाकरण के लिए व्याप्त भ्रांतियों के कारण इससे दूरी बनाए रहे। इसके बाद ग्राम प्रधान और दूसरे अफसरों ने लोगों को समझाया। इसके बाद गांव में टीकाकरण की रफ्तार में तेजी आई है। गांव में अभी तक 1120 लोगों को टीका लगाया गया है।
पहले खुद लगवाया टीका फिर दूसरों की अपील
शुरू में लोग डरे हुए थे कि टीका लगवाने के बाद पॉजिटिव हो जाएंगे। मैंने खुद टीका लगवाया और सबको बताया कि ऐसा कुछ नहीं है।स्लॉट बुक करने में कुछ दिक्कतें आ रही है। - आयशा मुर्तजा, ग्राम प्रधान।
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कोरोना के पीक के दौरान गांव में काफी संख्या में मौत हुई हैं। ऐसे में टीका ही बचाव है। मैंने खुद टीका लगवाया अब सबको बता रहा हूं कि इसका सिर्फ फायदा है नुकसान कुछ नहीं।-कलुवा, ग्रामीण।
अब सब मान रहे टीका ही बचाव
पहले गांव में तमाम अफवाहें थीं, लेकिन मैंने टीका लगवाया और अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा हूं। अब मोहल्ले में सभी लोग मानने लगे हैं कि वैक्सीन ही कोरोना से बचाव का रास्ता है। लियाकत। ग्रामीण।
दो टीकाकरण केंद्रोें ने बदला माहौल
शहर से सटा होने के बाद भी गांव में टीकाकरण के लिए लोगों में उत्साह नहीं था। गांव में टीकाकरण के लिए दो सेंटर बने और लोगों को समझाया गया तो अब सब तैयार हैं।-अली मुर्तुजा, ग्रामीण
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हापुड़। कोरोना टीकाकरण की रफ्तार शहर की अपेक्षा देहात क्षेत्र में काफी कम है। शुरूआत में टीके को लेकर ग्रामीणों में व्याप्त भ्रांतियों के कारण इसमें लोग दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। 32 हजार की आबादी वाले गांव असौड़ा में दो टीकाकरण केंद्र होने के बावजूद अभी तक एक हजार के आसपास लोगों का ही टीकाकरण हुआ है। लेकिन अफसरों, प्रधान और दूसरे जिम्मेदारों ने लोगों को समझाया तो अब यहां टीकाकरण रफ्तार पकड़ रहा है।
असौड़ा हापुड़ शहर से सटा हुआ करीब 32 हजार की भारी भरकम मिश्रित आबादी का गांव है। गांव में कोरोना टीकाकरण को लेकर पहले कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन इसके बाद दो केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन केंद्र बनने के बाद भी लोग टीकाकरण के लिए व्याप्त भ्रांतियों के कारण इससे दूरी बनाए रहे। इसके बाद ग्राम प्रधान और दूसरे अफसरों ने लोगों को समझाया। इसके बाद गांव में टीकाकरण की रफ्तार में तेजी आई है। गांव में अभी तक 1120 लोगों को टीका लगाया गया है।
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पहले खुद लगवाया टीका फिर दूसरों की अपील
शुरू में लोग डरे हुए थे कि टीका लगवाने के बाद पॉजिटिव हो जाएंगे। मैंने खुद टीका लगवाया और सबको बताया कि ऐसा कुछ नहीं है।स्लॉट बुक करने में कुछ दिक्कतें आ रही है। - आयशा मुर्तजा, ग्राम प्रधान।
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कोरोना के पीक के दौरान गांव में काफी संख्या में मौत हुई हैं। ऐसे में टीका ही बचाव है। मैंने खुद टीका लगवाया अब सबको बता रहा हूं कि इसका सिर्फ फायदा है नुकसान कुछ नहीं।-कलुवा, ग्रामीण।
अब सब मान रहे टीका ही बचाव
पहले गांव में तमाम अफवाहें थीं, लेकिन मैंने टीका लगवाया और अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा हूं। अब मोहल्ले में सभी लोग मानने लगे हैं कि वैक्सीन ही कोरोना से बचाव का रास्ता है। लियाकत। ग्रामीण।
दो टीकाकरण केंद्रोें ने बदला माहौल
शहर से सटा होने के बाद भी गांव में टीकाकरण के लिए लोगों में उत्साह नहीं था। गांव में टीकाकरण के लिए दो सेंटर बने और लोगों को समझाया गया तो अब सब तैयार हैं।-अली मुर्तुजा, ग्रामीण
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