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सिंभावली शुगर मिल को मिले 12 करोड़, किसानों का हुआ भुगतान
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सिंभावली शुगर मिल को मिले 12 करोड़, किसानों का हुआ भुगतान
हापुड़। केंद्र सरकार से सिंभावली शुगर मिल को 12 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल गई है, जिसे किसानों के खातों में भेज दिया गया है। हालांकि ब्रजनाथपुर मिल को अभी तक सब्सिडी नहीं मिली है। अधिकारी जल्द ही मिलने का दावा कर रहे हैं। दोनों मिलों को 69 करोड़ का अनुदान सरकार से मिलना है। 12 करोड़ के भुगतान के बाद भी मिलों पर अभी भी करोड़ों रुपया बकाया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। लेकिन यहां के दोनों ही शुगर मिलों की भुगतान प्रणाली से किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होता जा रहा है। वर्तमान पेराई सत्र 2020-21 में किसान मिलों पर 50 फीसदी से अधिक गन्ना डाल चुके हैं। इस सत्र के अलावा सत्र 2019-20 का भी करीब 108 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ है। हालांकि चीनी मिल प्रबंधकों का दावा था कि केंद्र सरकार से मिलने वाली 69 करोड़ की सब्सिडी से किसानों का भुगतान किया जाएगा। इसमें सिंभावली मिल को 64 और ब्रजनाथपुर मिल को पांच करोड़ रुपये मिलने थे। हालांकि सिंभावली शुगर मिल को लगभग 12 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है, जिसे किसानों के खातों में भेज दिया गया है। लेकिन ब्रजनाथपुर शुगर मिल को फिलहाल कोई सब्सिडी नहीं मिली है।
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भुगतान न होने से किसान हो रहे कर्जदार
वर्तमान सत्र में भी किसान शुगर मिलों पर आधे से अधिक फसल को सप्लाई कर चुके हैं। लेकिन इस सत्र का एक भुगतान नहीं हुआ है। करीब तीन अरब से अधिक की बकायेदारी मिलों पर हो चुकी है। ऐसे में किसानों के बिजली की बकायेदारी पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। स्कूलों से फीस का तकादा हो रहा है। ऐसे में मिलों से अपने ही गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण किसानों को सूदखोरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जहां उच्च ब्याज दर पर किसानों को ऋण मिलता है फिर वह कर्ज के बोझ तले दबे रहते हैं।
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सिंभावली मिल ने खरीदा है 43 लाख क्विंटल गन्ना
सिंभावली शुगर मिल ने इस सत्र में किसानों का करीब 43 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है, जिसकी कीमत डेढ़ अरब रुपये बनती है। इसका कोई भुगतान किसानों को नहीं किया गया है।
बीते सत्र का अटका है 108 करोड़ रुपया
जिले के सिंभावली और बृजनाथपुर शुगर मिल पर किसानों का बीते सत्र का 108 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। इसमें सिंभावली पर 91 करोड़ ओर ब्रजनाथुपर पर करीब 17 करोड़ रुपया बकाया है।
क्या कहते हैं किसान-
किसान ज्ञानेश्वर त्यागी का कहना है कि शुगर मिल किसानों का मजाक बना रही हैं। गन्ना आपूर्ति करने के बावजूद किसानों का भुगतान नहीं हो रहा। जबकि सरकार 14 दिन के अंदर भुगतान कराने का आदेश दे चुकी है। लेकिन मिलों पर कोई असर हो रहा। किसानों को परेशानी हो रही है।
किसान परमजीत सिंह का कहना है कि किसान पर बैंक, बिजली निगम आदि कोई पैसा नहीं छोड़ना चाहता और किसानों का अरबों रुपये मिल दबाए बैठे हैं। प्रशासन को किसानों का साथ देना चाहिए, ताकि उनका भुगतान हो सके। घर खर्च चलाने में काफी परेशानी हो रही है।
जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने बताया कि शुगर मिलों से लगातार किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। बीते सत्र का जल्द ही पूरा भुगतान हो जाएगा। सब्सिडी का पैसा सीधे किसानों के खातों में ही जाएगा।
