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बच्चों की तलाश में स्वयंसेवी संस्थाएं करेंगी सहयोग
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बच्चों की तलाश में स्वयंसेवी संस्थाएं करेंगी सहयोग
हापुड़। कोरोना संक्रमण के चलते जान गंवाने वाले माता पिता के बाद अनाथ हुए बच्चों की तलाश में फिलहाल गंभीरता नजर नहीं आ रही है। अभी तक मात्र दस बच्चे ही चिन्हित किए गए हैं। इस दिशा में सुधार के लिए अब जिला प्रोबेशन विभाग स्वयंसेवी संस्थाओं से मदद के लिए संपर्क करने की बात कह रहा है। संस्थाओं के माध्यम से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे बच्चों को तलाश किया जाएगा।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर और जनपदों की तरह जिले में भी काफी घातक साबित हुई है। जिले में सरकारी आंकड़ा भले ही कम रहा हो, लेकिन यहां भी कोरोना के चलते दम तोड़ने वालों की संख्या काफी अधिक है। अधिकतर गांव में दस से बीस मौतों का आंकड़ा रहा है। ऐसे में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में कितने ही बच्चों के सिर से उनके माता पिता का साया उठ गया। अब ऐसे बच्चों के सामने विकट समस्या आन खड़ी हुई है। फिलहाल जिले में छह परिवारों के दस बच्चों को चिन्हित किया गया है। जिला लीगल प्रोबेशन अधिकारी डा. निशा रावत ने बताया कि इसके लिए समाजसेवी संस्थाओं की मदद ली जाएगी और प्रचार प्रसार का भी सहारा लिया जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार के किसी बच्चों की जानकारी है तो वह विभाग से संपर्क करते हुए इसकी जानकारी दे सकता है। इसके अलावा विभाग द्वारा पहले भी इसके लिए फोन नंबर जारी किए थे।
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इन पर करें संपर्क --
चाइल्ड लाइन की हेल्पलाइन नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181, हेल्पलाइन 011-23478250 पर सूचना दी जा सकती है। इसके अलावा 9627124000, 9410637670 और 8887619931 पर संपर्क करें।
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हापुड़। कोरोना संक्रमण के चलते जान गंवाने वाले माता पिता के बाद अनाथ हुए बच्चों की तलाश में फिलहाल गंभीरता नजर नहीं आ रही है। अभी तक मात्र दस बच्चे ही चिन्हित किए गए हैं। इस दिशा में सुधार के लिए अब जिला प्रोबेशन विभाग स्वयंसेवी संस्थाओं से मदद के लिए संपर्क करने की बात कह रहा है। संस्थाओं के माध्यम से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे बच्चों को तलाश किया जाएगा।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर और जनपदों की तरह जिले में भी काफी घातक साबित हुई है। जिले में सरकारी आंकड़ा भले ही कम रहा हो, लेकिन यहां भी कोरोना के चलते दम तोड़ने वालों की संख्या काफी अधिक है। अधिकतर गांव में दस से बीस मौतों का आंकड़ा रहा है। ऐसे में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में कितने ही बच्चों के सिर से उनके माता पिता का साया उठ गया। अब ऐसे बच्चों के सामने विकट समस्या आन खड़ी हुई है। फिलहाल जिले में छह परिवारों के दस बच्चों को चिन्हित किया गया है। जिला लीगल प्रोबेशन अधिकारी डा. निशा रावत ने बताया कि इसके लिए समाजसेवी संस्थाओं की मदद ली जाएगी और प्रचार प्रसार का भी सहारा लिया जाएगा।
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