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नहीं चुका सके पैसा, 290 का आवंटन होगा निरस्त
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हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की आवासीय और भूखंड बिक्री योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। आवंटी योजनाओं में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूखंडों और विभिन्न श्रेणी के फ्लैटों की किस्तें जमा करने के लिए जारी नोटिस के बावजूद मात्र 320 में से मात्र तीस आवंटियों द्वारा ही किस्त जमा की गई है। जिसके बाद प्राधिकरण द्वारा करीब बीस करोड़ की देयता वाले 290 आवंटियों के आवंटन निरस्त करने की तैयारी की जा रही है।
हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2014-15 में एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैटों का आवंटन किया गया था। इसके बाद प्रीत विहार आनंद विहार फेस वन, फेस टू में भी फ्लैटों का निर्माण कर इनका आवंटन किया गया। इसमें आवासीय के साथ साथ व्यवसायिक भूखंड भी शामिल हैं। आवंटन के दौरान आवंटियों ने प्राधिकरण द्वारा निर्धारित धनराशि जमा की थी। लेकिन इसके बाद बहुत से आवंटियों ने इन फ्लैटों में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
इसके लिए प्राधिकरण ने एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की थी। शुरूआत में प्राधिकरण की ओर से 938 बकाएदार आवंटियों को नोटिस के जरिए एवं फोन कर योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया गया। इनसे 75.49 करोड़ रुपये वसूली होनी थी। लॉकडाउन हो जाने के कारण शासन ने योजना की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया। ओटीएस के तहत डिफाल्टर आवंटियों को बकाया जमा कर दंड ब्याज में छूट का लाभ देने का प्रावधान था। लेकिन ओटीएस योजना के तहत केवल 169 बकाएदारों ने ही योजना का लाभ लिया। जबकि 320 आवंटी अभी भी कई बार नोटिस देने के बावजूद कोई जवाब नहीं दे रहे थे।
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प्राधिकरण ने जारी किए थे अंतिम नोटिस
मार्च माह में प्राधिकरण द्वारा 320 आवंटियों को अंतिम नोटिस जारी किए गए थे। जिसके बाद आवंटन निरस्त होने के डर से मात्र 30 लोगों ने नोटिस का जवाब देते हुए करीब पांच करोड़ रुपये बकाया जमा किए। जबकि 290 आवंटियों द्वारा अंतिम नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। इन पर करीब 20 करोड़ रुपये का बकाया है।
एचपीडीए के ओएसडी दिनेश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से लगातार नोटिस जारी किए गए थे। मार्च में जारी किए गए अंतिम नोटिस का तीस लोगों ने जवाब देते हुए उन पर बकाया धनराशि को जमा किया है। बाकी 290 ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। ऐसे में अब इन सभी के आवंटन को रद्द करने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2014-15 में एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैटों का आवंटन किया गया था। इसके बाद प्रीत विहार आनंद विहार फेस वन, फेस टू में भी फ्लैटों का निर्माण कर इनका आवंटन किया गया। इसमें आवासीय के साथ साथ व्यवसायिक भूखंड भी शामिल हैं। आवंटन के दौरान आवंटियों ने प्राधिकरण द्वारा निर्धारित धनराशि जमा की थी। लेकिन इसके बाद बहुत से आवंटियों ने इन फ्लैटों में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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इसके लिए प्राधिकरण ने एक मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की थी। शुरूआत में प्राधिकरण की ओर से 938 बकाएदार आवंटियों को नोटिस के जरिए एवं फोन कर योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया गया। इनसे 75.49 करोड़ रुपये वसूली होनी थी। लॉकडाउन हो जाने के कारण शासन ने योजना की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया। ओटीएस के तहत डिफाल्टर आवंटियों को बकाया जमा कर दंड ब्याज में छूट का लाभ देने का प्रावधान था। लेकिन ओटीएस योजना के तहत केवल 169 बकाएदारों ने ही योजना का लाभ लिया। जबकि 320 आवंटी अभी भी कई बार नोटिस देने के बावजूद कोई जवाब नहीं दे रहे थे।
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प्राधिकरण ने जारी किए थे अंतिम नोटिस
मार्च माह में प्राधिकरण द्वारा 320 आवंटियों को अंतिम नोटिस जारी किए गए थे। जिसके बाद आवंटन निरस्त होने के डर से मात्र 30 लोगों ने नोटिस का जवाब देते हुए करीब पांच करोड़ रुपये बकाया जमा किए। जबकि 290 आवंटियों द्वारा अंतिम नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। इन पर करीब 20 करोड़ रुपये का बकाया है।
एचपीडीए के ओएसडी दिनेश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से लगातार नोटिस जारी किए गए थे। मार्च में जारी किए गए अंतिम नोटिस का तीस लोगों ने जवाब देते हुए उन पर बकाया धनराशि को जमा किया है। बाकी 290 ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। ऐसे में अब इन सभी के आवंटन को रद्द करने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।