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हापुड़। केंद्र सरकार से सिंभावली शुगर मिल को 12 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल गई है, जिसे किसानों के खातों में भेज दिया गया है। हालांकि ब्रजनाथपुर मिल को अभी तक सब्सिडी नहीं मिली है। अधिकारी जल्द ही मिलने का दावा कर रहे हैं। दोनों मिलों को 69 करोड़ का अनुदान सरकार से मिलना है। 12 करोड़ के भुगतान के बाद भी मिलों पर अभी भी करोड़ों रुपया बकाया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। लेकिन यहां के दोनों ही शुगर मिलों की भुगतान प्रणाली से किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होता जा रहा है। वर्तमान पेराई सत्र 2020-21 में किसान मिलों पर 50 फीसदी से अधिक गन्ना डाल चुके हैं। इस सत्र के अलावा सत्र 2019-20 का भी करीब 108 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ है। हालांकि चीनी मिल प्रबंधकों का दावा था कि केंद्र सरकार से मिलने वाली 69 करोड़ की सब्सिडी से किसानों का भुगतान किया जाएगा। इसमें सिंभावली मिल को 64 और ब्रजनाथपुर मिल को पांच करोड़ रुपये मिलने थे। हालांकि सिंभावली शुगर मिल को लगभग 12 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है, जिसे किसानों के खातों में भेज दिया गया है। लेकिन ब्रजनाथपुर शुगर मिल को फिलहाल कोई सब्सिडी नहीं मिली है।
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भुगतान न होने से किसान हो रहे कर्जदार
वर्तमान सत्र में भी किसान शुगर मिलों पर आधे से अधिक फसल को सप्लाई कर चुके हैं। लेकिन इस सत्र का एक भुगतान नहीं हुआ है। करीब तीन अरब से अधिक की बकायेदारी मिलों पर हो चुकी है। ऐसे में किसानों के बिजली की बकायेदारी पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। स्कूलों से फीस का तकादा हो रहा है। ऐसे में मिलों से अपने ही गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण किसानों को सूदखोरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जहां उच्च ब्याज दर पर किसानों को ऋण मिलता है फिर वह कर्ज के बोझ तले दबे रहते हैं।
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सिंभावली मिल ने खरीदा है 43 लाख क्विंटल गन्ना
सिंभावली शुगर मिल ने इस सत्र में किसानों का करीब 43 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है, जिसकी कीमत डेढ़ अरब रुपये बनती है। इसका कोई भुगतान किसानों को नहीं किया गया है।
बीते सत्र का अटका है 108 करोड़ रुपया
जिले के सिंभावली और बृजनाथपुर शुगर मिल पर किसानों का बीते सत्र का 108 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। इसमें सिंभावली पर 91 करोड़ ओर ब्रजनाथुपर पर करीब 17 करोड़ रुपया बकाया है।
क्या कहते हैं किसान-
किसान ज्ञानेश्वर त्यागी का कहना है कि शुगर मिल किसानों का मजाक बना रही हैं। गन्ना आपूर्ति करने के बावजूद किसानों का भुगतान नहीं हो रहा। जबकि सरकार 14 दिन के अंदर भुगतान कराने का आदेश दे चुकी है। लेकिन मिलों पर कोई असर हो रहा। किसानों को परेशानी हो रही है।
किसान परमजीत सिंह का कहना है कि किसान पर बैंक, बिजली निगम आदि कोई पैसा नहीं छोड़ना चाहता और किसानों का अरबों रुपये मिल दबाए बैठे हैं। प्रशासन को किसानों का साथ देना चाहिए, ताकि उनका भुगतान हो सके। घर खर्च चलाने में काफी परेशानी हो रही है।
जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने बताया कि शुगर मिलों से लगातार किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। बीते सत्र का जल्द ही पूरा भुगतान हो जाएगा। सब्सिडी का पैसा सीधे किसानों के खातों में ही जाएगा।