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बीस साल में 850 पेड़ों से घटकर 550 ही रह गए वटवृक्ष
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बीस साल में 850 पेड़ों से घटकर 550 ही रह गए वटवृक्ष
हापुड़। वैज्ञानिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वट वृक्षों की संख्या जिले में लगातार घट रही है। 20 सालों में यहां ऐसे वृक्षों की संख्या घटकर करीब आधी रह गई है। जबकि 20 ऐसे वृक्ष हैं जो वास्तव में धरोहर हैं। हालांकि वन विभाग ने एक वृक्ष को ही धरोहर घोषित किया है। हालांकि वन विभाग ऐसे सभी पेड़ों की निगरानी की बात जरूर कह रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीस वर्ष पहले जिले में करीब 850 वट वृक्ष थे। आधी और दूसरे कारणों से अब जिले में अब इनकी संख्या करीब 550 रह गई है। इनमें से अधिकतर पेड़ गढ़ और धौलाना क्षेत्र में हैं। जबकि 20 पेड़ ऐसे हैं जो जिनकी उम्र करीब 60 वर्ष से 100 वर्ष के आसपास है। ऐसे वट की जटाएं लटकी हुई हैं और ये दूर दूर तक फैले हुए हैं। हालांकि वन विभाग द्वारा धरोहर घोषित करने की बात कहें तो जिले में मात्र एक वट वृक्ष को ही यह उपाधि मिली है। हापुड़ में बुलंदशहर रोड स्थित मंशा देवी मंदिर के बाहर लगे पेड़ को इसके लिए चिन्हित किया गया है। क्षेत्रीय वन निरीक्षक प्रताप सिंह सैनी ने बताया कि जिले में वट वृक्ष विभाग की निगरानी में हैं। बुलंदशहर रोड स्थित वट के पौधे को धरोहर घोषित किया गया है। जबकि बाकी चिन्हित पौधों की भी लगातार निगरानी की जाती है।
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जिले के कुछ मुख्य पेड़ों से संबंधित तथ्य--
1-बुलंदशहर रोड मंशा देवी मंदिर स्थित पेड़ करीब 80 वर्ष पुराना है और मंदिर के बाहर लगे होने के कारण लोग इसे पूजते हैं।
2-धौलाना के गांव सपनावत में जाहरवीर गोगाजी मंदिर के प्रांगण में करीब 150 वर्ष पुराना वट का पेड़ है। पुराने समय से इसकी पूजा पाठ होती है।
3-धौलाना के गांव इकलैड़ी में भी करीब 100 वर्ष पुराना पेड़ है, पुराने लोग बताते हैं कि इस पेड़ के नीचे पहले पंचायत लगती थी।
4-गढ़ के नक्काकुआं स्थित वट वृक्ष की उम्र भी करीब 60 वर्ष से अधिक बताई जाती है।
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ये है वट अमावस्या का पौराणिक महत्व -
आचार्य संतोष ने बताया कि वट अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं और वट पेड़ की पूजा अर्चना करती हैं। वट वृक्ष के चारों ओर सूत के धागे लपेटती हैं। मान्यता है कि सुहागिनों द्वारा ऐसा करने से पति की लंबी उम्र होने के साथ परिवार की अन्य समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
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पेड़ों में सबसे अधिक ऑक्सीजन देता है बरगद -
वट वृक्ष की जहां पौराणिक मान्यताएं हैं वहीं यह पेड़ गजब के औषधीय गुणों से भी सुसज्जित है। वनस्पति विज्ञान की प्रवक्ता अंजु सिरोही का कहना है कि ऑक्सीजन की बात करें तो यह दूसरे पेड़ों से सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है। नीम जैसे दूसरे पड़ों की अपेक्षा यह 40 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन वायु मंडल में छोड़ता है।
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हापुड़। वैज्ञानिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वट वृक्षों की संख्या जिले में लगातार घट रही है। 20 सालों में यहां ऐसे वृक्षों की संख्या घटकर करीब आधी रह गई है। जबकि 20 ऐसे वृक्ष हैं जो वास्तव में धरोहर हैं। हालांकि वन विभाग ने एक वृक्ष को ही धरोहर घोषित किया है। हालांकि वन विभाग ऐसे सभी पेड़ों की निगरानी की बात जरूर कह रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीस वर्ष पहले जिले में करीब 850 वट वृक्ष थे। आधी और दूसरे कारणों से अब जिले में अब इनकी संख्या करीब 550 रह गई है। इनमें से अधिकतर पेड़ गढ़ और धौलाना क्षेत्र में हैं। जबकि 20 पेड़ ऐसे हैं जो जिनकी उम्र करीब 60 वर्ष से 100 वर्ष के आसपास है। ऐसे वट की जटाएं लटकी हुई हैं और ये दूर दूर तक फैले हुए हैं। हालांकि वन विभाग द्वारा धरोहर घोषित करने की बात कहें तो जिले में मात्र एक वट वृक्ष को ही यह उपाधि मिली है। हापुड़ में बुलंदशहर रोड स्थित मंशा देवी मंदिर के बाहर लगे पेड़ को इसके लिए चिन्हित किया गया है। क्षेत्रीय वन निरीक्षक प्रताप सिंह सैनी ने बताया कि जिले में वट वृक्ष विभाग की निगरानी में हैं। बुलंदशहर रोड स्थित वट के पौधे को धरोहर घोषित किया गया है। जबकि बाकी चिन्हित पौधों की भी लगातार निगरानी की जाती है।
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जिले के कुछ मुख्य पेड़ों से संबंधित तथ्य--
1-बुलंदशहर रोड मंशा देवी मंदिर स्थित पेड़ करीब 80 वर्ष पुराना है और मंदिर के बाहर लगे होने के कारण लोग इसे पूजते हैं।
2-धौलाना के गांव सपनावत में जाहरवीर गोगाजी मंदिर के प्रांगण में करीब 150 वर्ष पुराना वट का पेड़ है। पुराने समय से इसकी पूजा पाठ होती है।
3-धौलाना के गांव इकलैड़ी में भी करीब 100 वर्ष पुराना पेड़ है, पुराने लोग बताते हैं कि इस पेड़ के नीचे पहले पंचायत लगती थी।
4-गढ़ के नक्काकुआं स्थित वट वृक्ष की उम्र भी करीब 60 वर्ष से अधिक बताई जाती है।
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ये है वट अमावस्या का पौराणिक महत्व -
आचार्य संतोष ने बताया कि वट अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं और वट पेड़ की पूजा अर्चना करती हैं। वट वृक्ष के चारों ओर सूत के धागे लपेटती हैं। मान्यता है कि सुहागिनों द्वारा ऐसा करने से पति की लंबी उम्र होने के साथ परिवार की अन्य समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
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पेड़ों में सबसे अधिक ऑक्सीजन देता है बरगद -
वट वृक्ष की जहां पौराणिक मान्यताएं हैं वहीं यह पेड़ गजब के औषधीय गुणों से भी सुसज्जित है। वनस्पति विज्ञान की प्रवक्ता अंजु सिरोही का कहना है कि ऑक्सीजन की बात करें तो यह दूसरे पेड़ों से सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है। नीम जैसे दूसरे पड़ों की अपेक्षा यह 40 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन वायु मंडल में छोड़ता है।